राहुल का ‘मोहरा’ हुआ बेचारा ! हार्दिक के चुनाव लड़ने पर अब भी मंडरा रहा संकट, SC ने भी लताड़ लगाई, ‘7 महीनों से सो रहे थे ? अब अचानक क्यों जागे ?’

Written by

गुजरात में पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नाम पर मोदी विरोधी एजेंडा लेकर सामाजिक और फिर राजनीतिक जीवन का आरंभ करने वाले हार्दिक पटेल की लोकसभा चुनाव 2019 के मैदान में कूदने की मंशा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पहले पटेल समुदाय को न्याय दिलाने की बात करने वाले और बाद में कांग्रेस में शामिल हो चुके हार्दिक के जरिए कांग्रेस की गुजरात में मोदी विरोधी वोटों को और खास कर भाजपा के सबसे मजबूत वोट बैंक पाटीदार समुदाय में सेंध लगाने की यह मंशा पूरी होगी या नहीं ? हार्दिक जनता की अदालत में जा पाएँगे या नहीं ? इसका निर्णय अब 4 अप्रैल को ही होगा और गुजरात में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि भी 4 अप्रैल ही है। यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने में देर हुई, तो हार्दिक का चुनाव लड़ना असंभव भी हो सकता है।

हार्दिक के साथ क्या हुई ट्रैजेडी ?

अब आइए आपको बताते हैं कि हार्दिक के साथ वास्तव में क्या ट्रैजेडी हुई है ? हार्दिक ने कांग्रेस जॉइन की, तभी से उनका इरादा स्पष्ट हो गया था कि कांग्रेस और हार्दिक दोनों चाहते थे कि हार्दिक को गुजरात में चुनाव लड़ाया जाए, परंतु अब ऐसा नहीं हो पाना सुप्रीम कोर्ट के 4 अप्रैल के फैसले पर निर्भर करेगा।। वास्तव में पाटीदार आरक्षण समिति (PAAS) के संयोजक और कांग्रेस नेता हार्दिक पटेल को पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान मेहसाणा के विसनगर में हुए दंगों और भाजपा विधायक ऋषिकेश पटेल के ऑफिस में तोड़फोड़ के मामले में मेहसाणा की विसनगर अदालत ने जुलाई-2018 में 2 साल की सजा सुनाई थी। हार्दिक ने इस सजा पर रोक के लिए अगस्त-2018 में गुजरात उच्च न्यायालय (HC) में याचिका दायर की, जिसे हाल ही में खारिज़ कर दिया गया। इसके साथ ही हार्दिक के चुनाव लड़ने की मंशा पर लगभग पानी फिर गया। हार्दिक को उम्मीद अब उच्चतम् न्यायालय से थी, परंतु वहाँ भी हार्दिक को तुरंत स्टे तो मिला नहीं, उल्टे फटकार सुननी पड़ी।

आप स्वयं की सहायता नहीं करते, तो हम भी सहायता नहीं करेंगे : जस्टिस अरुण मिश्रा

हार्दिक पटेल ने 2 साल की सजा पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में गत सोमवार को याचिका दाखिल करते हुए गुहार लगाई कि इस याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई की जाए, परंतु मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों अरुण मिश्रा, न्यायाधीश एम. एम. शातनागौदार तथा न्यायाधीश नवी सिन्हा की बेंच ने हार्दिक की इस गुहार को एक झटके में निरस्त कर दिया और कहा, ‘हमें नहीं लगता कि इस केस में शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता है। सुनवाई निर्धारित समय 4 अप्रैल को ही होगी।’ न्यायाधीश अरुण मिश्रा ने हार्दिक के वकील के शीघ्र सुनवाई के आग्रह पर कहा, ‘जुलाई-2018 में हार्दिक को सजा हुई। सात-आठ महीनों से अब तक आप क्या कर रहे थे ? अब आप अचानक जागे और शीघ्र सुनवाई की मांग कर रहे हैं। यदि आप स्वयं की सहायता नहीं कर सकते, तो हम भी आपकी सहायता नहीं करेंगे।’

Article Categories:
News

Leave a Reply

Shares