क्या हो गया है कांग्रेस नेताओं को ? कोई विभाजनवादी जिन्ना का प्रशंसक, तो कोई अलगाववादी यासीन का समर्थक !

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राहुल गांधी नहीं दे सकेंगे जवाब : जानिए क्यों ?

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

लोकसभा चुनाव 2019 में दिल्ली की गद्दी पर विराज़मान होने के सपने संजोए कांग्रेस और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी स्वयं को, अपने पूर्वजों को, अपनी पार्टी को और अपने परिवार को पक्का देशभक्त बताने से नहीं चूकते। राहुल अपनी जगह सही हैं और कांग्रेस पार्टी या भूतकाल में हो चुके उसके सभी नेता महात्मा गांधी से लेकर जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और यहाँ तक कि स्वयं राहुल और उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा की देशभक्ति पर भी किसी को कोई संदेह नहीं है, परंतु देशभक्ति का विशाल इतिहास रखने वाली इस पार्टी के कई नेता चुनाव प्रचार में ऐसे बयान दे रहे हैं, जिससे न केवल उन नेताओं की देशभक्ति पर संदेह उठ रहा है, अपितु स्वयं कांग्रेस और राहुल को भी मुश्किल में डाल रहे हैं।

ऐसे ही दो बयान दो कांग्रेस नेताओं की तरफ से आए हैं। एक नेता ने तो भारत को लहुलुहान करने वाले देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार मोहम्मद अली जिन्ना पर प्रशंसा के फूल बरसा दिए, तो दूसरे नेता ने भारत के अभिन्न अंग कश्मीर को भारत से अलग करने की आतंकी साज़िशें रचने वाले यासीन मलिक की पैरोकारी कर दी। इनमें जिन्ना प्रशंसक नेता का नाम है पूर्व भाजपा नेता शत्रुघ्न सिन्हा, जो नए-नए कांग्रेस में शामिल हुए हैं और पटना साहिब से केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के विरुद्ध चुनाव लड़ रहे हैं। यासीन मलिक के पैरोकार नेता का नाम है पी. सी. चाको, जिनकी गिनती कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में होती है।

राहुल से जवाब की उम्मीद नहीं !

प्रश्न यह उठता है कि अपने नेताओं की इस फ़िसलती ज़ुबान पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कोई जवाब देंगे ? नहीं, राहुल जवाब नहीं दे सकेंगे, क्योंकि राहुल भी कश्मीर में ऐसे लोगों की जमात में जा बैठे हैं, जो कश्मीर के लिए अलग राष्ट्रपति और अलग प्रधानमंत्री की मांग करते हैं। इतना ही नहीं, कांग्रेस और राहुल गांधी ने ऐसी देशद्रोही मांग करने वाले उमर अब्दुल्ला और उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) से कश्मीर में चुनावी गठबंधन किया है। इससे भी बड़ी बात यह है कि कांग्रेस, राहुल, एनसी और उमर-फारूक़ अब्दुल्ला ने कश्मीर में अपने राजनीतिक विरोधी दल पीपल्स डैमोक्रेटिक पार्टी (PDP) और उसकी मुखिया महबूबा मुफ्ती के देश विरोधी बयानों पर भी कभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जिसमें महबूबा ने कहा था कि धारा 370 और अनुच्छेद 35ए खत्म करने पर कश्मीर भारत से अलग हो जाएगा। चलिए उमर और फारूक़ की तो कश्मीरी मजबूरी है, परंतु राहुल महबूबा के बयान पर क्यों मौन रहे? यह बड़ा सवाल है।

भारत के विकास में जिन्ना का भी योगदान : शत्रुघ्न

आइए अब मुद्दे की बात करते हैं। तीन दशक तक भाजपा में रहे शत्रुघ्न सिन्हा ने पार्टी बदलते ही देशप्रेमियों में जिन्ना का नाम भी जोड़ दिया। वो जिन्ना, जो भारत के विभाजन के उत्तरदायी थे। सिन्हा ने मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के सौसर में एक चुनावी सभा में कहा कि देश की आज़ादी और तरक्की में जिन्ना का भी सबसे बड़ा योगदान है। आज़ादी तक तो सिन्हा की बात ठीक थी, परंतु स्वतंत्र भारत के विकास में जिन्ना ने क्या योगदान किया ? यह समझ से परे है। सिन्हा ने कुछ यूँ कहा, ‘यह कांग्रेस परिवार महात्मा गांधी से लेकर, सरदार वल्लभभाई पटेल से लेकर, मोहम्मद अली जिन्ना से लेकर, जवाहर लाल नेहरू से लेकर, स्वर्गीय इंदिरा गांधी से लेकर, राजीव गांधी से लेकर, राहुल गांधी से लेकर, नेताजी सुभाष चंद्र पार्टी बोस की पार्टी है, जिनका देश की तरक्की, देश की आज़ादी में सबसे बड़ा योगदान हुआ, इसलिए हम यहाँ आए।’ आश्चर्य तब हुआ, जब सिन्हा ने आज़ादी आंदोलन में राजीव, सोनिया, राहुल का नाम भी जोड़ दिया। शायद सिन्हा प्रियंका गांधी वाड्रा का नाम भूल गए।

जिस यासीन को कोर्ट का झटका, चाको ने उसे साहसी बताया

जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक पर आतंकी संगठनों को वित्तीय सहायता पहुँचाने, हत्या और अपहरण का 30 साल पुराना केस चल रहा है। मलिक ने जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट (HC) मे याचिका दायर की कि इस मामले की सुनवाई श्रीनगर में हो, परंतु हाई कोर्ट ने झटका दिया और अब केस की सुनवाई दिल्ली में ही सीबीआई अदालत में होगी। जिस यासीन को कोर्ट ने झटका दिया, उसके लिए कांग्रेस नेता चाको के मन में प्रेम उभर आया। चाको ने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार यासीन मलिक के साथ दुर्व्यवहार कर रही है। चाको ने कहा कि यासीन मलिक बहुत साहसी हैं और नई दिल्ली उन्हें इस तरह से डरा नहीं सकती। चाको ने तो यासीन के सरेंडर नहीं करने को भी सही बताते हुए कहा कि अलगाववाद के नाम पर दिल्ली यासीन मलिक को बंदूक की नोक पर सरेंडर करने के लिए कैसे कह सकती है। हालाँकि चाको ने थोड़ी चतुराई दिखाई और कहा, ‘हम भी यासीन मलिक के विचारों और गतिविधियों का समर्थन नहीं करते, परंतु जिस साहस का परिचय उन्होंने दिया, उसकी सबको सराहना करनी चाहिए।’

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