काशी की कुश्ती : मोदी विरोधियों की ‘पलटीमार पॉलिटिक्स’ ने प्रियंका का ‘उन्माद’ उतरा, तो शालिनी को किया ‘शर्मशार’ !

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उम्मीदवारी से हॉट सीट बनी उत्तर प्रदेश की वाराणसी लोकसभा सीट पर जैसे-जैसे चुनाव की तारीख निकट आ रही है, वैसे-वैसे समीकरण अब पूरी तरह बदल गए हैं। हालाँकि पौराणिक काशी में चुनावी कुश्ती में नामांकन पत्र दाखिल करने की अवधि पूरी हो गई है, परंतु इस अवधि के पूरा होने से पहले मोदी को मात देने की हर तरक़बी आज़माने वाले विरोधी दलों ने ऐसी पलटीमार पॉलिटिक्स की कि खुद वाराणसी की जनता भी असमंजस में पड़ गई कि आखिर मोदी के मुकाबले है कौन ?

वैसे तो वाराणसी में विराट रोड शो और विराट नामांकन प्रक्रिया करके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे भारत के मन में यह विश्वास बैठा दिया कि काशी के किंग वही बनने वाले हैं, परंतु इस सबके बावजूद काशी में मोदी की बेधारी काट निकालने की हर कोशिश कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा-SP) ने की और मोदी के विरुद्ध चेहरे बदलने का मानो इतिहास रच दिया। सबसे पहले पलटी मारी कांग्रेस ने।

मोदी के विराट शक्ति प्रदर्शन से पहले तक मोदी को चुनौती देने का राजनीतिक उन्माद दिखाने वाली कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के अंतिम क्षणों में होश ठिकाने आ गए। कांग्रेस ने प्रियंका को राजनीतिक आत्महत्या से बचाते हुए पिछले उम्मीदवार अजय राय को ही रिपीट कर दिया और अब सपा-बसपा-रालोद के महागठबंधन ने भी ऐन मौके पर अपना प्रत्याशी बदल दिया है। गठबंधन के तहत वाराणसी लोकसभा सीट सपा के खाते में आई है। सपा ने पहले उस शालिनी यादव को टिकट दिया, जो कभी कांग्रेस में थीं और प्रियंका के साथ काम कर चुकी थीं। इतना ही नहीं, शालिनी यादव मेयर का चुनाव तक नहीं जीत सकी थीं, परंतु जब सपा को लगा कि मोदी सरकार पर जवानों की अनदेखी का आरोप लगाने वाले सीमा सुरक्षा बल (BSF) के बर्खास्त जवान तेज बहादुर निर्दलीय ताल ठोक सकते हैं, तो सपा शालिनी को छोड़ तेज बहादुर की गोद में ही जा बैठी। इस तरह मोदी को चुनौती देकर पूरे देश में छा जाने का सपना देखने वालीं शानिली यादव को पलटीमार पॉलिटिक्स ने शर्मशार होने पर विवश कर दिया।

लोकसभा चुनाव 2019 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दोबारा काशी से चुनावी मैदान में ताल ठोकी है। अपना पर्चा भरने से पहले मोदी ने काशी की गलियों में शक्ति प्रदर्शन किया। मोदी की ताकत देखते ही विपक्षी दलों में खलबली मच गई। मोदी के रोड शो से पहले तक कांग्रेस की नई-नवेली महासचिव बनी प्रियंका गांधी वाड्रा अलग-अलग रैलियों में कह रही थी कि अगर पार्टी ने उन्हें अनुमति दी तो वह बनारस में मोदी के विरुद्ध चुनाव लड़ने के लिये तैयार हैं, रोड शो के बाद उनकी बोलती ही बंद हो गई। कांग्रेस ने भी पलटी मार दी और कहा कि उसने कभी नहीं कहा कि वह बनारस से प्रियंका गांधी को टिकट देने वाली है। पहले ही चुनाव में प्रियंका गांधी की फजीहत न हो जाए, इसलिये कांग्रेस ने काशी के मैदान में उन्हें उतारने के बजाय दोबारा अजय राय को ही टिकट देकर केवल काशी में उम्मीदवार रखने की औपचारिकता पूरी कर दी। जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में अजय राय तीसरे क्रम पर रहे थे और उन्हें मात्र 75 हजार वोट ही मिले थे। इसलिये इस बार उन्हें रिपीट किये जाने का तो कोई औचित्य नहीं था, मगर काशी में मोदी के विरुद्ध चुनाव लड़ने के लिये कांग्रेस से कोई नेता आगे ही नहीं आ रहा था, इसलिये अजय राय को रिपीट करना कांग्रेस की मजबूरी थी।

अब मोदी विरोधी महागठबंधन ने भी काशी के मैदान में कांग्रेस की तर्ज पर पलटी मार दी है। उत्तर प्रदेश में 80 लोकसभा सीटों के लिये समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल ने भाजपा और मोदी के विरुद्ध महा गठबंधन किया है। यह गठबंधन कांग्रेस की दो परंपरागत सीटों राय बरेली और अमेठी को छोड़कर सभी 78 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है। काशी में भी मोदी के पर्चा भरने से पहले ही इस गठबंधन ने पेशे से फैशन डिजाइनर शालिनी यादव को महा गठबंधन से प्रत्याशी घोषित कर दिया था।

दूसरी तरफ सीमा सुरक्षा बल से बर्खास्त हुए एक जवान तेज बहादुर काशी में निर्दलीय उम्मीदवारी कर रहे थे। अपनी बर्खास्तगी से नाराज तेज बहादुर खुद को असली चौकीदार और पीएम नरेन्द्र मोदी को नकली चौकीदार बताकर काशी में अपना प्रचार कर रहे थे। पीएम मोदी के काशी में रोड शो करने और पर्चा भरने के बाद महागठबंधन का चुनावी गणित भी गड़बड़ा गया और ऐन मौके पर अब उसने भी कांग्रेस की तरह अपना प्रत्याशी बदल दिया है। उसने निर्दलीय चुनाव लड़ रहे बर्खास्त बीएसएफ जवान तेज बहादुर को ही महागठबंधन का उम्मीदवार घोषित करके उनसे पर्चा भरवा दिया है और शालिनी यादव का पत्ता काट दिया है। शालिनी यादव काशी के मेयर के चुनाव भी लड़ी थी और उसमें भी सफल नहीं हो पाई थी। इस प्रकार पलटी मार पॉलिटिक्स से काशी के चुनावी रण में एक बार फिर रोचक मोड़ आ गया है। हालाँकि विपक्ष के गुलाटियाँ मारने से मोदी की मजबूत दावेदारी पर किसी तरह का कोई प्रभाव पड़ने की संभावना कम ही है और अभी भी यहाँ उनका कद सबसे ऊंचा बना हुआ है।

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