पर्यावरण पर बढ़ता खतरा, 2050 तक खत्म हो जाएंगे Coral Reefs

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Coral Reefs

हाल ही में हुई एक रिसर्च में मुताबिक समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (Eco-System) के लिए अहम Coral Reefs साल 2050 तक पूरी तरह से खत्म हो सकती हैं। अगर ऐसा होता है तो यकीनन समुद्री जीवन के नजरिए यह बेहद ही खतरनाक बात होगी, जिसका बुरा असर इंसानों पर होना स्वाभाविक है। बता दें कि इस संबंध में एक रिपोर्ट Journal Science में भी छपी है।

क्या होते हैं Coral Reefs

कोरल रीफ (Coral Reefs) को आसान भाषा में समुद्र के वन कहा जाता है। कोरल सैंकड़ो- हजारों जीवों की मिली-जुली कॉलोनी होती है, जो चूने से ढकी होती है। इन कॉलोनियों के मेल से ही कोरल रीफ बनते हैं। धरती की तरह ही यहां के जीव भी एक दूसरे पर निर्भर रहते हैं। अपनी जैव विविधता के कारण कोरल रीफ समुद्री Eco-System के लिए बेहद जरुरी हैं। कोरल रीफ बेहद संवेदनशील और आकर्षक होते हैं, जो कि लाखों-करोड़ो साल पुराने हैं। कोरल समुद्री जीवों को आवास, सुरक्षा, पर्यावास प्रदान करते हैं और बदले में उनसे पोषक तत्व पाते हैं। इसके साथ ही कोरल प्राकृतिक जैव अवरोधकों की भूमिका भी निभाते हैं। जिससे हमारे समुद्री तटों को लहरों से होने वाले नुकसान से बचाते हैं।

Coral Reefs

Global Warming से हो रहा नुकसान

परेशानी की बात ये है कि ग्लोबल वॉर्मिंग का असर धरती के साथ ही समुद्री जीवन पर भी पड़ रहा है। धरती का तापमान बढ़ने के कारण समुद्र में कोरल रीफ के 70 % हिस्से का सफाया हो चुका है। ग्लोबल वॉर्मिंग के साथ ही समुद्र में बढ़ती मानवीय गतिविधियों से कोरल रीफ बड़ी ही तेजी से खत्म हो रहे हैं। Australian Research Council Centre of Excellence for Coral Reef Studies के 25 वैज्ञानिकों की टीम ने 100 कोरल रीफ पर रिसर्च की है। रिसर्च में पता चला है कि धरती के तापमान में 1.5-2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी होते ही कोरल रीफ के अस्तित्व पर संकट गहरा जाएगा। रिसर्च के अनुसार, साल 2050 तक समुद्र से Coral Reef पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे। जिसका खामियाजा समुद्री जीवों के साथ-साथ इंसानों को भी भुगतना पड़ेगा।

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