बीना दास, जिन्होंने भरी सभा में भाषण देने खड़े हुए ब्रिटिश गवर्नर पर गोली चला दी…

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रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 26 दिसंबर, 2019 युवाPRESS। बंगाल की भारतीय क्रांतिकारी और राष्ट्रवादी महिला बीना दास की क्रांतिकारी गाथा किसी शेरनी से कम नहीं लगती। भरी सभा में अंग्रेज अधिकारी पर गोली चलाना न केवल उनके साहस का परिचय देता है, अपितु माँ भारती के प्रति उनके अतुल्य प्रेम को भी दर्शाता है। भारत की महिला क्रांतिकारियों में से एक थीं। इनका रुझान प्रारम्भ से ही सार्वजनिक कार्यों की ओर रहा था। ‘पुण्याश्रम संस्था’ की स्थापना इन्होंने की थी, जो निराश्रित महिलाओं को आश्रय प्रदान करती थी। बीना दास का सम्पर्क ‘युगांतर दल’ के क्रांतिकारियों से हो गया था। एक दीक्षांत समारोह में इन्होंने अंग्रेज़ गवर्नर स्टनली जैक्सन पर गोली चलाई, लेकिन इस कार्य में गवर्नर बाल-बाल बच गया और बीना गिरफ़्तार कर ली गईं। 1937 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद कई राजबंदियों के साथ बीना दास को भी रिहा कर दिया गया। आज हम बीना दास को इसलिए याद कर रहे हैं, क्योंकि आज उनकी 33वीं पुण्यतिथि है।

क्रांतिकारी बीना दास का जन्म 24 अगस्त, 1911 को ब्रिटिश कालीन बंगाल के कृष्णानगर में हुआ था। उनके पिता बेनी माधव दास बहुत प्रसिद्ध अध्यापक थे और नेताजी सुभाषचन्द्र बोस भी उनके छात्र रह चुके थे। बीना की माता सरला दास भी सार्वजनिक कार्यों में बहुत रुचि लेती थीं और निराश्रित महिलाओं के लिए उन्होंने ‘पुण्याश्रम’ नामक संस्था भी बनाई थी। ब्रह्म समाज का अनुयायी यह परिवार शुरू से ही देशभक्ति से ओत-प्रोत था। इसका प्रभाव बीना दास और उनकी बड़ी बहन कल्याणी दास पर भी पड़ा। साथ ही बंकिम चन्द्र चटर्जी और मेजिनी, गेरी वाल्डी जैसे लेखकों की रचनाओं ने उनके विचारों को नई दिशा दी।

1928 में कलकत्ता के ‘बैथुन कॉलेज’ में पढ़ाई के दौरान ही वे कोलकाता में महिलाओं के संचालित अर्ध-क्रांतिकारी संगठन छात्री संघ की सदस्या भी थीं। उन दिनों सभी लोग साइमन कमीशन का बहिष्कार कर रहे थे। बीना ने भी अपनी कक्षा की कुछ अन्य छात्राओं के साथ अपने कॉलेज के फाटक पर धरना देकर साइमन कमीशन का बहिष्कार किया था। बाद में वे स्वयं सेवक के रूप में कांग्रेस अधिवेशन में भी सम्मिलित हुईं। इसके बाद वे ‘युगांतर’ दल के क्रान्तिकारियों के सम्पर्क में आईं। उन दिनों क्रान्तिकारियों का एक ही लक्ष्य था, अंग्रेज़ अधिकारियों को गोली का निशाना बनाकर यह दिखाना कि भारत के निवासी उनसे कितनी घृणा करते हैं।

6 फरवरी, 1932 को बंगाल के गवर्नर स्टेनली जैक्सन को विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को दीक्षांत समारोह में उपाधियाँ बाँटनी थीं। उसी समारोह में बीना दास को भी बी.ए. की अपनी डिग्री लेनी थी। माँ भारती के कुछ कर दिखाने का ये अच्छा अवसर था, उन्होंने अपने साथियों से परामर्श करके तय किया कि डिग्री लेते समय वे दीक्षांत भाषण देने वाले बंगाल के गवर्नर स्टेनली जैक्सन को अपनी गोली का निशाना बनाएँगी। बीना अपने इस दृढ़ संकल्प के साथ समारोह में पहुँची।

दीक्षांत समारोह में जैसे ही गवर्नर ने भाषण देना प्रारम्भ किया, बीना दास अपनी सीट से उठीं और तेजी से गवर्नर के सामने जाकर रिवाल्वर से गोली चला दी। बीना को अचानक अपनी ओर आता देख गवर्नर भागने की कोशिश करने लगा, जिस कारण बीना के निशाना चूक गया। गोली गवर्नर के कान के पास से निकल गई और वह मंच पर लेट गया और बच गया। इतने में लेफ्टिनेन्ट कर्नल सुहरावर्दी ने दौड़कर बीना दास का गला एक हाथ से दबा लिया और दूसरे हाथ से पिस्तौल वाली कलाई पकड़ कर सीनेट हाल की छत की तरफ कर दी, इसके बावजूद बीना गोली चलाती गईं। बीना के इस साहस के कारण उन्हें वहीं बंदी बना लिया गया और उन पर हत्या के प्रयास करने का मुकदमा चलाया गया। एक ही दिन में सारी कार्यवाई पूरी करके बीना को 9 वर्ष क़ैद की सज़ा सुनाई गई।

1937 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद अन्य राजबंदियों के साथ बीना को भी जेल से मुक्त कर दिया गया। हालाँकि 1942 में जब गाँधी जी ने ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ छेड़ा, तो उस समय बीना को 3 वर्ष के लिये नज़रबन्द कर लिया गया था। इसके बाद 1946 में उन्हें बंगाल विधान सभा का सदस्य चुना गया। 7 नवंबर 1946 को जब नोआखाली सांप्रदायिकता की आग में झुलस रहा था तब महात्मा गांधी यहाँ आए थे। गांधी जी की नौआखाली यात्रा के समय लोगों के पुनर्वास के काम में बीना ने भी आगे बढ़कर हिस्सा लिया था। बीना दास ने बंगाली में शृंखलझंकार और पितृधन नामक दो आत्मकथाएँ लिखीं थीं। १९४७ में उनका युगान्तर समूह के भारतीय स्वतन्त्रता कार्यकर्ता जतीश चन्द्र भौमिक से विवाह हो गया। उनके पति के देहान्त के बाद, उन्होंने ऋषिकेश में एकान्त जीवन व्यतीत करना आरम्भ किया और अज्ञातवास में ही 26 दिसम्बर, 1986 को उत्तराखण्ड के ऋषिकेश में वीर क्रांतिकारियों में गिनी जाने वाली बीना दास का निधन हो गया।

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