क्या दिल्ली की मुस्लिम यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक संस्थान कहना सही है?

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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की जानी मानी मुस्लिम यूनिवर्सिटी जामिया मिलिया (Muslim University JMU) कया अल्पसंख्यक संस्थान है। हाल ही में इस यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्या (minority) होने का बड़ा बवाल मचा हुआ है।

एक तरफ साल 2011 में कांग्रेस सरकार से फ़िलहाल वर्त्तमान के मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने एनसीएमईआई (NCMI) के फैलसे का सम्मान करते हुए कोर्ट में हलफनामा (affidavit) दाखिल करके जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक संस्थान (Minority institute) होने कि बात को स्वीकारा था । तो दूसरी और अब केंद्र सरकार के द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट में फिर से  हलफनाम दाखिल कर जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी (Muslim University JMU) के अल्पसंख्यक संस्थान के दर्जे होने का विरोध कर दिया गया है।

केन्द्र सरकार द्वारा कोर्ट में दाखिल हलफनामा में अजीज बाशा बनाम भारत गणराज्य (केस 1968) द्वरा बताया गया है कि, जो भी यूनिवर्सिटी  संसद एक्ट के तहत शामिल होती हैं, उसे अल्पसंख्यक संस्थान (Minority institute) का दर्जा देना सही नहीं होगा अथार्थ वह यूनिवर्सिटी अल्पसंख्यक संस्थान नही मानी जा सकती।

जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी को मुस्लिम का दर्ज़ा दिया जाता है, लेकिन यह कहना भी गलत नही होगा की इसमें मुस्लिम के अलावा भी अन्य धर्म के स्टूडेंट्स भी मोजूद है। इतना ही नहीं बल्कि जब जामिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी (Muslim University JMU) के समर्थन की बात भी कभी सामने आती दिखी है तो समर्थन में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) और जवाहार लाल नेहरु यूनिवर्सिटी (JNU) के छात्र भी शामिल रहे हैं, फिर चाहे वो मुस्लिम हो या फिर हिन्दू ही क्यों न हो। इसके अलावा भी जिन स्टूडेंट्स का एडमिशन दिल्ली की मशहुर यूनिवर्सिटी जैसे दिल्ली विश्विधालय (DU), जवाहार लाल नेहरु (JNU), गुरु गोबिंद सिंह इन्देर्प्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) में नहीं हो पता वह जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी (JIMU) में एडमिशन लेते हैं। वर्ष 2011 में एनसीएमईआई (NCMI) के द्वारा कहा गया था की जामिया इस्लामिया की स्थापना मुस्लिमों द्वरा उनके फायदे के लिए की गयी थी और वह अपनी पहचान नहीं छोड़ेगा। हालाँकि जामिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी ने एसटी (ST) और ओबीसी (OBC) छात्रों को आरक्षण (reservation) देने से साफ़ मना कर दिया था।  लेकिन मुस्लिम स्टूडेंट्स को हर कोर्स में आधी सीट आरक्षित की थी। 30 प्रतिश मुस्लिम स्टूडेंट्स के साथ साथ 10 प्रतिश मुस्लिम महिलाये के लिए भी की गयी थी।

हाई कोर्ट में जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के फैसले के विरोध में पाच (5) याचिका दाखिल की गयी है। जिसमें कोर्ट द्वारा जवाब मांगे जाने पर मंत्री कपिल सिब्बल ने कोर्ट में हलफनामा (affidavit) दाखिल कर एनसीएमईआई के फैसले का समर्थन किया।

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