फाँसी के फंदे पर लटकेंगे निर्भया के अपराधी या लटक जाएगी फाँसी ?

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 12 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। दिल्ली में 7 साल पुराने 16 दिसंबर 2012 के निर्भया गैंगरेप केस के 4 अपराधियों को शुक्रवार को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया जाएगा। इससे ऐसी अटकलें तेज हो गई हैं कि कदाचित शुक्रवार को ही इन्हें फाँसी पर लटकाने के लिये अदालत की ओर से डेथ वारंट जारी कर दिया जाएगा, परंतु अब इसकी संभावना कम ही है क्योंकि दूसरी ओर 4 में से एक अपराधी ने अदालत में पेशी से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट में अपनी सज़ा पर पुनर्विचार करने की याचिका दायर कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पुनर्विचार याचिका को सुनवाई के लिये स्वीकार कर लिया है और इस पर 17 दिसंबर को सुनवाई तय की है। इससे 16 दिसंबर को ही इन अपराधियों को फाँसी दिये जाने की जो अटकलें लगाई जा रही हैं, उस दिन इन्हें फाँसी दिये जाने के आसार धुँधले हो गये हैं। क्योंकि पिछली सुनवाई के दौरान पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया की माँ को यह आश्वासन दिया था कि चारों अपराधियों को एक साथ फाँसी दी जाएगी। ऐसे में जब एक अपराधी की पुनर्विचार याचिका पर 17 दिसंबर को सुनवाई होगी तो 16 दिसंबर को इन्हें फाँसी दिये जाने की संभावना स्वतः ही समाप्त हो गई। अब दूसरी तारीख 29 दिसंबर बचती है, जिस दिन पीड़ित निर्भया ने दम तोड़ा था। इस दिन भी अपराधियों को फाँसी पर लटकाया जाएगा या फिर फाँसी पर लटकाने का मामला ही फिलहाल लटक जाएगा। यह कहना मुश्किल है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश होंगे निर्भया के अपराधी

देश भर को हिला कर रख देने वाले दिल्ली के निर्भया गैंगरेप केस में कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से एक नाबालिग तीन साल की सजा काट कर रिहा हो चुका है। अन्य पाँच बालिग आरोपियों को दोषी ठहराते हुए अदालत ने 2015 में फाँसी की सजा सुनाई थी। हालाँकि बाद में एक अपराधी ने तिहाड़ जेल में फाँसी लगा कर आत्म हत्या कर ली। बचे हुए 4 आरोपियों को भी तिहाड़ की अलग-अलग जेलों में रखा गया है। हालाँकि अब इन्हें एक ही कोर्ट नंबर 3 में ला दिया गया है। इससे ऐसी अटकलें लगाई जाने लगी कि इन्हें फाँसी पर लटकाने का काउण्टडाउन शुरू हो गया है, परंतु वास्तविकता यह है कि शुक्रवार को इन चारों अपराधियों की पटियाला हाउस कोर्ट में पेशी है और सुरक्षा कारणों से इन्हें कोर्ट में लाना हित कर नहीं है। इसलिये इन्हें जेल से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। इस बीच अदालत में निर्भया के माता-पिता और अपराधियों के परिवारजन उपस्थित रहेंगे।

अपराधियों का डेथ वारंट जारी होने की लगाई जा रही अटकलें

इस पेशी को लेकर भी लोगों में ऐसी अटकलें तेज हो गई हैं कि पटियाला हाउस कोर्ट इन चारों को फाँसी पर लटकाने के लिये डेथ वारंट जारी कर सकती है, परंतु इसकी संभावना इसलिये नहीं है, क्योंकि अपनी पेशी से ठीक पहले एक अपराधी अक्षय कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में सजा पर पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के लिये स्वीकार करते हुए 17 दिसंबर की तारीख सुनिश्चित की है। सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ इस याचिका पर सुनवाई करेगी। इस याचिका में अक्षय ने बड़ी अजीबोगरीब दलील दी है कि दिल्ली की आबोहवा में वैसे ही लोगों की उम्र घट रही है, ऐसे में उसे फाँसी की सजा देने की क्या जरूरत है। भले ही याचिका में दी गई दलील में कोई दम नहीं है और संभावना यह भी है कि पहले दिन ही याचिका खारिज कर दी जाए, परंतु इतना तो तय है कि इस याचिका के निराकरण तक पटियाला हाउस कोर्ट, जो यह कह चुकी है कि चारों अपराधियों को एक साथ ही फाँसी पर लटकाया जाएगा, वह डेथ वारंट जारी नहीं कर सकती है। ऐसे में जो ऐसी अटकलें लगाई जा रही थी कि 16 दिसंबर के दिन चारों को फाँसी पर लटकाने का काउण्ट डाउन शुरू हो गया है, वह तारीख तो टल गई है।

16 दिसंबर को नहीं हो सकेगी फाँसी, 29 दिसंबर को होगी ?

हालाँकि जिस तरह से तिहाड़ जेल प्रशासन ने बिहार की बक्सर जेल से फाँसी के लिये विशेष रस्सियाँ मँगवाई हैं और जिस तरह से उत्तर प्रदेश की पुलिस से जल्लाद उपलब्ध कराने की माँग की है और यूपी पुलिस के डीजीपी (जेल) आनंद कुमार ने भी जल्लाद उपलब्ध कराने की माँग स्वीकार करते हुए तिहाड़ जेल प्रशासन को आश्वासन दिया है कि जब जरूरत होगी तब जल्लाद उपलब्ध करा दिया जाएगा, उससे इस अनुमान को बल मिलता है कि कदाचित चारों अपराधियों को 29 दिसंबर को फाँसी पर लटकाया जा सकता है। इस बीच ऐसी भी खबर है कि एक अपराधी विनय शर्मा ने राष्ट्रपति के पास भेजी गई दया याचिका को यह कह कर वापस ले लिया है कि यह याचिका उसकी मर्जी के खिलाफ राष्ट्रपति के पास भेजी गई है। हालाँकि राष्ट्रपति की ओर से इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं की गई है। इसलिये इस बारे में संशय बना हुआ है कि याचिका वापस ली गई है या याचिका राष्ट्रपति के समक्ष पेंडिंग है।

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