क्या आप जानते हैं ? भारतीय संविधान में बजट शब्द का कोई उल्लेख ही नहीं है !

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अहमदाबाद, 4 जुलाई 2019 (YUVAPRESS)। 5 जुलाई शुक्रवार को संसद में केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वर्ष 2019-20 का वार्षिक बजट पेश करेंगी। एक बार फिर बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री के हाथ में एक ब्रीफकेस दिखाई देगा। नई मोदी सरकार में वित्त मंत्री बदल गये हैं, परंतु ब्रीफकेस की परंपरा नहीं बदली है। वह भी अपने मंत्रालय से बाहर निकलकर संसद भवन पहुँचने से पहले मीडिया के समक्ष ब्रीफकेस के साथ तस्वीरें खिंचवाएँगी। क्या आपको पता है वित्त मंत्री बजट पेश करने से पहले ब्रीफकेस के साथ क्यों नज़र आते हैं ? आज हम आपको बताएँगे कि बजट ब्रीफकेस का पूरा इतिहास…

भारतीय संविधान में ‘बजट’ नाम का शब्द ही नहीं !

सबसे पहले तो यह जान लीजिये कि भारतीय संविधान में ‘बजट’ नाम का कोई शब्द ही उपयोग नहीं किया गया है। भारतीय संविधान में वार्षिक बजट को ‘वार्षिक वित्तीय विवरण’ कहा गया है। आपको यह जानकर भी हैरानी होगी कि यह बजट शब्द भी इस ब्रीफकेस से ही जुड़ा है। दरअसल फ्रेंच भाषा में चमड़े के बैग को बुजेट कहा जाता है, इस बुजेट यानी ब्रीफकेस से ही वार्षिक वित्तीय विवरण को भी वार्षिक बजट कहा जाने लगा। हर साल बजट पेश किया जाता है और इसीलिये वर्ष में एक बार वित्त मंत्री के हाथ में यह ब्रीफकेस देखने को मिलता है, परंतु 2019 में यह दूसरी बार होने जा रहा है, जब आप वित्त मंत्री के हाथ में ब्रीफकेस देखेंगे। क्योंकि इसी साल लोकसभा चुनाव से पहले पिछली मोदी सरकार के वित्त मंत्री पियूष गोयल ने फरवरी में अंतरिम बजट पेश किया था और अब जुलाई में नई मोदी सरकार की नई महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करने से पहले इस ब्रीफकेस के साथ नज़र आएँगी। बजट के दिन जो ब्रीफकेस नज़र आते हैं, उनका सिर्फ रंग ही बदलता है, परंतु ब्रीफकेस का आकार लगभग एक जैसा ही होता है।

कैसे शुरू हुई बजट और ब्रीफकेस की परंपरा ?

ब्रिटिश संसद को विश्व की सभी संसदीय परंपराओं की जननी माना जाता है। बजट और ब्रीफकेस परंपरा की जननी भी ब्रिटिश संसद ही है। वर्ष 1733 में जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री (चांसलर ऑफ एक्सचेकर) रॉबर्ट वॉलपोल ब्रिटिश संसद में देश की वित्तीय स्थिति का लेखा-जोखा पेश करने के लिये आए, तो उस लेखा-जोखा से जुड़े दस्तावेज एक चमड़े के बैग में रखकर लाए थे। चूँकि इस बैग को फ्रेंच भाषा में बुजेट कहा जाता है, इसलिये जब हर साल वित्तीय लेखा-जोखा लेकर वित्त मंत्री संसद में आने लगे तो कहा जाने लगा कि वित्त मंत्री बुजेट खोलेंगे और तब पता चलेगा कि उसमें क्या है ? कालांतर में इसे बुजेट से बजट कहा जाने लगा। इसके बाद बजट ही इसका नामकरण हो गया।

भारत में 1947 में पेश हुआ था पहला बजट

भारतीय संविधान के रचयिता बाबासाहब आंबेडकर ने ब्रिटेन सहित विविध देशों के संविधान से कुछ न कुछ लेकर ही भारतीय संविधान की रचना की है। इसलिये भारत ने भी अंग्रेजों की ही परंपरा को अपनाते हुए बजट पेश किया। आज़ाद भारत में सबसे पहले 26 जनवरी 1947 को पहला बजट पेश किया गया, जो देश के प्रथम वित्त मंत्री आर. के. शानमुखम चेट्टी ने पेश किया था। वह भी लेदर बैग के साथ बजट पेश करने के लिये संसद पहुँचे थे। तब से ही बजट पेश करने के लिये ब्रीफकेस लेकर संसद भवन पहुँचने की यह परंपरा भारत में निभाई जाती आ रही है। इतने साल बीतने के बावजूद ब्रीफकेस का आकार लगभग वही का वही रहा है, केवल परिवर्तन हुआ है तो ब्रीफकेस के रंग में हुआ। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जब 1991 में वित्त मंत्री थे तो उन्होंने पहली बार काले रंग का बैग इस्तेमाल किया था। जवाहरलाल नेहरू, यशवंत सिन्हा भी काले रंग का बैग लेकर ही संसद पहुँचे थे, जबकि प्रणव मुखर्जी ने लाल रंग का ब्रीफकेस उपयोग किया था। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के हाथों में ब्राउन और लाल रंग के ब्रीफकेस नज़र आ चुके हैं, जबकि फरवरी में पियूष गोयल भी लाल रंग का ब्रीफकेस उपयोग कर चुके हैं। अब देखना होगा कि महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के हाथों में किस रंग का ब्रीफकेस देखने को मिलेगा।

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