H-1B Visa rules में बदलाव से 5 लाख Indian Professionals पर खतरा

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Donald Trump administration thinking to change H-1B Visa policy change which will affect 5 lakh professionals and 15 lakh Indians.

डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं जिससे एक झटके में 5 लाख भारतीय जो अमेरिका में ऐशो आराम की जिंदगी जी रहे हैं, वे बेरोजगार हो जाएंगे और उन्हें भारत लौटना होगा। Donald Trump प्रशासन H-1B Visa के विस्तार पर रोक लगाने की सोच रहा है जिसकी वजह से ग्रीन कार्ड (Permanent residency) का इंतजार कर रहे लोगों को अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है। सत्ता में आने से पहले Campaigning के दौरान Donald Trump ने “Buy American, Hire American” का भरोसा दिलाया था। H-1B Visa को लेकर नया प्रस्ताव इसी वादे का नतीजा है।

H-1B Visa की वैलिडिटी 3 साल

वर्तमान कानून के मुताबिक H-1B Visa की वैलिडिटी 3 साल की होती है। इस वीजा को अगले 3 सालों के लिए बढ़ाया भी जा सकता है। इन 6 सालों के दौरान H-1B वीजा होल्डर Green Card (Permanent Residency) के लिए अप्लाई करता है तो वह तब तक अमेरिका में रह सकता है जब तक Green Card की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती है। अमेरिका के Homeland Security Department के मुताबिक लाखों Green Card applicants पेंडिंग हैं। Permanent Residency के इंतजार में पूरी दुनिया से लाखों लोग अमेरिका में कई सालों से रह रहे हैं।

पिछले 6 सालों में 2.5 लाख भारतीयों को H-1B Visa

H-1B Visa को लेकर अगर वर्तमान नियम में बदलाव होता है तो इसका सबसे ज्यादा असर Indian Professionals पर होगा। अमेरिका हर साल 85 हजार H-1B वीजा जारी करता है इनमें से आधे भारतीय होते हैं। इस हिसाब से पिछले 6 सालों में करीब 2 लाख 50 हजार भारतीय H-1B वीजा पर अमेरिका में काम कर रहे हैं। इसके अलावा हजारों,लाखों ऐसे भी हैं जो ग्रीन कार्ड के इंतजार में सालों से वहां रह कर काम कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक करीब 15 लाख भारतीय इस नियम से प्रभावित होंगे। 5 लाख प्रोफेशनल्स काम कर रहे हैं जिनके बच्चे, पत्नी और परिवार मिलाकर यह संख्या करीब 15 लाख है।

सबसे ज्यादा IT सेक्टर के Professionals

अमेरिकी सिटिजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विस (USCIS) की रिपोर्ट के मुताबिक 2007 से 2017 तक (USCIS) को 34 लाख H-1B Visa एप्लीकेशन मिलीं। इनमें भारत से 21 लाख एप्लीकेशन थीं।  इसी दौरान अमेरिका ने 26 लाख लोगों को को H-1B वीजा दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, H-1B वीजा पाने वालों में 23 लाख की उम्र 25 से 34 साल के बीच है। इनमें 20 लाख आईटी सेक्टर की नौकरियों से जुड़े हुए हैं।

H-1B Visa is not a route for immigration

अमेरिकी कानून के मुताबिक H-1B Visa के जरिए उन Skilled Professionals को हायर करना था जिसकी अमेरिका में कमी है। H-1B Visa is not a route for immigration. हालांकि धीरे-धीरे इसका इस्तेमाल US Citizenship के लिए होने लगा। लाखों भारतीय और चीनी Skilled Professionals ,H-1B वीजा के जरिए पहले Green Card holder (permanent residents) बने फिर उन्होंने अमेरिका की नागरिकता ले ली। Microsoft के CEO सत्या नडेला (Satya Nadela), Google के CEO सुंदर पिचाई (Sundar Pichai) जैसे नाम इस लिस्ट में शामिल हैं।

विदेशी प्रोफेशनल्स की मिनिमम सैलरी बढ़ाई गई

2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान American tech workers ने डोनाल्ड ट्रंप से इसकी शिकायत की थी कि अमेरिका में Skilled Professionals की कमी है इसलिए H-1B Visa के जरिए दूसरे देशों से Skilled Professionals की एंट्री हो रही है। American tech workers ने डोनाल्ड ट्रंप से कहा कि H-1B वीजा के जरिए दूसरे देशों के Professionals को हायर करने का एकमात्र मकसद है कि वे कम सैलरी में काम करने को तैयार हैं। इसी वजह से Donald Trump ने अमेरिकी कंपनियों द्वारा विदेशियों को हायर करने के लिए नियम कड़े कर दिए हैं। विदेशियों को हायर करने के लिए प्रोसेसिंग फीस बढ़ा दी गई है साथ ही मिनिमम सैलरी भी  बढ़ा दी गई है।

H-4 EAD Program वापस लेने की तैयारी

Donald Trump प्रशासन द्वारा इस तरह का यह पहला प्रस्ताव नहीं है। अमेरिकी IT industry पहले ही घोषणा कर चुकी है कि वह आने वाले वक्त में H-4 EAD (Employment Authorization Documents) Program को वापस ले सकती है। H-4 EAD (Employment Authorization Documents) Program को ओबामा प्रशासन ने शुरू किया था। इसके जरिए Spouse(पति या पत्नी) of H-1B Visa holder अमेरिका में काम कर सकते हैं।

H-1B Visa नियम में बदलाव को लेकर ये हैं परेशानियां

H-1B Visa को लेकर ट्रंप प्रशासन का यह महज प्रस्ताव है जिसे लागू करने में कई परेशानियां हैं। अगर यह प्रस्ताव मंजूर किया जाता है तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बहुत ज्यादा नुकसान होगा। अमेरिकी दिग्गज कंपनियों के प्रमुख ने ट्रंप प्रशासन को इसको लेकर आगाह भी किया है। उनका कहना है कि अगर ऐसा होता है तो Skilled Professionals अपने देश लौट जाएंगे। आने वाले वक्त वे ही लोग अपने देश में Facebook, UBER, AMAZON, Twitter जैसी कंपनियां खड़ी कर देंगे जिसका खामियाजा अमेरिका को भुगतना होगा। Chinese Economy इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

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