विशेष टिप्पणी : कश्मीर को ‘शाह’ पर छोड़ दीजिए, आप अपनी ‘शहंशाही’ संभालिए मिस्टर ट्रम्प !

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कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 23 जुलाई, 2019 (युवाPRESS)। वह पूरा जम्मू-कश्मीर, जो भारत के अधिकृत मानचित्र पर दिखाई देता है, भारत मात्र का है। वह कोई विवाद नहीं, वह कोई भूमि का टुकड़ा नहीं, वह भारत का मस्तक है और उस रक्तरंजित मस्तक पर शुद्ध कुमकुम तिलक लगाने का उत्तरदायित्व 130 करोड़ भारतीयों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व को प्रदान किया है और मोदी ने यह मिशन अपने सबसे विश्वस्त अमित शाह को सौंपा है और देश के गृह मंत्री के रूप में अमित शाह कश्मीर के लिए वह सब कर रहे हैं, जो देश के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल का सपना था, जो वे करना चाहते थे और नहीं कर सके थे।

आज पूरी विश्व बिरादरी को यह कान खोल कर सुन लेना चाहिए कि कश्मीर दुनिया के नक्शे पर सुई की नोक की तरह दिखने वाले एक छोटे-से देश के लिए कोई मुद्दा होगा, परंतु विश्व शक्ति और विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर भारत के लिए कश्मीर कोई मुद्दा ही नहीं है। कश्मीर को लेकर कोई विवाद ही नहीं है। भारत के दिल-ओ-दिमाग में यह स्पष्ट है कि पूरा कश्मीर भारत का है। ऐसे में जबकि कश्मीर कोई विवाद ही नहीं है, भला हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की क्या मति मारी गई होगी कि वे उसे हल करने के लिए किसी देश से मध्यस्थता करने को कहें ?

बात दरअसल यह है कि कंगालियत के दौर से गुज़र रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की सोमवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात हुई। इसके बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने कह दिया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने को कहा था। ट्रम्प का साहस तो देखिए, वे यहाँ तक कह गए कि वे कश्मीर पर मध्यस्थता करने को तैयार हैं। व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने कहा, ‘मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से दो हफ्ते पहले मिला था और हमने इस मुद्दे (कश्मीर मुद्दे) पर बात की थी। उन्होंने (मोदी ने) मुझसे पूछा था कि क्या आप मध्यस्थता करेंगे ? मैंने कहा, किस पर ? तो उन्होंने (मोदी ने) कहा कश्मीर पर। उन्होंने (मोदी ने) कहा कि बहुत वर्षों से ये विवाद चल रहा है। वो (पाकिस्तान) मुद्दों का हल चाहते हैं और आप भी इसका हल चाहते हैं। मैंने कहा कि मुझे इस मुद्दे में मध्यस्थता करके खुशी होगी।’

ट्रम्प के दावे की चंद मिनटों में ही खुल गई पोल

सोमवार देर रात जैसे ही डोनाल्ड ट्रम्प का कश्मीर पर बयान आया कि तुरंत ही भारत ने मुँहतोड़ जवाब दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने देर रात ट्वीट कर लिखा, ‘भारत ने कभी भी ऐसी पेशकश नहीं की। हमने अमेरिका के राष्ट्रपति की टिप्पणी देखी कि यदि भारत और पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर अनुरोध करते हैं, तो वे मध्यस्थता के लिए तैयार हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कभी भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया है। भारत अपने रुख पर अडिग है।’

ट्रम्प ने जो झूठ बोला, वह भारत ने ही नहीं पकड़ा। स्वयं अमेरिकी प्रशासन ने भी ट्रम्प के बयान से स्वयं को अलग कर लिया। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने एक वक्तव्य जारी कर कहा, ‘कश्मीर भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मसला है। अगर दोनों देश बातचीत करते हैं, तो ट्रम्प प्रशासन इसका स्वागत करता है और मदद के लिए तैयार है। हम उन प्रयासों का समर्थन करेंगे, जो दोनों देशों के बीच तनाव को कम करते हैं और बातचीत के लिए अनुकूल माहौल बनाते हैं।’ अमेरिकी प्रशासन के स्पष्टीकरण के बाद घर में ही घिर गए डोनाल्ड ट्रम्प। रिपब्लिकन सांसद ब्रैड शेरमैन ने ट्वीट किया, ‘हर कोई जो दक्षिण एशिया की विदेश नीति के बारे में कुछ भी जानता है, वह जानता है कि कश्मीर मसले में भारत निरंतर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का विरोध करता रहा है। सभी जानते हैं कि पीएम मोदी कभी ऐसी बात नहीं करेंगे। ट्रम्प का बयान ग़लत और शर्मनाक है।’ इतना ही नहीं शेरमैन ने तो एक और ट्वीट कर अमेरिका में भारत के राजदूत हर्ष श्रृंगला से माफी भी मांगी।

अमेरिकी संसद की विदेशी मामलों की समिति की अध्यक्ष एलियट एंजेल ने भी मध्यस्थता की संभावना से इनकार करते हुए ट्रम्प के बयान के बाद हर्ष श्रृंगला से बात की।

नेहरू की लगाई ‘आग’ में झुलसता रहा भारत

जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। यह भारत की सर्वोच्च सत्ता संसद में स्वयं भारत सरकार कह चुकी है। भारत के मानचित्र में भी समूचे जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा बताया जाता है, परंतु वह क्या कारण है कि आज तक अखंड जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं बन सका ? इतिहास के पन्नों को पलटने पर बार-बार आपको भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कश्मीर मोह और ग़लत कश्मीर नीतियों पर अफसोस होगा। खंड-खंड भारत को स्वतंत्र कर ब्रिटेन भागने वाले ब्रिटिशरों की काली करतूत को जब नाकाम करने का बीड़ा उठा कर सरदार पटेल देश के 562 रजवाड़ों को एकजुट करने में लगे हुए थे, तब उन रजवाड़ों में कश्मीर रियासत भी थी, परंतु नेहरू ने कश्मीर का मुद्दा पटेल को नहीं सौंपा। गृह मंत्री होने के नाते भी पटेल का यह अधिकार था कि वे कश्मीर का भारत में सम्पूर्ण विलय करवाएँ, परंतु नेहरू की ग़लत नीतियों ने कश्मीर को एक विवादास्पद क्षेत्र बना डाला। रेडियो पर दिए अपने पहले भाषण में नेहरू ने वह कह डाला, जो उन्हें नहीं कहना चाहिए था। नेहरू ने इस पहले भाषण में कहा था कि कश्मीर में आवश्यक हुआ, तो संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में जनमत संग्रह कराया जाएगा, जबकि कश्मीर किसी की बपौती नहीं था। वह तो भारत का ही था। नेहरू की लगाई मध्यस्थता की आग में भारत 72 वर्षों से झुलस रहा है।

परंतु अब ये ‘आग’ बुझेगी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में देश के कई महत्वपूर्ण मुद्दों को छुआ और उन्हें हल किया। इस दौरान उन्होंने कश्मीर घाटी को आतंकवादियों से मुक्त कराने पर भी विशेष ध्यान दिया, परंतु दूसरे कार्यकाल में उन्होंने अमित शाह को गृह मंत्री बना कर अपनी मंशा साफ कर दी कि अब कश्मीर पर भारत अपने रुख के अनुसार ही आगे बढ़ेगा। कश्मीर की ‘अच्छी तरह सफाई’ होगी। अमित शाह ने गृह मंत्रालय संभालते ही मिशन कश्मीर आरंभ भी कर दिया है। अमित शाह कश्मीर के मुद्दे को जबरन ऐतिहासिक बनाने वालों को मुँहतोड़ जवाब देने वाली आधुनिक नीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं। मोदी के नेतृत्व में शाह ने ऐसी कश्मीर नीति अपनाई है, जो उन्हें धाराओं (370, 35ए) के विकास विरोधी बंधनों से मुक्त करेगी। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि मोदी और शाह उस राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) से संबंध रखते हैं, जिसने हमेशा कश्मीर पर कड़ा रुख अपनाया है। भाजपा के पूर्ववर्ती जनसंघ और उसके जनक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस-RSS) की नीति भी कश्मीर को लेकर स्पष्ट रही है। ऐसे में कश्मीर का अगले पाँच वर्षों में जो कायाकल्प होने वाला है, उसकी भारतीय राजनीति में सक्रिय किसी भी अन्य राजनीतिक दल ने परिकल्पना भी नहीं की होगी। इतना ही नहीं, मोदी सरकार की आक्रमक कश्मीर नीति कश्मीर में मौजूद तथाकथित कश्मीरी हितैषियों को भी एक-एक कर ठिकाने लगाएगी, तो कश्मीर में बार-बार अपनी चोंच मारने वाले पाकिस्तान को यह सबक सिखा दिया जाएगा कि कश्मीर पर एक शब्द भी बोलने का उसे कोई अधिकार नहीं है।

ट्विटर पर ट्रम्प की उड़ाई जा रही खिल्ली

कश्मीर पर मध्यस्थता वाले अपने बयान के बाद डोनाल्ड ट्रम्प की सोशल मीडिया पर जम कर खिल्ली उड़ाई जा रही है। एक तरफ ट्रम्प प्रशासन और दूसरी तरफ भारत ने ट्रम्प के पीएम मोदी के हवाले से कश्मीर पर मध्यस्थता को लेकर दिए गए बयान की पोल खोल दी, तो ट्विटर पर भी हर भारतीय ट्रम्प की खिल्ली उड़ा रहा है। कोई कह रहा है, ‘मोदी ने आतंकवादियों और हाफिज़ सईद के मुद्दे पर मध्यस्थता करने के लिए कहा होगा।’ कोई कह रहा है, ‘मिस्टर डोनाल्ड ट्रम्प, आप दुनिया पर अपनी शहंशाही चलाइए, कश्मीर को शाह पर छोड़ दीजिए।’

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https://twitter.com/SrsSandeep/status/1153533088011452417?s=20
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