YUVAPRESS EXCLUSIVE : ‘कोलंबस मूल’ के INDIAN थे एल्विस प्रेस्ली, जो 42 वर्ष बाद एक INDIAN के कारण फिर चर्चा में आए

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* पिता Vernon ने प्रेस्ली के जन्म के लिए बनवाया था ‘शॉटगन हाउस’

* माता Gladys थीं ‘चेरोकी इंडियन’ Morning Dove White की वंशज

* पौत्री Riley Keough ने वर्ष 2017 में किया था रहस्योद्घाटन

आलेख : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 25 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। शीर्षक पढ़ कर आपको आश्चर्य हो रहा होगा। यह कोलंबस मूल क्या है ? वैसे, कोलंबस का नाम तो सुना ही होगा, जिसने अमेरिका की खोज की थी। यूरोप का एक समुद्री नाविक, उपनिवेशवादी, खोजी यात्री क्रिस्टोफर कोलंबस का जन्म वर्ष 1451 में 31 अक्टूबर से पहले हुआ था। उसके पिता तो जुलाहा थे, परंतु कोलंबस को आगे चल कर समुद्री यात्राओं का चस्का लगा। 20 मई, 1506 तक इस धरती पर विचरण करने वाले कोलंबस ने समुद्री यात्राओं का सिलसिला शुरू किया और 1492 में कोलंबस तीन जहाजों में 88 नाविकों के साथ भारत की खोज में चल पड़ा। समुद्र के रास्ते भारत को खोजने निकला कोलंबस जिस धरती पर पहुँचा, उसने उस जगह को भारत समझ कर उसका नाम INDIA रख दिया और वहाँ के निवासियों को INDIANS का नाम दिया, परंतु यहीं कोलंबस से चूक हुई। वास्तव में वह धरती भारत की नहीं, अपितु उत्तरी अमेरिका की धरती थी। इस तरह भारत को खोजने निकले कोलंबस ने अमेरिका की खोज कर डाली और यूरोप का उससे परिचय कराया।

आप सोच रहे होंगे कि आज जब भारत सहित पूरे विश्व में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अमेरिका के ‘किंग ऑफ रॉक एंड रोल’ एल्विस आरोन प्रेस्ली (Elvis Aaron Presley ) का इंडियन वर्ज़न बताए जाने की चर्चा है, तो हम कोलंबस पर क्यों अटके हैं ? इसका कारण यह है कि एल्विस प्रेस्ली इसी कोलंबस मूल के INDIAN थे। जी हाँ, कोलंबस ने अमेरिका के उत्तरी हिस्से को इंडिया और वहाँ बसने वाले लोगों को इंडियन्स कहा था। आज भी उत्तरी अमेरिका में आर्कटिक, उत्तर-पश्चिम-तट, कैलिफोर्निया, मकेजी, बेसिन-प्लेटो, समतल क्षेत्र, उत्तर-पश्चिम क्षेत्र, उत्तर-पूर्व वन क्षेत्र और दक्षिण पूर्व वन क्षेत्र में बसने वाली सैकड़ों जनजातियों के साथ इंडियन शब्द लगाया जाता है। इन जनजातियों के नाम के बाद इंडियन शब्द लगाने की परम्परा कोलंबस की खोज के कारण हुई, क्योंकि उन्होंने उत्तरी अमेरिका के इस क्षेत्र को इंडिया माना और यहाँ रहने वालों को इंडियन। एल्विस प्रेस्ली भी इसी कोलंबस मूल की एक इंडियन जनजाति से जुड़े हुए हैं, जो आज अपनी मौत के 42 वर्षों के बाद फिर एक बार एक INDIAN के कारण ही पुन: चर्चा में हैं।

एल्विस प्रेस्ली अमेरिका सहित पूरी दुनिया में अत्यंत लोकप्रिय थे और उन्हीं की लोकप्रियता से तुलना करते हुए डोनाल्ड ट्रम्प ने मोदी को भारत का एल्विस प्रेस्ली करार दिया। 8 जनवरी, 1935 को अमेरिका में मिसीसिपी स्थित टुपेलो में जन्मे एल्विस आरोन प्रेस्ली की धमनियों में कोलंबस द्वारा खोजे गए इंडियन्स का लहु बहता था। प्रेस्ली जब अपनी माता ग्लैडीस लव प्रेस्ली ( Gladys Love Presley) के गर्भ में थे, तब पिता वर्नन एल्विस प्रेस्ली (Vernon Elvis Presley) ने टुपेलो में एक शॉटगन हाउस बनाया था। इस तरह के शॉटगन हाउस विशेष प्रसंगों को अविस्मरणीय बनाने के लिए बनाए जाते थे। 8 जनवरी, 1935 को ग्लैडीस ने जुड़वाँ बच्चों को जन्म दिया, परंतु पहले बच्चे की मृत्यु हो गई। 35 मिनट बाद जन्मा दूसरा बच्चा यानी एल्विस प्रेस्ली।

क्या और कैसे है एल्विस प्रेस्ली का INDIA कनेक्शन ?

वास्तव में प्रेस्ली की माता ग्लैडीस की वंशावली जेविस और स्कॉटिश-आइरिश। ग्लैडीस और उनके पूरे परिवार की यह आस्था थी कि उनकी महामाता (Great-Great-Grandmother) मॉर्निंग डव व्हाइट चेरोकी इंडियन ( Cherokee Indian ) थीं। चेरोकी उत्तरी अमेरिका में दक्षिण पूर्व के वन क्षेत्र में बसने वाली एक जनजाति है, जिसे कोलंबस की खोज के बाद चेरोकी इंडियन कहा जाता है। यद्यपि प्रेस्ली की माता ग्लैडीस और उनके वंशजों (मायके वालों) की चेरोकी इंडियन होने की आस्था पर पहली बार वर्ष 2017 में प्रेस्ली की पौत्री राइली केओफ (Riley Keough) ने अधिकृत रूप से मुहर लगाई। अमेरिका उपन्यासकार, जीवन चरित्रकार, पत्रकार, अभिनेत्री और नाट्य लेखक एलेन डुंडी ( Elaine Dundy) ने भी बाद में अपनी आत्मकथा में प्रेस्ली की माता व उनके वंशजों के चेरोकी इंडियन होने की आस्था का समर्थन किया। प्रेस्ली के पिता वर्नन के वंशज जर्मन या स्कॉटिश मूल के थे।

चर्च में हुई परख और दुनिया हो गई दीवानी

एल्विस प्रेस्ली को बचपन से ही संगीत में दिलचस्पी थी, परंतु उनकी इस दिलचस्पी की परख उस समय हुई, जब प्रेस्ली अपने परिवार के साथ मिसिसिपी के एसेम्बली ऑफ गॉड चर्च में गए। इसके बाद प्रेस्ली ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और संगीत की दुनिया की सबसे बड़ी हस्ती बने। उन्हें तीन बार संगीत का सबसे बड़ा पुरस्कार ग्रैमी अवार्ड मिला । इसके साथ उन्हें ग्रैमी लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी नवाज़ा गया। एल्विस प्रेस्ली अमेरिका के मशहूर रॉकस्टार रहे हैं। सिर्फ अमेरिका में ही नहीं बल्कि अमेरिका के बाहर कई देशों में प्रेस्ली के दिवाने रहे हैं। प्रेस्ली पॉप सिंगिंग के बादशाहों में से एक रहे हैं, जिन्हें देखने के लिए भारी भीड़ जुट जाती थी। उनके कई प्रसिद्ध गाने हैं, जिसमें से एक गाना हू मेक्स माए हार्टबीट लाइक थंडर की धुन पर मोहम्मद रफी ने भी गाना गाया है। यह राजेंद्र कुमार की फिल्म झुक गया आसमान का गाना कौन है जो सपनों में आया है। ह 20वीं शताब्दी के सबसे महत्वपूर्ण और यादगार स्टार में से एक माने जाते हैं और उन्हें ‘किंग ऑफ रॉक एंड रोल’ या ‘द किंग’ के तौर पर भी जाना जाता है। एल्विस लोगों के बीच बेहद मशहूर और लोकप्रिय थे। उन्होंने 11 साल की उम्र में गिटार बजाना शुरु किया और धीरे धीरे वह रॉक एंड रोल की दीवानगी में रम गए। 1956 में उनका गाना हार्टब्रेक होटल बेहद लोकप्रिय हुआ और लोग उनके दीवाने हो गए। उन्होंने अपने करियर में सफलता और लोकप्रियता के बड़े बड़े मुकाम छुए। एल्विस प्रेस्ली की मौत 16 अगस्त 1977 को हो गई थी।

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