तोता किसी का नहीं होता : चिदंबरम के ‘नाटक’ ने कितनों की नाक कटवाई ?

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 22 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। बड़ी-बड़ी डिग्रियाँ, देश के सबसे बड़े सुप्रीम कोर्ट में वक़ालत, देश की संसद में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य, देश के वित्त मंत्री और गृह मंत्री जैसे उच्च एवं प्रतिष्ठित पदों पर तथाकथित सेवा दे चुके पी. चिदंबरम जैसे व्यक्ति को जब केन्द्रीय जाँच ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED), पुलिस, कोर्ट, जेल आदि से डर लगता है, तो आम आदमी बेचारा क्यों न डरे ? क्या देश के एक दिग्गज अर्थशास्त्री और केन्द्र सरकारों में महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल चुके चिदंबरम को यह शोभा देता है कि वे एक अदालत से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने और ऊपरी अदालत से स्थगनादेश न मिलने के बीच की अवधि में ‘फरार’ रहें ?

पी. चिदंबरम दक्षिण भारत के नेता हैं और उन्होंने वही किया, जो आम तौर पर दक्षिण भारत की राजनीति में होता आया है। दक्षिण भारत में विशेषकर तमिलनाडु में करुणानिधि, जयललिता, एनटीआर जैसे नेताओं पर कार्रवाई के दौरान ऐसी ही राजनीतिक नाटक होते थे और तमिलनाडु से सम्बद्ध चिदंबरम ने भी कुछ ऐसा ही करने की कोशिश की, जैसे मोदी सरकार और जाँच एजेंसियाँ उन पर अत्याचार कर रही हैं, जबकि सब कुछ दिल्ली हाई कोर्ट के फ़ैसले के मुताबिक हो रहा था।

चिदंबरम स्वयं एक दिग्गज वकील हैं और दूसरी तरफ उन्हें जेल जाने से बचाने के लिए कांग्रेस में नेतागिरी करने वाले दिग्गज वकील कपिल सिब्बल से लेकर अभिषेक मनु सिंघवी तक ने 31 घण्टों तक सरपट दौड़ लगाई। ये लोग सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या केस की चल रही सुनवाई के बीच दखल देने तक का साहस करने से नहीं कतराए, परंतु मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई ने चिदंबरम के वकीलों की फौज की एक न सुनी।

सोशल मीडिया पर चिदंबरम की जितनी किरकिरी हुई, उतनी ही कांग्रेस पार्टी, उसके शीर्ष नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर भी लोग जम कर बरसे, जो चिदंबरम के साथ खड़े होने का राग आलाप रहे थे। लोग सवाल उठा रहे थे कि आखिर चिदंबरम बेकसूर हैं, तो उन्हें जाँच एजेंसियों के सामने आने में क्या दिक्कत थी ? अपने बेबाक अंदाज़ के लिए विख्यात कवि कुमार विश्वास ने भी चिदंबरम पर जोरदार कटाक्ष कसा। कुमार विश्वास ने अपने ट्वीट से उस दौर की याद दिलाई, जब सीबीआई को सरकारी पिंजरे में कैद तोता कहा गया था। कुमार विश्वास ने ट्वीट कर कहा, ‘तोता किसी का नहीं होता। मौका मिलते ही उड़ जाता है।’

वास्तव में चिदंबरम का अर्थ होता है उदार व्यक्ति, परंतु उन्होंने अपने आचरण से न केवल अनुदारता का परिचय दिया, अपितु बेल की उधारी के लिए गिड़गिड़ाते नज़र आए। जो दिल्ली हाई कोर्ट उन्हें आईएनएक्स मीडिया घोटाले और भ्रष्टाचार के दो मामलों में 20 से अधिक बार अग्रिम जमानत दे चुका था, उसने अंतत: उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज की, तो उसके पीछे अवश्य ही ठोस कारण थे, क्योंकि चिदंबरम का रवैया इस पूरे मामले में केस को टालने, गिरफ्तारी से बचने का रहा है। हाई कोर्ट को जब चिदंबरम की नीयत का अंदाज़ा हो गया तो उसने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। एक अच्छे नेता से जनता यही अपेक्षा करती है कि वह भारतीय संविधान और कानून पर विश्वास जताते हुए कानून के मुताबिक दिए गए अदालती फ़ैसले का सम्मान करे, परंतु चिदंबरम तो चिदंबरन बन गए और 31 घण्टे तक लापता रहे। ऐसा करके उन्होंने सबसे पहले तो देश की नाक कटवाई, जिसके वे गृह मंत्री और वित्त मंत्री रह चुके हैं। चिदंबरम ने कांग्रेस, सोनिया-राहुल-प्रियंका की भी फज़ीहत करवाई, जो उनके साथ खड़े थे।

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