भूकंप से हिला उत्तर भारत : जानिये आप कितने सुरक्षित हैं ?

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 20 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। राजधानी दिल्ली इन दिनों एक के बाद एक झटके झेल रही है। पहले हवा के प्रदूषण ने सांस लेना मुश्किल कर दिया, फिर शीतलहर ने ठिठुरने को मजबूर किया। पुलिस और वकीलों का घर्षण देखा और अब नागरिकता कानून के विरोध की आँच झुलसा रही है। इसी बीच शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत की ज़मीन हिल गई। शाम को लगभग 5.12 बजे 6.3 की तीव्रता वाले भूकंप ने दिल्ली में दहशत पैदा कर दी। इस भूकंप का केन्द्र अफग़ानिस्तान में हिंदूकुश था। इस भूकंप से अफग़ानिस्तान के कुछ इलाकों के साथ-साथ पाकिस्तान और भारत में उत्तर भारत के कश्मीर से लेकर चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर तक तेज झटके महसूस किये गये। पूरे 10 सेकण्ड तक धरती हिलती रही। भूकंप की ज़द में अफग़ानिस्तान के साथ-साथ पाकिस्तान भी आया। हालाँकि इस भूकंप से नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है। अमृतसर, फरीदाबाद और गुरुग्राम में भी झटके महसूस होने पर लोग घरों से बाहर निकल आये थे। विशेष कर ऊँची इमारतों में रहने वाले लोग भयभीत हो गये थे। हिमाचल प्रदेश के चंबा और डलहौजी में भी भूकंप से धरती हिली, जबकि उत्तर प्रदेश के नोएडा, गाज़ियाबाद, मथुरा और मेरठ में धरती भूकंप के झटकों से काँप गई थी।

भूकंप के झटके 2020 में बड़ी अनहोनी के संकेत तो नहीं ?

उत्तर भारत में भूकंप ने जिस तरह से लोगों को हिला दिया है, उससे सवाल उठने लगे हैं कि कहीं ये भूकंप 2020 में किसी बड़ी अनहोनी का संकेत तो नहीं। ऐसे में यह जान लेना भी आवश्यक है कि देश का कौन-सा हिस्सा भूकंप के लिहाज से कितना संवेदनशील है और आपको भूकंप के दौरान क्या करना चाहिये और क्या नहीं करना चाहिये ?

जानकारों की मानें तो शुक्रवार शाम को आया भूकंप मध्यम तीव्रता का था। इससे किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ और धरती के अंदर ऐसी हलचल होती रहती है। पिछले कुछ महीनों में देश के कई हिस्सों में भूकंप के हल्के और मध्यम तीव्रता वाले झटके महसूस किये गये हैं। इस तरह बार-बार आने वाले भूकंप को ‘अर्थक्वैक स्वर्म’ कहा जाता है। जानकारों के अनुसार यह एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें लंबे समय तक रह – रह कर भूकंप के हल्के झटके आते रहते हैं। इन झटकों से टेक्टोनिक प्लेटों के घर्षण से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा ज़मीन से बाहर निकलती है। यह स्थिति पिछले कुछ समय में भारत के साथ-साथ तज़ाक़िस्तान, आयरलैंड और अमेरिका के कई हिस्सों में भी पाई गई है। हालाँकि भूकंप के इन झटकों से किसी प्रकार के नुकसान की कोई बात सामने नहीं आई। इससे पहले महाराष्ट्र के पालघर क्षेत्र में एक महीने के भीतर 6 बार भूकंप के झटके अनुभव किये गये थे। यह भूकंपन भी ‘अर्थक्वैक स्वर्म’ का ही हिस्सा था।

देश के ये शहर हैं हाई रिस्क सिस्मिक ज़ोन में !

एक रिपोर्ट के अनुसार भूकंप के लिहाज से देश के 38 शहर हाई रिस्क सिस्मिक ज़ोन में आते हैं, जबकि 60 प्रतिशत भूभाग भूकंप से असुरक्षित है। रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली, पटना, श्रीनगर, कोहिमा, पुड्डुचेरी, गुवाहाटी, गंगटोक, शिमला, देहरादून, इंफाल, चंडीगढ़, अंबाला, अमृतसर, लुधियाना, रुड़की आदि शहर सिस्मिक ज़ोन 4 और 5 में आते हैं। इसी प्रकार जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, उत्तरी बिहार और अंडमान-निकोबार के कुछ क्षेत्र ज़ोन 5 में रखे गये हैं। ज़ोन 5 को भूकंप के हिसाब से सबसे अधिक खतरनाक माना जाता है। 2001 में गुजरात के भुज में आये भूकंप में 20 हजार से अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी।

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के अनुसार देश में अधिकांश निर्माण भूकंप को ध्यान में रख कर नहीं किया जाता है, जो ज्यादा घातक है। हालाँकि कुछ अपवाद भी हैं, जैसे कि दिल्ली मेट्रो। दिल्ली मेट्रो का निर्माण भूकंप रोधी है और यह भूकंप के झटके सहन कर सकता है।

भूकंप के दौरान बचने के लिये करें ये उपाय ?

भूकंप के दौरान बचने के लिये क्या उपाय कर सकते हैं और घबराहट में क्या नहीं करना चाहिये, यह जानना बहुत जरूरी होता है। इन उपायों से आप अपनी और अपने परिवार के साथ-साथ दूसरों की भी जान बचा सकते हैं। भूकंप आने पर तुरंत अपने घर-दफ्तर, स्कूल या जिस बिल्डिंग में भी हों, उससे बाहर निकल कर खुली और सुरक्षित जगह पर पहुँच जाना चाहिये। ऐसे में किसी बिल्डिंग, पेड़ या बिजली के खंभे आदि के पास बिल्कुल भी खड़े न रहें। कई मंजिला ऊँची बिल्डिंग में हों तब भूकंप आने पर लिफ्ट का उपयोग नहीं करना चाहिये और सीढ़ियों से ही नीचे उतरना चाहिये।

भूकंप आने पर यदि कहीं फँस जाते हैं तो दौड़ना नहीं चाहिये। बल्कि किसी मजबूत दरवाजा, टेबल या दीवार के कोनों में खड़े हो जाना चाहिये। ध्यान रखें कि ऐसा करते समय खिड़की, अलमारी, पंखा या अन्य भारी सामान से दूर रहना चाहिये, ताकि इनके नीचे गिरने या शीशा आदि टूटने पर आपको चोट न लगे। अपने नाजुक हिस्सों जैसे कि सिर, हाथ-पाँव आदि को सुरक्षित और मजबूत वस्तु से ढँक लेना चाहिये और घुटनों के बल बैठ जाना चाहिये। खुलते और बंद होते दरवाजे के पास खड़े न हों, इससे चोट लगने का खतरा रहता है। गाड़ी में हों तो सड़क के किनारे या खुले मैदान में गाड़ी रोक दें और भूकंप रुकने का इंतजार करना चाहिये।

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