भारत में स्टार्टअप्स कर रहे हैं रोजगार क्रांति : 2025 तक 11 लाख युवाओं को मिलेंगे जॉब्स

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 7 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत में इंटरनेट (INTERNET IN INDIA) आधारित ऑनलाइन बिज़नेस (ONLINE BUSINESS) हर साल लगभग 30 प्रतिशत ग्रोथ के साथ विकास कर रहा है। स्टार्टअप कंपनियों (STARTUP COMPANIES) से देश के युवाओं को रोजगार (JOBS) भी मिल रहा है। शिक्षित और प्रशिक्षित दोनों ही प्रकार के युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है और देश की बेरोजगारी का औसत भी अंशतः ही सही, परंतु कम हो रहा है, जिससे सरकार पर भी रोजगार का दबाव कुछ कम हो रहा है और उसे राहत की सांस लेने का अवसर मिल रहा है। दूसरे शब्दों में कहें तो स्टार्टअप कंपनियाँ देश के युवाओं को आर्थिक मजबूती देने में मदद कर रही हैं। एक अनुमान के मुताबिक अभी देश में 100 करोड़ यानी एक अरब डॉलर से अधिक वैल्यूएशन वाली यूनिकॉर्न (UNICORN) टॉप स्टार्टअप कंपनियों की संख्या लगभग 24 है। इनमें स्नैपडील, पेटीएम, शॉपक्लूज़ और फ्लिपकार्ट आदि शामिल हैं। देश की 7 कंपनियों ने वैश्विक स्तर के यूनिकॉर्न की लिस्ट में जगह बनाई हुई है। 2025 तक यूनिकॉर्न की संख्या बढ़ कर 100 के पार हो जाने की उम्मीद है। इसी के साथ नई यूनिकॉर्न कंपनियाँ देश के फ्रेश ग्रेज्युएट युवाओं को रोजगार के नये अवसर भी उपलब्ध करवाएँगी। इससे अनुमान के मुताबिक अगले 6 साल में कम से कम 11 लाख नये युवाओं को रोजगार प्राप्त होगा, यानी हर साल लगभग 2 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। जबकि परोक्ष रूप से स्टार्टअप की मदद से रोजगार पाने वालों की संख्या 40 लाख तक पहुँचने की उम्मीद है।

यूनिकॉर्न कंपनियों की स्थिति

ऐसी टॉप स्टार्टअप कंपनियाँ जिनकी मार्केट वैल्यू 100 करोड़ यानी एक अरब डॉलर से अधिक है, उन्हें यूनिकॉर्न कहते हैं। पूरे विश्व में ऐसी कंपनियों की संख्या लगभग 494 है। इनमें से सबसे अधिक 206 पड़ोसी देश चीन में हैं। इसके बाद दूसरे क्रम पर अमेरिका है, जहाँ इनकी संख्या लगभग 203 है। इसके बाद तीसरे नंबर पर भारत है, जहाँ 24 यूनिकॉर्न कंपनियाँ हैं। तत्पश्चात ब्रिटेन में 13 यूनिकॉर्न हैं और वह इस लिस्ट में चौथे स्थान पर है। सबसे अधिक यूनिकॉर्न फिनटेक सेक्टर यानी फाइनांसियल टेक्नोलॉजी (FINANCIAL TECHNOLOGY) में हैं। इस सेक्टर में यूनिकॉर्न का बिज़नेस 376 अरब डॉलर है। इस सेक्टर में लगभग 31 प्रतिशत यूनिकॉर्न काम कर रहे हैं। ये सभी यूनिकॉर्न 25 इंडस्ट्री में काम करते हैं और 50 प्रतिशत यूनिकॉर्न टॉप 5 इंडस्ट्री में ही काम करते हैं। इस सेक्टर में आंट फाइनांसियल का वैल्यूएशन 15,000 करोड़ डॉलर, ऑनलाइन वेल्थ मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म लूफाक्स का वैल्यूएशन 3,800 करोड़ डॉलर और स्ट्राइप का 2,300 करोड़ डॉलर है।

इसके बाद ई-कॉमर्स सेक्टर है, जिसका कुल वैल्यूएशन लगभग 147 अरब डॉलर है। इस सेक्टर में अमेजॉन सबसे बड़ी कंपनी है। हालाँकि इस सेक्टर में और भी कई टॉप के स्टार्टअप हैं, जो कड़ी प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। जैसे कि दक्षिण कोरिया के कूपांग, अमेरिका के विश और चीन के कार्स का वैल्यूएशन 900 करोड़ डॉलर है। चीन के मेसई और इंडोनेशिया के टोकोपीडिया का वैल्यूएशन 700 करोड़ डॉलर है।

यदि किसी एक शहर की बात की जाए तो इसमें भी चीन ही प्रथम है, जिसकी राजधानी बीजिंग में सर्वाधिक 82, अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में 55 यूनिकॉर्न हैं। इनके बाद चीन के शंघाई और अमेरिका के न्यूयॉर्क का नंबर आता है, लेकिन यदि एक क्षेत्र की बात की जाए तो अमेरिका का सिलिकोन वैली सबसे आगे है, जहाँ दुनिया के 21 प्रतिशत यानी 102 यूनिकॉर्न काम करते हैं। भारत की बात की जाए तो सबसे अधिक यूनिकॉर्न टेकसिटी बेंगलुरु में हैं।

भारत में स्टार्टअप कंपनियाँ

विदेशी संस्था KPMG की इसी साल की शुरुआत में आई एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2018 तक स्टार्ट अप की संख्या 50,000 हो चुकी है। इस रिपोर्ट के अनुसार देश में स्टार्टअप की शुरुआत वर्ष 2000 से हुई और वर्ष 2007 में 7,000 स्टार्टअप थे, जो 2018 में 50,000 हो जाने का अर्थ है कि देश में 7 गुना से भी अधिक का उछाल आया है।

नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज़ (NASSCOM) की रिपोर्ट के अनुसार इस साल इनमें 1300 नई स्टार्टअप कंपनियाँ जुड़ी हैं। इन कंपनियों से देश के राजस्व और उद्यम क्षेत्र को भी खूब लाभ हो रहा है। पीएम नरेन्द्र मोदी ने 2015 में स्वतंत्रता दिवस के भाषण में स्टार्टअप इंडिया का नारा दिया था, जिसके बाद भारत सरकार ने स्टार्टअप इंडिया को बढ़ावा देने के लिये नीतियाँ भी बनाई हैं और पर्याप्त सरकारी मदद भी दी जा रही है। अब भारत नई नीति पर काम कर रहा है और विदेशी स्टार्टअप कंपनियों को भारत के बाजार में आने के द्वार खोल रहा है, जिनके आने से भारतीय युवाओं के लिये रोजगार के विकल्प बढ़ेंगे। नासकोम के ही मुताबिक इन स्टार्टअप की मदद से लाखों की संख्या में लोगों को रोजगार मिल रहा है। 2025 तक और लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा, जबकि परोक्ष रूप से स्टार्टअप की मदद से रोजगार पाने वालों की संख्या 40 लाख तक पहुँचने की उम्मीद है।

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