जानिए क्या था इथोपिया-इरिट्रिया का खूनी संघर्ष, जिसे रोकने वाले ‘शांतिदूत’ अबी को मिला नोबेल शांति पुरस्कार ?

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 11 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। 2019 का नोबेल शांति पुरस्कार इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली (ABIY AHMAD ALI) को देने की घोषणा की गई है। अबी को यह पुरस्कार अपने चिर शत्रु इरिट्रिया के साथ 22 वर्ष पुराने खूनी संघर्ष को रोकने और सीमा विवाद सुलझा कर दोनों देशों के बीच मैत्री सम्बंध विकसित करने की उपलब्धि हासिल करने के लिये दिया गया है। अबी अहमद को इथियोपिया का ‘गांधी’ और ‘नेल्सन मंडेला’ भी कहा जाता है। स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में नोबेल फाउण्डेशन (NOBEL FOUNDATION) ने 2019 के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा करते हुए यह बात कही। नोबेल पुरस्कार जूरी ने कहा कि अबी को शांति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करने के प्रयास करने के लिये तथा अपने देश के हित के लिये उदारवादी नीतियाँ लागू करने के लिये भी इस पुरस्कार से सम्मानित करने का निर्णय किया गया है।

क्या था इथियोपिया-इरिट्रिया विवाद ?

इथियोपिया एक अफ्रीकी देश है, जो सरकारी तौर पर इथियोपिया संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य (FEDERAL DEMOCRATIC REPUBLIC) के रूप में पहचाना जाता है। इस देश की जनसंख्या लगभग 85.2 लाख से अधिक है। जनसंख्या के हिसाब से दुनिया में 15वें और क्षेत्रफल के हिसाब से दुनिया का 27वाँ सबसे बड़ा देश है। जबकि क्षेत्रफल के हिसाब से अफ्रीका का दसवाँ सबसे बड़ा देश है। इसकी राजधानी अदीस अबाबा है। इथियोपिया सूडान से दक्षिण-पूर्व में, इरिट्रिया से दक्षिण में, जिबूती और सोमालिया से पश्चिम में, केन्या से उत्तर में और दक्षिण सूडान से पूर्व में स्थित है।

इथियोपिया का हिस्सा था इरिट्रिया, 1993 में हुआ था स्वतंत्र

इरिट्रिया भी एक समय में इथियोपिया का ही हिस्सा हुआ करता था, परंतु यह लंबे संघर्ष के बाद 1993 में स्वतंत्र हुआ था। इरिट्रिया में एक शानदार बंदरगाह है, जिसका नाम है असब। इस बंदरगाह को लेकर ही इथियोपिया और इरिट्रिया के बीच सीमा विवाद शुरू हुआ और 1998 में दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू हो गया। यह युद्ध ई. स. 2000 तक चला, जिसमें दोनों देशों के लगभग 80,000 लोगों की मृत्यु हुई। सीमा विवाद के चलते दोनों देशों ने अपने-अपने देश से प्रतिद्वंद्वी देश के राजदूतों को निकाल दिया था। अबी अहमद भी उन हजारों इथियोपियाई सैनिकों में से ही एक थे, जिन्होंने इरिट्रिया के साथ युद्ध लड़ा था। 1998 से लेकर 2018 तक लगभग दो दशक तक दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर तनाव और संघर्ष की स्थिति रही। इसी बीच 2 अप्रैल 2018 को 42 वर्ष के अबी अहमद अली को इथियोपिया का प्रधानमंत्री चुना गया।

इथियोपिया के PM बने अबी अहमद ने उठाए क्रांतिकारी कदम

अबी के नाम का हिंदी में शब्दार्थ होता है ‘क्रांति।’ पीएम बनने के साथ ही अबी अहमद ने क्रांतिकारी कदम उठाने शुरू कर दिये थे। उन्होंने अपने 20 सदस्यीय मंत्रिमंडल में आधे पदों पर अर्थात् 10 महिलाओं को मंत्री बनाया। पहली बार इथियोपिया में रक्षा मंत्री एक महिला बनी हैं। महिलाओं के लिये ही नहीं, उन्होंने कई अन्य भी उदारवादी कदम उठाये और सत्ता में आने के 100 दिन के भीतर ही उन्होंने देश से आपातकाल को हटा दिया। मीडिया पर लगा सेंसरशिप हटाया। उन्होंने हजारों विपक्षी और असंतुष्ट नेताओं व कार्यकर्ताओं को जेलों से रिहा किया तथा जिन असंतुष्ट नेता-कार्यकर्ताओं को देश से निष्कासित किया गया था, उन्हें स्वदेश लौटने की अनुमति दी। सबसे बड़ी उपलब्धि तो यह हासिल की कि उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के साथ ही स्पष्ट कर दिया था कि वे इरिट्रिया के साथ शांति बहाल करने के लिये प्रयास करेंगे, जो वादा उन्होंने निभाया भी। उन्होंने इरिट्रिया के राष्ट्रपति इसैयस अफवर्की के साथ मिल कर दोनों देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने की पहल की, जिसके कारण दोनों देशों के बीच दो दशक से भी अधिक समय से तनाव और संघर्ष चल रहा था। वे जुलाई-2018 में इरिट्रिया की राजधानी अस्मारा पहुँचे, जहाँ इरिट्रिया के राष्ट्रपति ने विमान से उतरते ही उन्हें गले लगाया और उनका हार्दिक स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेताओं ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये।

मैत्री और प्रेम का पुल बाँध कर सुलझाया सीमा विवाद

जब इरिट्रिया इथियोपिया से स्वतंत्र हुआ था तो संयुक्त राष्ट्र संघ ने दोनों देशों की सीमा निर्धारित की थी, परंतु असब बंदरगाह दुनिया के साथ व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण होने के कारण इथियोपिया के शासकों ने उस पर अपना कब्जा नहीं छोड़ा था और संयुक्त राष्ट्र द्वारा खींची गई सीमा रेखा को भी मानने से इनकार कर दिया था। अबी अहमद ने इस सीमा रेखा को स्वीकार कर लिया और कब्जा की हुई ज़मीन इरिट्रिया को सौंपने की घोषणा करके दोनों देशों के बीच शांति और मैत्री सम्बंधों की शुरुआत की। दोनों देशों ने एक-दूसरे के युद्ध कैदियों को रिहा करने का निर्णय किया। दोनों देशों ने एक-दूसरे के यहाँ बंद पड़े दूतावासों को फिर से खोलने का भी निर्णय किया। इसके अलावा दोनों देश अन्य पड़ोसी देशों के साथ सामंजस्य बनाने के लिये संयुक्त प्रयास करने पर सहमत हुए हैं। दोनों देशों के बीच एयरलाइंस की उड़ानें फिर से शुरू होंगी। बंदरगाहों का साझा उपयोग करने पर सहमति हुई है। दोनों देशों के बीच खुले व्यापार पर सहमति बनी है। दोनों देशों के राजनीतिक कैदियों को रिहा करने के साथ-साथ सीधी टेलीफोन लाइनों को पुनः स्थापित करने की भी सहमति बनी है। दोनों देशों ने कहा कि अब दोनों देशों के बीच कोई सीमा नहीं रह गई है, क्योंकि प्रेम और मैत्री का पुल बन जाने से सीमा विवाद खत्म हो गया है।

1901 में शुरू हुए हैं नोबेल पुरस्कार

29 जून 1900 को स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की याद में नोबेल फाउण्डेशन की स्थापना हुई और 1901 में प्रथम नोबेल पुरस्कार दिया गया था, जो रेडक्रॉस के संस्थापक ज्यां हैरी दुनांत और फ्रेंच पीस सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष फ्रेडरिक पैसी को संयुक्त रूप से दिया गया था। यह शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में विश्व का सर्वोच्च सम्मान है। इस पुरस्कार के रूप में प्रशस्ति पत्र के साथ 14 लाख डॉलर की राशि प्रदान की जाती है।

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