तनिक सोचिए ! इतने सारे दिग्गज नेता केवल 1 मोदी को हराना चाहते हैं, परंतु चुनाव 1 भी नहीं लड़ रहा !!! मोदी का दावा, ‘मेरे सामने कोई नहीं, 300+ सीटें मिलेंगी’

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23 मई, 2019 को यह सुनिश्चित हो जाएगा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रहेंगे या नहीं, परंतु आश्चर्य में डालने वाली बात यह है कि यदि मोदी प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे, तो उनका स्थान लेगा कौन ? क्योंकि एक तरफ तो मोदी के रूप में चेहरा है, परंतु दूसरी तरफ चेहरों की भरमार है। इससे भी बड़ा आश्चर्य यह है कि सबके सब मिल कर मोदी को हराना तो चाहते हैं, लेकिन चुनाव लड़ने का किसी में साहस नहीं है। कदाचित इसीलिए मोदी ने यह दावा भी कर दिया, ‘इस बार मेरे सामने कोई नहीं, 2024 में देखा जाएगा। एनडीए को 300+ सीटें मिलेंगी।’

Two Wheeler Scheme

लोकसभा चुनाव 2014 में मोदी की आंधी ने सभी राजनीतिक दलों को धूल चटा दी थी और भारत की सबसे पुरानी और सबसे लम्बे काल तक देश पर शासन करने वाली कांग्रेस पार्टी ऐतिहासिक गिरावट के साथ 44 सीटों पर सिमट गई थी। नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने। कुछ महीनों तक तो कांग्रेस सहित सभी मोदी विरोधी दलों को कुछ सूझ ही नहीं रहा था कि मोदी की काट के रूप में क्या करें ?

मोदी के प्रधानमंत्री और अमित शाह के भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद तो राज्यों में भी विरोधियों का सफाया होता चला गया और एक के बाद एक राज्य में भाजपा की सरकारें बनती गईं। भाजपा की इस सफलता से विपक्ष पूरी तरह असमंजस में था। कांग्रेस का अध्यक्ष पद संभाल रहीं सोनिया गांधी को भी कुछ सूझ नहीं रहा था, तो उपाध्यक्ष के रूप में विफलताओं की लंबी श्रृंखला के धनी राहुल गांधी अपनी राजनीतिक अपरिपक्वता से नई-नई विफलताओं को अपने राजनीतिक कैरियर में जोड़ते जा रहे थे।

मोदी सरकार के शासन के कुछ महीने बीतने के बाद कांग्रेस को कुछ सूझा और उसने भूमि अधिग्रहण बिल के विरोध के साथ मोदी के खिलाफ पहला मोर्चा खोला। इसके साथ ही सोनिया ने मोदी विरोधी राजनीतिक दलों की लामबंदी शुरू की। इसी बीच कांग्रेस ने मोदी के अच्छे कार्यों की सरेआम अवहेलना करते हुए कमियों को खंगालना शुरू किया और किसानों, बेरोजगारी, नोटबंदी, जीएसटी और अंत में राफेल डील में कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर मोदी सरकार की घेराबंदी शुरू की। गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 से ऐन पहले राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया। अध्यक्ष के रूप में राहुल को यद्यपि पहले ही चुनाव में गुजरात में कांग्रेस की हार के रूप में भेंट मिली, लेकिन राहुल ने गुजरात में कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार और उसके बाद कर्नाटक में हार के बावजूद भाजपा को सत्ता से दूर रखने में मिली सफलता से उत्साहित होकर सोनिया की तर्ज पर ही मोदी विरोधी राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को साधना शुरू किया। राहुल को हालाँकि किसान और बेरोजगारी के मुद्दे पर सफलता भी मिली और राजस्थान, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ में भाजपा को सत्ताच्युत कर कांग्रेस की सरकार बनवाई।

तीन राज्यों में मिली सफलता से उत्साहित राहुल ने अब मोदी विरोधियों की एकजुटता के अभियान को और तेज कर दिया, परंतु जब मैदान में उतर कर लड़ने की बारी आई, तो 1 मोदी के विरुद्ध एकजुट हुए अनेक मोदी विरोधी नेताओं में से 1 ने भी चुनाव मैदान में उतर कर मोदी का सामना करने का साहस नहीं दिखाया।

आइए अब आपको बताते हैं मोदी के विरुद्ध, उन्हें सत्ता से हटाने के लिए मोर्चा खोलने वाले दिग्गज नेताओं के नाम। इनमें सबसे ऊपर है पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अध्यक्ष ममता बैनर्जी। बैनर्जी ने सौगंध खाई है कि वे दिल्ली की गद्दी से मोदी को हटा कर ही दम लेंगी, लेकिन लोकसभा चुनाव नहीं लड़ रहीं। अब नाम आता है बहुजन समाज पार्टी (BSP) की नेता मायावती और समाजवादी पार्टी (SP) के नेता अखिलेश यादव का। इन दोनों ने भी उत्तर प्रदेश में भाजपा और मोदी को हराने के लिए 25 साल पुरानी दुश्मनी भुला कर गठबंधन कर लिया, परंतु एक तरफ प्रधानमंत्री पद की दावेदार मायावती घोषणा कर चुकी हैं कि वे लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी, तो दूसरी तरफ एक छोटी-सी विधानसभा सीट जीतने वाले अखिलेश के पास 7-7 विधानसभा सीटों वाली किसी लोकसभा सीट को जीतने का विश्वास ही नहीं है। वे भी चुनाव नहीं लड़ रहे।

मोदी विरोधी टोली में सबसे बड़ा नाम है प्रियंका गांधी वाड्रा का। कांग्रेस और राहुल गांधी ने चुनाव से ठीक पहले प्रियंका की राजनीति में एंट्री कराई और उत्तर प्रदेश में भाजपा व मोदी के बढ़ते कदमों को रोकने की दिशा में मास्टरस्ट्रोक चला। पहले तो यह कयास लगाए गए कि प्रियंका आई हैं, तो चुनाव भी लड़ेंगी। अरे कुछ लोगों ने यहाँ तक कह डाला कि प्रियंका वाराणसी में सीधे मोदी से टक्कर लेंगी, परंतु बाद में हवा निकल गई कांग्रेस की। प्रियंका राजनीति में तो आ गईं, लेकिन चुनाव नहीं लड़ रहीं।

मोदी विरोधियों की टोली में महाराष्ट्र तक सीमित राजनीति के दिग्गज नेता महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मुखिया शरद पवार का नाम भी है, परंतु न राज ठाकरे चुनाव लड़ रहे हैं और न ही पवार। पवार वही नेता हैं, जिन्होंने सोनिया के विदेशी मूल को मुद्दा बना कर एनसीपी बनाई थी, लेकिन महाराष्ट्र में वे उसी कांग्रेस के साथ वर्षों से चुनावी गठबंधन करके भाजपा-शिवसेना को चुनौती दे रहे हैं, परंतु सफलता आज तक नहीं मिल पाई।

AAP MLA disqualification

मोदी विरोधी टोली में एक और महत्वपूर्ण नाम है अरविंद केजरीवाल का। आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल मोदी को हर छोटी-बड़ी बात पर गाली देने बाज़ नहीं आते। मोदी को सत्ता से हटाने के लिए कांग्रेस के खिलाफ चुनाव जीतने के बावजूद दिल्ली और हरियाणा में कांग्रेस से गठबंधन की सरेआम भीख मांग रहे हैं, लेकिन कांग्रेस उन्हें भाव ही नहीं दे रही। अब शायद आपको यह जान कर आश्चर्य नहीं होगा कि केजरीवाल भी चुनाव नहीं लड़ रहे, क्योंकि जब प्रियंका से लेकर अखिलेश तक सारे पानी में बैठे हुए हैं, तो केजरीवाल भला क्या हिम्मत जुटा पाते।

इन सभी मोदी विरोधी नेताओं के चुनाव नहीं लड़ने के साथ एक कहावत बहुत सटीक बैठती है, ‘स्वर्ग तो सब बनाना चाहते हैं, परंतु मरना कोई नहीं चाहता।’ विरोधियों के इस खोखलेपन को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अच्छी तरह समझते हैं और इसीलिए वे दावा भी कर सकते हैं कि 2019 में उनके सामने कोई नहीं है, 2024 में देखा जाएगा। एक टीवी चैनल से बातचीत करते हुए मोदी ने यह भी दावा किया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को 300 से अधिक सीटें मिलेंगी। महागठबंधन का गणित नहीं चलेगा। नामांकन प्रक्रिया के बाद विपक्ष और बिखरेगा।

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