मतदान करने से पहले अवश्य पढ़ें यह चौंकाने वाला खुलासा, जो आपको अच्छी तरह समझा देगा कि देश किसके हाथों में सुरक्षित है ?

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देश में लोकसभा चुनाव 2019 की घोषणा हो चुकी है। अगले महीने से विभिन्न चरणों में मतदान शुरू हो जाएगा। देश की जनता नई सरकार का निर्धारण अपने सशक्त मतदान के जरिए करेगी। देश के वर्तमान राजकीय पटल पर देश के नायक के तौर पर भले ही नरेन्द्र मोदी और राहुल गांधी के रूप में दो नाम दिखाई दे रहे हों, लेकिन तकनीकी दृष्टि से देखा जाए, तो नरेन्द्र मोदी के अतिरिक्त दूसरे नामों में अकेले राहुल गांधी नहीं हैं या यूँ कहें कि एक तरफ एक चेहरा है, तो दूसरी तरफ चेहरों की भरमार है। अब देश की जनता को यह तय करना है कि वह एक चेहरे पर मुहर लगाए या चेहरों की भरमार पर ?

खैर, यह सोचने का अधिकार केवल और केवल मतदाता को है। वह अपनी स्वतंत्र मति से अपना मत तय करेगा, परंतु इसके बावजूद यहाँ जो सच्चाई आपके सामने आने वाली है, उसे पढ़ कर आपको इस बात का सहज ही अनुमान हो जाएगा कि देश की बागडोर किसके हाथों में सौंपनी चाहिए।

दरअसल भारत के मिशन शक्ति की सफलता का श्रेय लेने को लेकर कांग्रेस और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को निशाना बना रहे हैं, लेकिन साथ ही कांग्रेस इस बात से भी गुरेज़ नहीं कर रही कि अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक उसके पूर्वज प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी थे। अंतरिक्ष कार्यक्रम का श्रेय तो कांग्रेस नेहरू-इंदिरा को देने को आतुर दिखी, परंतु मिशन शक्ति की सफलता का श्रेय मोदी को देने में उसे परेशानी हो रही है, लेकिन एक बात स्पष्ट है कि देश जब भी कोई सफलता या विफलता हासिल करता है, तो उसका श्रेय उसके नेतृत्व को ही दिया जाता है। जब देश के किसी छोटे-से गाँव में होने वाली सामान्य-सी घटना के लिए अरविंद केजरीवाल जैसे नेता पीएम मोदी को हिटलर बताने से नहीं चूकते, जबकि इस तरह का विषय संबंधित पुलिस थाने, जिला कलक्टर और उसके बाद राज्य सरकार के अंतर्गत आता है, तो सीधी-सी बात है कि मिशन शक्ति की सफलता के लिए भी पीएम मोदी को श्रेय दिया जाना गलत नहीं है।

नीति आयोग के सदस्य एवं पूर्व डीआरडीओ प्रमुख वी. के. सारस्वत (फाइल तसवीर)

इस बात के समर्थन में मिशन शक्ति की सफलता के कर्णधार रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के ही एक पूर्व प्रमुख वी. के. सारस्वत का वक्तव्य ही पर्याप्त है। भले ही राजनीतिक ओछेपन के शिकार कुछ लोग सारस्वत को संघ की पृष्ठभूमि वाला बता कर उनकी बात को महत्व न दें, परंतु वर्तमान में नीति आयोग के सदस्य वी. के. सारस्वत ने मिशन शक्ति को लेकर जो वक्तव्य दिया है, उससे स्पष्ट है कि अंतरिक्ष क्षेत्र में जो ऐतिहासिक उपलब्धि भारत ने 2019 में हासिल की, वह 2014-15 में ही हासिल की जा सकती थी, परंतु दुर्भाग्य से मिशन शक्ति को 2012-13 में तत्कालीन सरकार ने मंजूरी नहीं दी। यदि उस समय देश का नेतृत्व मजबूत हाथों में होता, तो भारत यह उपलब्धि पाँच वर्ष पहले ही हासिल कर लेता।

आइए अब आपको बताते हैं कि डीआरडीओ के पूर्व अध्यक्ष और नीति आयोग के वर्तमान सदस्य वी. के. सारस्वत ने क्या दावा किया है। सारस्वत के दावे के अनुसार डीआरडीओ ने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद् (NSC) के समक्ष मिशन शक्ति तकनीक प्रस्तुत की थी, लेकिन तत्कालीन सरकार (जिसके मुखिया डॉ. मनमोहन सिंह थे) ने इसकी इज़ाजत नहीं दी। यदि उस समय मंजूरी मिल गई होती, तो पाँच वर्ष पहले ही इस तकनीक का परीक्षण हो चुका होता, लेकिन सरकार से मंजूरी न मिलने पर डीआरडीओ ने परीक्षण टाल दिया। यदि 2012-13 में इस तकनीक के परीक्षण की मंजूरी मिल जाती, तो 2014-15 में इसे लॉन्च किया जा सकता था।

उल्लेखनीय है कि वी. के. सारस्वत मई-2013 में डीआरडीओ के अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुए थे। अध्यक्ष के रूप में उन्होंने मिशन शक्ति को लेकर जो प्रक्रिया की, उसी के आधार पर उन्होंने यह दावा किया है।

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