भला हो EC-SC का, जो EVM विरोधियों की ‘लोकतंत्र बचाओ’ की बातों में नहीं आए, अन्यथा 20वीं सदी की गति से आते चुनाव परिणाम !

Written by

20,625 VVPAT का EVM से सटीक मिलान होने से EC ने ली राहत की साँस

निजी हित और हठ के लिए देश का कीमती समय और करोड़ों रुपए बर्बाद करने वालों को सबक लेना चाहिए

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 26 मई, 2019। इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन (EVM) की नीयत पर संदेह करने वाले विपक्षी दलों को चुनाव परिणामों में तो करारा तमाचा पड़ा ही है। ईवीएम ने भी अपनी अग्निपरीक्षा सफलतापूर्वक पूरी करके विपक्ष को दूसरा झटका दिया है। चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव 2019 के वोटों की गिनती के दौरान 20,625 वीवीपैट और ईवीएम के वोटों का मिलान किया, जिसमें मिसमैच का एक भी मामला सामने नहीं आया। यह दर्शाता है कि विपक्षी नेताओं का ईवीएम और वीवीपैट पर संदेह करना बिल्कुल ग़लत था। इससे निजी हित और हठ के लिये देश का कीमती समय और करोड़ों रुपये बरबाद करने वालों को सबक लेने की आवश्यकता है।

लोकसभा चुनाव की मतगणना से पूर्व विपक्षी दलों ने ईवीएम पर संदेह व्यक्त किया था और चुनाव आयोग से शिकायत की थी। आयोग की ओर से उन्हें झटका लगने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने विपक्ष की शिकायत पर चुनाव आयोग को प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र के कम से कम 5 मतदान केन्द्रों पर ईवीएम के वोटों का वीवीपैट की पर्ची से मिलान करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार लोकसभा चुनाव की मतगणना के दौरान आयोग ने 20625 वीवीपैट और ईवीएम के वोटों का मिलान किया, जिसमें गड़बड़ी का कहीं कोई मामला सामने नहीं आया। इस प्रकार आयोग के अनुसार ईवीएम और वीवीपैट का मिलान पूरी तरह से सफल रहा है और विपक्ष का ईवीएम की विश्वसनीयता पर शंका करना ग़लत साबित हुआ है।

इस साल लोकसभा चुनाव के लिये देश भर में 90 करोड़ मतदाता थे, जिनके लिये आयोग ने कुल 22.3 लाख बैलेट यूनिट, 16.3 लाख कंट्रोल यूनिट और 17.3 लाख वीवीपैट का उपयोग किया था। इन 17.3 लाख वीवीपैट में से 20625 वीवीपैट का ईवीएम से मिलान किया गया था, जबकि पिछली बार 2014 में मात्र 4,125 वीवीपैट का ईवीएम से मिलान किया गया था।

आपको बता दें कि विपक्षी दलों की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को चुनाव आयोग को हर लोकसभा सीट के कम से कम 5 मतदान केन्द्र पर ईवीएम और वीवीपैट का मिलान करने का आदेश दिया था। इसलिये आयोग ने इस मिलान की विशेष व्यवस्था की थी। ईवीएम में पड़े वोटों की सही जानकारी और रिकॉर्ड के लिये वीवीपैट की व्यवस्था पहली बार 2013-14 में की गई थी।

ईवीएम में छेड़छाड़ की संभावना को देखते हुए चेन्नई की एक एनजीओ (Tech 4 all) ने ईवीएम और वीवीपैट की पर्चियों की शत-प्रतिशत मिलान की सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 7 मई को 21 विपक्षी दलों को झटका देते हुए ईवीएम और वीवीपैट की 50 प्रतिशत पर्चियों के मिलान की माँग को भी खारिज कर दिया था। विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसे भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

हालाँकि पूर्व चुनाव आयुक्त डॉ. एस. वाई. कुरैशी के अनुसार आंध्र प्रदेश में एक ग़लती पाई गई, परंतु उसका कारण ईवीएम का खराब होना था। ईवीएम से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई थी।

इधर लोकसभा चुनाव में विजयी हुए उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने के लिये चुनाव आयोग की बैठक होगी, जिसमें सूची को अंतिम रूप दिये जाने के बाद आयोग यह सूची राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सौंपेगा। यह सूची मिलने के बाद 17वीं लोकसभा के गठऩ की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

वर्तमान लोकसभा का कार्यकाल 3 जून को पूरा होगा। केन्द्रीय केबिनेट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति से मिलकर 16वीं लोकसभा को भंग करने की सिफारिश कर दी है। नई लोकसभा का गठन 3 जून से पहले करना आवश्यक है।

आपको बता दें कि देश की 543 लोकसभा सीटों में से 542 सीटों पर लोकसभा चुनाव आयोजित हुए, जबकि वेल्लोर की एक लोकसभा सीट पर धन-बल के अत्याधिक उपयोग को देखते हुए चुनाव रद्द कर दिये गये हैं। इस सीट पर चुनाव की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।

Article Categories:
News

Leave a Reply

Shares