हम तो डूबे सनम तुमको भी ले डूबे : ­‘ख़ामोश’ हुए शत्रु, ‘पूनम’ पर छाया अंधेरा

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अहमदाबाद, 23 मई, 2019। लोकसभा चुनाव 2019 की मतगणना जारी है। परिणामों के रुझानों में भाजपा अकेले दम पर स्पष्ट बहुमत हासिल करने में न सिर्फ सफल हुई है, बल्कि 2014 से भी बड़ी सफलता अर्जित कर रही है। इसी प्रकार एनडीए भी 2014 के 336 के आँकड़े को पार करते हुए 340 के पार हो चुका है। दूसरी तरफ कांग्रेस समेत सभी मोदी विरोधियों को करारी शिकस्त खानी पड़ी है।

इन रुझानों में एक जो बड़ा तथ्य सामने आया है, वह ये कि कांग्रेस खुद तो डूबी ही, अपने सहयोगी दलों को भी ले डूबी। इसी के साथ कई दिग्गजों को भी पराजय का कड़वा घूँट पीना पड़ा है। इनमें एक नाम है पीएम मोदी के ‘शत्रु’ शत्रुघ्न सिन्हा का। 28 साल से अधिक समय तक भाजपा के साथ रहने वाले और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार में मंत्री रह चुके फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने मोदी विरोध के चलते लोकसभा चुनाव से ऐन पहले भाजपा छोड़ दी और कांग्रेस का हाथ थाम लिया। कांग्रेस खुद तो डूबी ही उनका भी राजनीतिक करियर ले डूबी।

वहीं शत्रुघ्न सिन्हा खुद तो डूबे ही अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिये पत्नी पूनम सिन्हा को भी राजनीति में घसीट लाये और उनका राजनीतिक करियर शुरू होने से पहले ही डुबो दिया। शत्रुघ्न सिन्हा ने राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिये अपनी पत्नी को समाजवादी पार्टी से चुनावी टिकट दिलवाया था, परंतु समाजवादी पार्टी ने उन्हें लखनऊ में भाजपा के दिग्गज नेता और केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के विरुद्ध चुनाव लड़वाकर उन्हें करियर के पहले ही चुनाव में करारी हार की तरफ धकेल दिया। इस प्रकार शत्रुघ्न सिन्हा अपने राजनीतिक करियर और अपनी पत्नी पूनम सिन्हा दोनों के लिये ‘शत्रु’ बन गये। उनका दो नावों पर सवार होने का फैसला उनके लिये घातक सिद्ध हुआ। वह पटना साहिब लोकसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार रविशंकर प्रसाद के सामने चुनाव हारते दिखाई दे रहे हैं। यदि ऐसा हुआ तो उनका राजनीतिक करियर ‘खामोश’ हो जाएगा और उधर लखनऊ में उनकी पत्नी पूनम सिन्हा भी भाजपा प्रत्याशी राजनाथ सिंह के सामने नहीं टिक पा रही हैं। वह भारी मतों से हारने की कगार पर हैं। शत्रुघ्न सिन्हा का फैसला उनकी पत्नी के लिये राजनीतिक आत्महत्या सिद्ध होने जा रहा है।

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