डूँगर से ड्योढ़े डोंगरे : दर-दर भटक कर पग-पग कर रहे अंगदान यज्ञ ! देखिए VIDEO

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* एक पूर्व प्रतिष्ठित सरकारी अधिकारी की अनोखी ‘दीवानगी’

* सड़कों-प्लेटफॉर्मों पर अमूल्य मानव देह का समझा रहे हैं महत्व

* दीवानगी को पागपलपन समझने वाले पागलों की भी कमी नहीं

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 29 जून, 2019 (युवाप्रेस.कॉम)। उम्र 66 वर्ष। चार साल पहले ही सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त हुए हैं। चाहते, तो औरों की तरह सरकारी पेंशन पर शेष जीवन चैन से गुज़ारने का मार्ग पसंद कर सकते थे, परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया और वे निकल पड़े एक ऐसे अनोखे महायज्ञ के लिए, जो किसी पहाड़ जैसी अडिगता और ऊँचाई से कम नहीं है।

हम बात कर रहे हैं रमेश डोंगरे की। आज से चार साल पहले टाटा इंस्टीट्यू ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) जैसी प्रतिष्ठित संस्था से सेवानिवृत्त होने वाले रमेश डोंगरे को मुंबई की सड़कों, फुटपाथों और रेलवे प्लेटफॉर्मों पर देखा जा सकता है। अपने शरीर को ही उन्होंने प्रचार-प्रसार का बोर्ड बना लिया है और लोगों को अंगदान करने के लिए प्रोत्साहित करने का महायज्ञ चला रहे हैं। डोंगरे का मानना है कि जब तक जिंदा हैं, तब तक तो देह कीमती है ही, परंतु मृत्यु के बाद भी यह शरीर कीमती होता है, बस आवश्यकता है तो इसकी कीमत समझने की। लोग शरीर को बेकार समझ कर जला-दफना देते हैं, परंतु यह शरीर और इसके कई अवयव किसी अन्य मरते व्यक्ति को जीवनदान दे सकते हैं। रमेश डोंगरे मुंबई के मार्गों पर लोगों को इसी के प्रति जागृत करने का प्रयास करते हैं।

रमेश डोंगरे को यह सद्कार्य करने की प्रेरणा दिवंगत धर्मपत्नी रमा से मिली। चार वर्ष पहले रमा का देहांत हो गया। पत्नी को श्रद्धांजलि देने के सद्कार्य के रूप में डोंगरे हर रोज 2 से 3 घण्टे यह अभियान चलाते हैं और लोगों को अंगदान, व्यसनमुक्ति, रक्तदान, चक्षुदान और शरीर के महत्वपूर्ण अवयवों को बेकार नहीं जाने देने की अपील करते हुए उन्हें सदुपयोग में लाने के प्रति जागृत करते रहते हैं।

निःस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करने के बावज़ूद रमेश डोंगरे को कई बार अपमान के घूँट भी पीने पड़ते हैं। डोंगरे कहते हैं कि पत्नी रमा ने मृत्यु से पहले देहदान की शपथ ली थी और मृत्यु के बाद लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करने का वचन लिया था। उनके इस कार्य की एक ओर पढ़े-लिखे लोग प्रशंसा करते हैं, वहीं कई अनपढ़-ज़ाहिल और गँवार लोग उन्हें चूहा-तिलचट्टा मारने की दवा बेचने वाला समझ कर मज़ाक उड़ाते हैं। यद्यपि उनके शरी से चिपके प्रेरक व संदेशयुक्त स्लोगन पढ़ने के बाद कई लोग क्षमा भी मांग लेते हैं।

रमेश डोंगरे अब तक हजारों लोगों से अंगदान का आवेदन पत्र भरवा चुके हैं। वे यह कार्य व्यक्तिगत स्तर पर करते हैं। रोजाना औसत 10 आवेदन पत्र भरवाने वाले डोंगरे को परिवार का भी समर्थन मिलता है।

आप भी देखिए रमेश डोंगरे का अंगदान अभियान :

https://www.youtube.com/watch?v=OdlK5hJbEBs
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