Messenger Kids, बच्चों के लिए अभिशाप या वरदान ?

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हमारी जिंदगी में Social media का दखल काफी बढ़ चुका है। बच्चें हो या जवान कोई इससे अछूता नहीं रह गया है। हमारी जिंदगी इसके बिना अधूरी लगने लगी है। हम इस बात को भी जानते हैं कि Social media के ज्यादा इस्तेमाल से मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है। इस बात को जानते हुए भी हम इसकी लत से आजाद नहीं होना चाहते हैं। खासकर बच्चों पर इसका नकारात्मक असर ही पड़ता है। ऐसे में Facebook ने 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Messenger Kids लांच किया है। Messenger Kids को इस्तेमाल करने के लिए Facebook account की जरूरत नहीं होगी।

Messenger Kids के लिए Facebook अकाउंट की जरूरत नहीं

Facebook ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि इसका कंट्रोल Parents के पास होगा। Messenger Kids के लिए फेसबुक अकाउंट की जरूरत नहीं है। इसकी खासियत है कि Parents अपने अकाउंट से इसे लिंक कर कंटेट पर नजर रख सकेंगे। बच्चे अपनी मर्जी से ना तो नए दोस्त बना सकते हैं और ना ही कंटेट डिलीट कर सकते हैं। इसके अलावा यह App चिल्ड्रन ऑनलाइन प्राइवेसी एंड प्रोटेक्शन एक्ट (Children’s Online Privacy and Protection Act)के तहत बच्चों को Online abuse से भी बचाएगा।

Facebook की मार्केटिंग स्ट्रेटजी तो नहीं

हालांकि Messenger Kids को लेकर विवाद भी शुरू हो गया है। कुछ लोग इसे सही बता रहे हैं तो कुछ लोगों का कहना है कि Facebook अब बच्चों को अपना User बनाने के लिए यह हथकंडा अपना रहा है। जो लोग इसके समर्थन में हैं उनका कहना है कि बच्चों को Internet से  दूर करना असंभव जैसा है। ऐसे में इस समस्या का हल Technology के जरिए ही संभव है। इसलिए अगर Facebook इस समस्या का हल लेकर आया है तो मैं इससे खुश हूं। Social media के जरिए ही सही मैं अपने बच्चों की Psychology को समझ पाऊंगा कि वे क्या सोचते हैं और क्या कर रहे हैं।

Social Media का बच्चों पर नकारात्मक असर

दूसरी तरफ जो लोग इसके खिलाफ हैं उनका कहना है कि तमाम रिपोर्ट के मुताबिक Social media के ज्यादा इस्तेमाल से Negative effect ही पड़ता है। वे अपनी जिंदगी से खुश नहीं रहते हैं। जिंदगी के प्रति उनका नजरिया नकारात्मक हो जाता है क्योंकि उन्हें बाहर की दुनिया अपनी जिंदगी से कही ज्यादा बेहतर दिखाई देती है। इसकी वजह से काफी Irritated रहते हैं और कई बच्चे तो Depression में भी चले जाते हैं। कुछ लोगों का ये भी कहना है कि 6-12 साल की उम्र में बच्चों का बौद्धिक विकास (Intellectual development) होता है। इसी उम्र में उनका नजरिया विकसित होता है। बच्चे असली जिंदगी में बातचीत करना सीखते हैं। ऐसे में 7-8 साल के  बच्चों को Chatting की लत लगाना उनकी जिंदगी से खिलवाड़ करने जैसा है। Gaming और Smartphone की वजह से बच्चे पहले से ही प्रभावित हैं।

Facebook करोड़ों यूजर तैयार कर रहा है

इन लोगों का ये भी कहना है कि पैरेंटिंग का मतलब है बच्चों को अच्छी परवरिश देना, उन्हें अच्छा इंसान बनाना। ऐसे में अगर कोई Guardian कहता है कि बच्चों पर लगाम लगाना मुश्किल है तो Parenting का मतलब क्या है ? अगर हम सोचते हैं कि Social media के जरिए बच्चे ज्यादा Social होंगे तो ये भूल है। ऐसा करने से उनमें भावनाओं की कमी होगी और emotions के बिना जिंदगी में खुश रहना मुश्किल होगा। जो लोग Messengers Kids के खिलाफ है वे इसे Facebook का Marketing strategy मानते हैं। उनके मुताबिक इसके जरिए Facebook करोड़ों यूजर को तैयार कर रहा है।

America में प्रयोग जारी

बता दें कि Messenger Kids को फिलहाल America में प्रयोग के तौर पर लांच किया गया है। Facebook के मुताबिक यह free app है जिसमें कोई Advertisement भी नहीं होंगे।

 

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