रहिमन पानी राखिए : देखिए भारत में कैसे प्रतिदिन बर्बाद किया जा रहा है जीवनदाता जल ?

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रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 28 दिसंबर, 2019 युवाPRESS। रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून।
पानी गये न ऊबरे, मोती, मानुष, चून॥ इस दोहे मे रहीमदास जी ने पानी को तीन अर्थो मे प्रयोग किया है। पानी का पहला अर्थ मनुष्य की विनम्रता से लगाया जा सकता है ।मनुष्य को अपने आचरण मे सदैव विनम्रता रखनी चाहिये ।इसके बिना व्यक्ति का कोई अस्तित्व नही रह जाता है ।पानी का दूसरा अर्थ आभा ,चमक या तेज से है ।जिसके बिना मोती का कोई अस्तित्व नही होता है ।पानी का तीसरा अर्थ जल से है जल के साथ मिलकर चूना उपयोग मे लाया जा सकता है वरना उसका अपना कोई अस्तित्व नही होता है ।अतः पानी को सदैव बचाकर रखना चाहिये।

धरती पर आज पानी की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, परंतु लोग हैं कि इसे व्यर्थ में बहाने से कदा भी नहीं चूकते। कभी नहाने में तो कभी अपनी गाड़ियों को घंटो साफ करने में घंटो पानी को व्यर्थ करते हैं। हालाँकि इस बात से हर कोई परिचित है कि कुछ स्थान ऐसे भी हैं जहाँ पानी उपलब्ध ही नहीं होता, इतना ही नहीं कुछ स्थानों पर, तो गिनती के 2 घंटे या कई दिनों में एक बार ही पानी उपलब्ध हो पाता है। हमारे देश में बड़ी संख्या में लोगों को पानी के संकट का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं पानी की बढ़ती कमी के कारण धरती बंजर होती जा रही है, जिसका सीधा असर खेती पर पड़ता है। धरती को बचाने के लिए और स्वयं की रक्षा के लिए चलिए मिल कर एक प्रण लें और हमारे लेख में बताए गए सुझावों के अनुसार पानी बचा कर देश में बढ़ रही पानी की किल्लत को जड़ से मिटाने में अपना योगदान दें।

सर्वप्रथम सरकारी संस्थानों से शुरू करते हैं. अगली बार जब आप पानी संकट क्षेत्र में पानी बाँटने जाएँ, तो इन बातों का ध्यान अश्य रखें। यदि 20 से 25 प्रतिशत पानी बचाना है, तो शहरों में ट्रांसमिशन और पानी बाँटने के दौरान पानी के फ्लो और पाइप की मोटाई पर अवश्य ध्यान रखें, क्योंकि पाइपलाइन के जरिए घरों, दफ्तरों और रेस्तरां तक पहुँचे वाला पानी पाइप की अधिक मोटाई के कारण जल्दी लीकेज हो जाता है, जिससे पानी बर्बाद होता है।

दूसरा उन लोगों के लिए है, जो अपने घर की टंकी तब तक भरते रहते हैं, जब तक वह ओवर फ्लो होकर बहने न लगे, तो आप जब भी टंकी भरने के लिए अपने पानी के मोटर को ऑन करें, उसके साथ ही टंकी भरने का अलार्म भी ऑन कर दें, ताकि टंकी भर कर बहे न और पानी बर्बाद न हो। आपकी एक छोटी सी चूक सं प्रतिदिन 120 लीटर पानी बर्बाद हो जाता है, क्योंकि 15 मिनट में एक टंकी आराम से भर जाती है। यदि आप इससे अधिक समय तक मोटर ऑन रखेंगे तो निश्चित है कि पानी व्यर्थ ही जाएगा।

अब बात करते हैं हमारी दिनचर्या में होने वाले कामों की, जैसे नहाना, ब्रश करना, शेविंग करना, बर्तन, कपड़ों की धुलाई आदि। इन सभी कामों के दौरान लोग पानी के टैब खुले ही छोड़ देते हैं, जिससे काफी मात्रा में पानी बर्बाद हो जाता है। अतः अब से जब भी आप ब्रश करें, शेविंग करें या बर्तन धुलें, तो नल का टैब बंद रखें। इसके अलावा जब आपके कपड़े अधिक मात्रा में हो तभी वॉशिंग मशीन का प्रयोग करें। ऐसी कर के आप प्रतिदिन 60-70 लीटर पानी बचा सकते हैं।

वहीं वाहन रखने वालों की बात करें, तो अधिकतर लोग लंबी पाइप लगाकर अपनी कार या मोटर साइकिल धोने के आदि होते हैं, इससे बचें। एक बाल्टी पानी और कपड़े की सहायता से भी आप अपनी कार या मोटर साइकिल को साफ कर सकते हैं, वो भी बिना अधिक पानी बर्बाद किए। साथ ही नहाने के लिए शावर के बजाय बाल्टी का प्रयोग कर के भी आप प्रतिदिन 150 लीटर पानी की बचत कर सकते हैं। धरती पर बढ़ रहे जल संकट पर रोक लगाने के लिए यदि देश का प्रत्येक नागरिक संकल्प कर ले और प्रतिदन 10 लीटर पानी बचाए, तो औसतन 136 करोड़ जनसंख्या वाले भारत में ही 136 करोड़ गुणते 10 लीटर पानी यानी लगभग 10 करोड़ लीटर पानी हर दिन बर्बाद होने से बच जाए।

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