फ्लिपकार्ट-वॉलमार्ट डील से भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिक तंत्र के लिए अच्छा संकेत

Flipkart-Walmart deal

अमेजन को टक्कर देने के लिए अब वॉलमार्ट गूगल एल्फाबेट की मदद लेगा। मीडिया सूत्रों के अनुसार भारत की सबसे बड़ी ई कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट को खरीदने के लिए वॉलमार्ट अब गूगल एल्फाबेट की मदद लेना चाहता है। ऐसा पता चला है कि एल्फाबेट भी फ्लिपकार्ट में एक से दो अरब डॉलर का निवेश करने जा रही है। फ्लिपकार्ट में 86 फीसदी हिस्सेदारी को खरीदने के लिए वॉलमार्ट प्लानिंग कर रहा है। ऐसा लग रहा है कि करीब 12 अरब डॉलर का Flipkart-Walmart deal अगले दो हफ्तों के अंदर फाइनल हो सकता है।

फ्लिपकार्ट-वॉलमार्ट डील (Flipkart-Walmart deal) यदि हो जाता है तो सौदे और निकास से स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को बहुत अधिक फायदा हो सकता है। फंडिंग और निवेश दृष्टिकोण से देखा जाये तो यह भारतीय बाजार में निवेश के लिए अच्छा सिद्ध हो सकता है। आज भारत के बहुत से निवेशक को फ्लिपकार्ट-वॉलमार्ट के डील में फायदा दीख रहा है क्योंकि इस डील से उनकों भी निवेश करने का मौका मिल सकता है। इस डील से भारतीय इंटरनेट बाजार के निवेशकों पर भी प्रभाव दिखेगा जिससे निवेशकों का भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिक तंत्र में निवेश करने के लिए विश्वास जगेगा।

वॉलमार्ट और एल्फाबेट दोनों कंपनी कुछ समय से रीटेल मार्केट में अमेजन के बढ़ते प्रभुत्व से मुकाबला करने के बारे में विचार कर रहे हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि दोनों कंपनियों में हिस्सेदारी के लिए डील हो चुकी है। वॉलमार्ट एल्फाबेट के ऑनलाइन मॉल गूगल एक्सप्रेस के तहत अपने उत्पाद को बेचने जा रहा है। उत्पादों को बेचने के लिए गूगल होस डिवाइस वॉयस शॉपिंग की सुविधा भी दे रही है। न्यूज सूत्रों के अनुसार गूगल भी भारत में अपने लिए रीटेल बाजार की संभावनाएं ढूंढ रहा है और इसके लिए उसने अपने प्रीमियम लैपटॉप पिक्सलबुक, स्मार्ट स्पीकर और स्मार्टफोट को बेचने की रणनीति बनाई है।

फ्लिपकार्ट को खरीदने के लिए वॉलमार्ट और ऐमजॉन दोनों ही कंपनियां एक दूसरे के आमने सामने खड़ी है। कुछ समय पहले ऐसा लग रहा था कि ऐमजॉन फ्लिपकार्ट को खरीद लेगा लेकिन अब वॉलमार्ट फ्लिपकार्ट को खरीदने के लिए काफी आगे निकल चुका है और यह Flipkart-Walmart deal जल्द ही फाइनल हो सकती है।

एक जानकारी के अनुसार चीन की टेंसेंट और अमेरिका की टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट का 26.5 प्रतिशत की हिस्सेदारी अभी फ्लिपकार्ट में जो इस नई डील के बाद पहले राउंड के बाद बाहर हो जायेगी। 20.8 प्रतिशत के स्वामित्व का हिस्सेदारी भी फ्लिपकार्ट मैं है वह भी पहले राउंड के डील के बाहर कंपनी से बाहर जायेगी। अगर ऐसा होता है तो क्या यह स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अच्छा है। फ्लिपकार्ट फ्लिपकार्ट के को-फाउंडर्स सचिन बंसल और बिन्नी बंसल से कंपनी के हिस्सेदारी को खरीदने के लिए डील कर रहा है।

फ्लिपकार्ट के को-फाउंडर्स सचिन बंसल और बिन्नी बंसल

कुछ हफ्तों पहले से Flipkart-Walmart deal के डील की बात को देखते हुए भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिक तंत्र में स्टार्टअप, उद्यमियों और निवेश समुदाय के बीच बहुत अधिक उत्साह दीख रही है। पिछले कुछ हफ्तों से सट्टा बाजार में इस बात का बहुत अधिक सट्टा लग रहा है कि क्या सॉफ्टबैंक और टाइगर ग्लोबल कंपनियां फ्लिपकार्ट बाहर निकलेंगे। यह भी संभावना देखी जा रही है कि फ्लिपकार्ट के संस्थापकों में से सचिन बंसल या बिन्नी बंसल अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। कुछ सूत्रों से यह भी पता चला है कि सॉफ्टबैंक कंपनी चाहता है कि फ्लिपकार्ट को अपने प्रतिद्वंद्वी अमेज़ॅन से ऑफर के लिए प्रतीक्षा करना चाहिए।

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