कश्मीर पर झूठ फैलाने वालों को करारा जवाब दे रहे विदेशी सैलानी

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 3 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। जब से मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाई है, तब से पड़ोसी देश पाकिस्तान और विदेशी मीडिया कश्मीर को लेकर दुनिया में तरह-तरह की भ्रांतियाँ फैलाने में जुटे हुए हैं। हालाँकि कश्मीर में विदेशी सैलानियों का आना लगातार जारी है और वे यहाँ पहले से अधिक शांति और सुरक्षा का अनुभव कर रहे हैं, जो उन लोगों के लिये करारा जवाब है, जो कश्मीर को लेकर दुनिया में झूठ का दुष्प्रचार कर रहे हैं।

5 अगस्त के बाद से अब तक आये 928 विदेशी सैलानी

मोदी सरकार ने लगभग दो महीने पहले 5 अगस्त को संसद में जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने की घोषणा की थी। उस समय कश्मीर घाटी में सुरक्षा कारणों से फोन और इंटरनेट जैसी सुविधाएँ बंद कर दी गई थी। साथ ही कई इलाकों में कर्फ्यू भी लगाया गया था। इसके चलते घरेलू सैलानियों ने भले ही कश्मीर घाटी की सैर स्थगित कर दी, परंतु विदेशी सैलानी नहीं रुके और फॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन ऑफिस की मानें तो घाटी में 5 और 6 अगस्त को भी क्रमशः 24 और 9 विदेशी सैलानी मौजूद थे। इसी ऑफिस से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार 5 अगस्त से लेकर 30 सितंबर तक 928 विदेशी टूरिस्ट श्रीनगर एयरपोर्ट पहुँचे। इनमें विदेशी पत्रकारों की गणना नहीं की गई है।

एकांत व शांति के लिये आउट सीज़न में आते हैं विदेशी सैलानी

पाकिस्तान और विदेशी मीडिया ने कश्मीर को लेकर दुनिया में जिस तरह का भ्रम फैलाया है, उसे देखते हुए कश्मीर घाटी में विदेशी सैलानियों के आने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है, परंतु हाउसबोट से घिरी रहने के कारण अपनी विशेष पहचान बनाने वाली डल झील पर नज़र डालें तो आश्चर्य चकित कर देने वाले नज़ारे देखने को मिलते हैं। यूं तो बारिश के मौसम में कश्मीर जाने से लोग बचते हैं, परंतु कुछ विशेष सैलानी इस मौसम में सैलानियों की भीड़ कम होने के कारण इसी मौसम में जाना पसंद करते हैं। आउट सीज़न के कारण सैलानी कम आते हैं, इसलिये इस मौसम में हाउसबोट का किराया, दिल्ली-मुंबई से श्रीनगर जाने वाली एयरलाइंस का किराया आदि भी सस्ता हो जाता है। सीज़न में हाउसबोट का एक रात्रि का किराया भी तकरीबन 10 हजार रुपये होता है, जो इस मौसम में घट कर साढ़े तीन से 4 हजार रुपये हो जाता है। इसके अलावा सैलानी कम होने से शोर-शराबा भी कम होता है और घाटी में शांति का अनुभव होता है।

स्कॉटलैंड से आये एक सैलानी स्टीन बैलेंटाइन का कहना है कि वे विज्ञान के शिक्षक हैं। कश्मीर को लेकर विदेशी मीडिया भले ही कुछ भी कहता हो, परंतु यहाँ आने पर उन्हें बिल्कुल अलग तस्वीर देखने को मिली है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि विदेशी मीडिया ने कश्मीर की जैसी तस्वीर पेश की है, वैसा यहाँ बिल्कुल भी नहीं है। हालाँकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि फोन और इंटरनेट की सुविधाएँ बंद होने से उन्हें कुछ परेशानियाँ अवश्य हुईं, परंतु उन्हें अशांति या तनावपूर्ण वातावरण जैसा कुछ भी अनुभव नहीं हुआ।

पहले से अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं सैलानी

एक सवाल हर किसी के मन में उठता है और वह ये कि जब कश्मीर में धारा 370 हटाये जाने के बाद से तनावपूर्ण वातावरण है, तो विदेशी सैलानियों की इतनी बड़ी संख्या में घाटी में मौजूदगी क्यों है ? इस बारे में कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि विदेशी सैलानी कश्मीर को अब पहले से अधिक सुरक्षित मान रहे हैं, क्योंकि अभी यहाँ की सुरक्षा व्यवस्था केन्द्र सरकार के अधीन है। इसके अलावा दूसरा कारण यह भी है कि आउट सीज़न के चलते अभी सैलानियों की संख्या कम है, जिससे विदेशी सैलानी यहाँ एकांत और शांति अनुभव करते हैं। साथ ही हाउसबोट का किराया भी आउट सीज़न में काफी कम होता है। आउट सीज़न में जब सैलानियों की कमी होती है, तब दिल्ली-मुंबई से श्रीनगर तक का फ्लाइट का किराया भी घट जाता है।

सैलानी कश्मीरियों की आजीविका का साधन

जर्मनी से आये बार्बरा स्ट्रॉस नामक विदेशी सैलानी ने कहा कि कश्मीर में तनाव की बात कही जाती है और यह भी कहा जाता है कि धारा 370 हटाये जाने से कश्मीरी नागरिक भड़के हुए हैं और नाराज़ हैं, परंतु उन्हें तो यहाँ किसी भी कश्मीरी नागरिक ने नुकसान पहुँचाने की कोशिश नहीं की। क्योंकि सैलानी उनकी आजीविका का साधन हैं। वह भी कहते हैं कि कश्मीर आने का सही समय यही है, जब यहाँ सैलानी कम होने से काफी शांति का अनुभव होता है।

कश्मीर को लेकर बढ़ा-चढ़ा कर डर फैलाया जा रहा

मलेशिया की सैलानी बिंटी शाउन नुप्रे के अनुसार उनके देश के युवा स्कॉलर ‘कॉन्फ्लिक्ट प्रोन’ जगहों को जैसे जेरूसलम, उईगुर और कश्मीर आदि जाना पसंद करते हैं और ऐसी जगहों पर जाने के लिये आवेदन करते हैं। क्योंकि वे ऐसी जगहों की परिस्थितियों को करीब से महसूस करना चाहते हैं। इन्हीं पर्यटकों की तरह कई और पर्यटकों ने भी कहा कि कश्मीर को लेकर दुनिया में काफी बढ़ा-चढ़ा कर डर फैलाया जा रहा है, जबकि कश्मीर एक बहुत ही शांत जगह है। विदेशी सैलानियों के ये जवाब उन ताकतों के लिये करारा जवाब हैं, जो कश्मीर को लेकर दुनिया को गुमराह करने का काम कर रहे हैं और झूठ का दुष्प्रचार करके कश्मीरी लोगों का अपमान कर रहे हैं। कश्मीरी नागरिक अत्यंत शांतिप्रिय हैं और चूंकि उनकी आजीविका पर्यटन पर निर्भर है, इसलिये कश्मीर के मेहमानों के लिये उनके दिल में सम्मान की भावना है।

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