न पॉलिटिशियन, न ब्यूरोक्रेट : ‘वीरप्पन विजयी’ बन सकते हैं जम्मू-कश्मीर के प्रथम LG

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 10 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। जम्मू कश्मीर और लद्दाख को केन्द्र शासित प्रदेश बनाने की कवायद शुरू होने के साथ ही अब इन प्रदेशों के नये लेफ्टिनंट गवर्नर (LG) को लेकर भी अटकलें शुरू हो गई हैं। ऐसे में मीडिया से छनकर जो खबरें आ रही हैं, वह ये कि हर बार कुछ नया और अप्रत्याशित करने के लिये जाने जाते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जम्मू कश्मीर के नये उप राज्यपाल को लेकर भी कुछ ऐसा ही आश्चर्य चकित करने वाला नाम घोषित कर सकते हैं। वैसे माना यह जा रहा है कि जम्मू कश्मीर का जो नया उप-राज्यपाल होगा, वह कोई राजनेता या ब्यूरोक्रेट न होकर एक आईपीएस (IPS) अधिकारी हो सकता है। इस अधिकारी का नाम है के. विजय कुमार, जो तमिलनाडु कैडर के 1975 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और अभी जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सलाहकार हैं।

‘वीरप्पन विजयी’ हैं के. विजय कुमार

एक समय था तब कर्नाटक और तमिलनाडु की पुलिस के लिये चंदन चोर के नाम से कुख्यात डाकू वीरप्पन सिरदर्द बना हुआ था। करोड़ों रुपये खर्च ककरने के बावजूद दोनों राज्यों की सरकारें उसका कुछ नहीं कर पा रही थी। इस कुख्यात डकैत ने कई अधिकारियों की हत्या की थी। जो भी पुलिस या सरकारी अधिकारी उसके हाथ लगता था, वह उसकी बेरहमी से हत्या कर देता था। इसी कारण दोनों राज्यों में वीरप्पन खौफ का पर्याय बन गया था और चुनौती भी। के. विजय कुमार के नाम इसी खौफ का अंत करने की कामयाबी दर्ज है।

CRPF के DG और BSF के IG भी रहे हैं विजय कुमार

65 साल के विजय कुमार, वीरप्पन का अंत करने के लिये बनाये गये स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का हिस्सा थे। वर्ष 2004 में चंदन चोर वीरप्पन को घेरकर उसे उसके अंजाम तक पहुँचाने वालों में के. विजय कुमार भी शामिल थे। इसके बाद 2010 में जब छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने सीआरपीएफ (CRPF) के 75 जवानों की हत्या कर दी, तब नक्सलियों की नकेल कसने के लिये भी के. विजय कुमार को सीआरपीएफ का डायरेक्टर जनरल बनाया गया था। इससे पहले 1998 से 2001 के बीच वह कश्मीर वैली में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के इंस्पेक्टर जनरल थे। इसी दौरान बीएसएफ ने आतंकियों के विरुद्ध जमकर कार्यवाही भी की थी।

विजय कुमार ने पुस्तक भी लिखी

के. विजय कुमार ने अपनी किताब ‘वीरप्पनः चेसिंग दी ब्रिगैंड’ भी लिखी है, जिसमें उन्होंने वीरप्पन का खात्मा करने वाले ‘ऑपरेशन काकून’ से जुड़े कई खुलासे किये हैं। इसमें वीरप्पन द्वारा कन्नड़ अभिनेता राजकुमार को 108 दिन तक अपहरण करके रखे जाने की घटना का भी जिक्र है। 2010 से 2012 के दौरान सीआरपीएफ का नेतृत्व करने के बाद के. विजय कुमार गृह मंत्रालय में वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार भी रहे हैं। अभी के. विजय कुमार जम्मू कश्मीर के वर्तमान राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं।

कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था में निभाई अहम भूमिका

5 अगस्त को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने का संकल्प और जम्मू कश्मीर राज्य का पुनर्गठन करके जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख नाम के दो राज्य बनाने और दोनों को केन्द्र शासित प्रदेश का दर्जा देने का बिल राज्य सभा में पेश किया, उससे पहले अशांति की आशंका से जम्मू कश्मीर में कड़े सुरक्षा प्रबंध किये गये थे, जिसमें राज्यपाल सत्यपाल मलिक के साथ-साथ उनके सलाहकार रहे के. विजय कुमार ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी के पुरस्कार स्वरूप अब केन्द्र सरकार उन्हें नये केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के उप-राज्यपाल का ओहदा दे सकती है।

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