अब परिजनों के सीने पर भी चमकेगी जवान की ‘शहादत’ ! जानिए क्या है भारतीय सेना का गौरवपूर्ण निर्णय ?

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 23 जुलाई 2019 (युवाPRESS)। अभी तक सेना मेडल जीतने वाले जवानों और रिटायर्ड फौजियों को ही खास मौकों पर अपने मेडल पहनने का अधिकार था, परंतु कारगिल विजय दिवस के 20वें साल के मौके पर भारतीय सेना ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला किया है। इस फैसले के बाद अब शहीद हुए सैनिकों तथा मृत पूर्व सैनिकों के परिवारजन यानी पति, पत्नी, माता-पिता, दादा-दादी, पड़दादा-पड़दादी और बच्चे भी खास मौकों पर अपने शहीद परिजनों के मेडल पहन सकेंगे।

अब शहीद और मृत पूर्व सैनिकों के मेडल पहन सकेंगे परिजन

भारतीय सेना की ओर से जारी एक निर्देश में कहा गया है कि अभी तक जिन फौजियों या रिटायर्ड फौजियों को उनकी बहादुरी या देशसेवा के लिये मेडल मिले हैं, वही सैनिक या रिटायर्ड फौजी स्वयं को मिले मेडल पहन सकते हैं, परंतु शहीद और मृत पूर्व सैनिकों को उनकी बहादुरी या देश सेवा के लिये सम्मान के रूप में जो मेडल मिलते हैं, वह उनके परिजनों के पास होते तो हैं, परंतु वह उन्हें पहन नहीं सकते हैं। इसलिये ऐसे परिजनों ने इच्छा जताई थी कि उन्हें भी अपने मृत पूर्व सैनिकों को सम्मान के रूप में प्राप्त हुए मेडल पहनने का अधिकार मिलना चाहिये। परिजनों की ओर से खास मौकों पर मेडल धारण करने की इजाजत मांगी गई थी, जिस पर भारतीय सेना की ओर से विचार-विमर्श करने के बाद यह निर्णय किया गया है कि उन्हें इसकी इजाजत देने से शहीदों और मृत पूर्व सैनिकों के परिजनों में भी अपने शहीद परिजन के अलावा, देश और सेना के प्रति भी गर्व का भाव जागेगा और इसके माध्यम से शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि भी दी जा सकेगी। कुछ देशों में इस प्रकार की इजाजत दी गई है। इसलिये भारतीय सेना ने भी तय किया कि वह शहीदों और मृत पूर्व सैनिकों के परिजनों को भी खास मौकों पर मेडल पहनने की इजाजत देगी।

दाहिनी छाती पर परिजन पहन सकेंगे मेडल

भारतीय सेना के निर्णय के अनुसार अब शहीदों के परिवारजन तथा मृत पूर्व सैनिकों के परिजन खास मौकों पर जैसे वॉर मेमोरियल में होमेज़ सेरिमनी या अंतिम संस्कार के समय फैमिली मेडल पहन सकेंगे। सेना के निर्णय के अनुसार सैनिक तथा रिटायर्ड सैनिक मेडल को अपनी बायीं छाती पर पहनते हैं, वहीं परिवारजन फॉर्मल सिविल ड्रेस में मेडल को दायीं छाती पर पहन सकेंगे। यदि एक सेट से अधिक फैमिली मेडल हैं, तो ऐसे मामले में कोई भी एक सेट पहन सकते हैं। भारतीय सेना के इस फैसले से शहीद सैनिकों तथा मृत पूर्व सैनिकों के परिवारजनों में खुशी व्यक्त की जा रही है। उनके अनुसार अब वह भी अपने शहीद सपूतों को प्राप्त हुए मेडल को धारण करके अपने सपूतों की शहादत पर गर्व का अनुभव कर सकते हैं। इसी प्रकार मृत पूर्व सैनिकों को उनकी बहादुरी या देशसेवा के लिये सम्मान के रूप में मिले मेडल पहनने का गौरव मिलने से उनके परिवारजनों में भी खुशी देखने को मिल रही है। दूसरी तरफ इस फैसले के पीछे भारतीय सेना भी सकारात्मक प्रभाव को देख रही है। उसका मानना है कि मेडल पहनने से शहीदों तथा मृत पूर्व सैनिकों के परिवारजनों को अपने परिजन पर तो गर्व होगा ही, साथ ही सीने पर मेडल धारण करने से उनके दिल में देश और सेना के लिये भी सम्मान की भावना जागृत होगी।

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