गोवा, दमन-दीव को देर से क्यों मिली आजादी ? जानें इतिहास

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Goa Independence

जैसा कि सभी जानते हैं कि भारत को अंग्रेजी शासन से आजादी साल 1947 में मिल गई थी, लेकिन भारत का एक हिस्सा गोवा, दमन-दीव साल 1961 तक गुलाम रहा था। दरअसल पूरे भारत पर जहां अंग्रेजों का शासन रहा, वहीं Goa, दमन-दीव पर पुर्तगाल का शासन था। यही वजह रही कि पूरा देश जहां 1947 में आजाद हो गया, वहीं गोवा, दमन-दीव को आजादी थोड़ी देर से मिली। तो आइए जानते हैं भारत के इस दिलचस्प इतिहास के बारे में-

दुनिया का दबाव

 

बता दें कि आजादी के बाद जहां एक तरफ पूरे देश में पंडित जवाहर लाल नेहरु की सरकार का शासन था, वहीं देश का एक हिस्सा गोवा, दमन-दीव पुर्तगाल से संचालित हो रहा था। हालांकि गोवा, दमन-दीव में आजादी की मांग उठ रही थी, लेकिन बड़े स्तर पर कुछ होता दिखाई नहीं दे रहा था। इस बीच पंडित नेहरु ने गोवा की आजादी के लिए पुर्तगाल के प्रधानमंत्री एंटोनियो सालाजार को कई पत्र लिखे, लेकिन उनमें से किसी का जवाब नहीं आया। इस बीच नेहरु सरकार ने युद्ध के द्वारा भी गोवा पर कब्जा करना चाहा, लेकिन पूरी दुनिया की ओर से भारत को सख्त हिदायत दी गई, या कहें कि धमकी दी गई कि वह गोवा में पुर्तगाल के विरुद्ध युद्ध नहीं करेगा। यही वजह थी कि तत्कालीन नेहरु सरकार गोवा में कड़ी कारवाई करने से बच रही थी।

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ऐतिहासिक घटना

 

इसी बीच कुछ ऐसा हुआ कि हालात पूरी तरह से बदल गए और भारत ने कुछ ही घंटों में गोवा, दमन-दीव पर कब्जा कर लिया। दरअसल 24 नवंबर 1961 के दिन साबरमती नाम का पैसेंजर जहाज मुंबई से कोच्ची जा रहा था। इसी दौरान बीच में पुर्तगाल अधिग्रहित गोवा का समुद्र पड़ने वाला था। जैसे ही जहाज गोवा की समुद्री सीमा में पहुंचा, तभी जहाज पर पुर्तगाल की सेना ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में 2 लोगों की मौत हो गई, वहीं कई अन्य लोग घायल हो गए। इस घटना ने स्थानीय लोगों में गुस्सा भर दिया। इसका नतीजा ये हुआ कि भारत सरकार पर गोवा को आजाद कराने का दबाव बढ़ने लगा। जिस पर तत्कालीन नेहरु सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए गोवा पर हमला करने का आदेश जारी कर दिया।

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बस फिर क्या था भारत की सेना ने 18 दिसंबर 1961 में जल, थल और वायु से गोवा पर हमला कर दिया। चूंकि भारत का हमला चारों तरफ से एक साथ हुआ था, इससे पुर्तगाली सेना के पांव उखड़ गए। इसी की नतीजा रहा कि 450 साल से पुर्तगाल के कब्जे में रहा गोवा, दमन-दीव सिर्फ 41 घंटों में भारत में मिल गया। बहरहाल इतिहास की इस घटना से पता चलता है कि जब संयम और शांति से कोई काम ना बने तो ताकत का इस्तेमाल करना जरुरी हो जाता है।

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