BIG GOOD NEWS : मिल गया हमारा ‘विक्रम’, पर कुछ बोल नहीं रहा

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 8 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। अंतरिक्ष से रविवार को एक बड़ी और अच्छी खबर आई है। यह खबर चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने दी है। चंद्रमा का चक्कर लगा रहे ऑर्बिटर ने चांद की धरती पर चंद्रयान-2 यानी लैंडर विक्रम का पता लगा लिया है। ऑर्बिटर ने विक्रम लैंडर की एक तस्वीर भी खींची है। इस तस्वीर से यह साफ हो गया है कि लैंडर विक्रम की चांद की सतह पर CRASH LANDING नहीं हुई है यानी विक्रम को कोई क्षति नहीं पहुँची है और वो पूरी तरह से ठीक है। हालाँकि विक्रम कुछ बोल नहीं रहा है और खामोश है यानी कि अभी भी उससे संपर्क स्थापित नहीं हो पा रहा है।

चांद की धरती पर सिर के बल पड़ा है ‘विक्रम’

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रमुख के. सिवन ने रविवार को बताया कि इसरो की ओर से शनिवार देर रात से ही लगातार चंद्रयान-2 का पता लगाने के प्रयास किये जा रहे हैं। इसी बीच चंद्रमा की परिक्रमा करने वाले चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने लैंडर विक्रम को खोज निकाला है। लैंडर विक्रम चांद के उसी दक्षिणी ध्रुव की सतह पर सिर के बल गिरा पड़ा है, जहाँ उसे लैंडिंग करनी थी। हालाँकि वह तय स्थान से लगभग 500 मीटर की दूरी पर जा गिरा है। राहत की बात यह है कि लैंडर विक्रम की क्रैश लैंडिंग नहीं हुई है, जिससे उसके ढाँचे को कोई नुकसान नहीं पहुँचा है। ऑर्बिटर ने अपने ऑप्टिकल हाई रेजोल्यूशन कैमरे से लैंडर विक्रम की थर्मल इमेज ली है, जिसे देखने पर पता चलता है कि लैंडर विक्रम चांद की सतह पर अपनी लैंडिंग के स्थान से 500 मीटर की दूरी पर औंधे मुँह पड़ा है।

लैंडर विक्रम से संपर्क स्थापित करने के प्रयास जारी

के. सिवन के अनुसार इसरो के कंट्रोल रूम की ओर से ऑर्बिटर के जरिये लैंडर विक्रम से संपर्क स्थापित करने के प्रयास लगातार किये जा रहे हैं और इसरो को उम्मीद है कि आगामी दिनों में उससे संपर्क स्थापित कर लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जब शनिवार देर रात 1.38 बजे लैंडर विक्रम ने 35 कि.मी. की ऊँचाई से चांद की धरती पर लैंडिंग शुरू की थी, तब चांद की सतह से मात्र 2.1 किलोमीटर की दूरी पर उसका इसरो के कंट्रोल रूम से संपर्क टूट गया था। इसके बाद वह रविवार को ऑर्बिटर की नज़र में आया है। इसरो की ओर से अनुमान लगाया जा रहा है कि 2.1 कि.मी. की दूरी पर पहुँचने के बाद लैंडर विक्रम तय मार्ग से भटक गया था और इसका कारण यह हो सकता है कि लैंडर के साइड में लगे छोटे-छोटे 4 स्टीयरिंग इंजनों में से किसी एक ने काम करना बंद कर दिया हो। इसी वजह से विक्रम तय मार्ग से डायवर्ट हो गया और यहीं से सारी समस्याएँ शुरू हुईं। इसीलिये वैज्ञानिक भी इसी पोइंट पर स्टडी कर रहे हैं। के. सिवन के अनुसार इसरो वैज्ञानिक ऑर्बिटर के जरिए विक्रम लैंडर को संदेश भेजने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि उसका कम्युनिकेशन सिस्टम ऑन किया जा सके। हालाँकि भविष्य में विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर कितना काम कर पाएंगे, इसका पता तो डेटा एनालिसिस के बाद ही चलेगा। ज्ञात हो कि ऑर्बिटर में लगे ऑप्टिकल हाई रेजोल्यूशन कैमरे (OHRC) चांद की सतह पर 0.3 मीटर यानी 1.08 फीट तक की ऊँचाई वाली किसी भी वस्तु की स्पष्ट तस्वीर ले सकते हैं।

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