दलीत संगठन करेंगे भारत बंद, पंजाब में बस और मोबाइल इंटरनेट पर पाबंदीः- SC, ST

Written by
SC

नई दिल्लीः- SC  जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के मामले को लेकर Supreme court से आए फिल्हाल के निणर्य के विरोध में दलित और आदिवासी संगठनों ने आज भारत बंद का आहवान किया है। इस दौरान Punjab Government ने Busऔर Mobile Internet सेवाएं Suspended रखने का आदेश दिया है। स्कूल बंद रहेगी तथा बसें भी सड़कों पर नहीं चलेंगी। इतना ही नहीं सेना व अर्द्धसैनिक बलों को किसी भी परिस्थिति में तैयार रहने के लिए कहा गया है।

दरअसल संगठनों ने मांग करते हुए कहा कि SC, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 में सेशोधन को फिर से वापस लेकर एक्ट को पूर्व ही की तरह लागू किया जाए। मिली जानाकरी के अनुसार गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी ने भी लोगों से भारत बंद में शामिल होने का आहवान किया है।

पंजाब में इसकी खास तैयारियां

पंजाब सरकार के प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि Social Media पर अफवाह फैलाने वालों पर लगाम लगाने को लेकर राज्य में Mobile Internet सेंवाएं निलंबित रहेंगी। प्रवक्ता का कहना है कि किसी भी अप्रिय हादसा को रोकने के लिए पूरे राज्य में बंद के दौरान सार्वजनिक एंव निजी परिवहन की सेवाएं निलंबित रहेंगी तथा बैंक भी बंद रहेंगे।

हांलांकि यह आदेश Chief Minister Amarinder Singh के शीर्ष Police officers तथा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के बाद जारी किए गये। जिसके पश्चात एक Video Conference भी आयोजित की गई। इस विडियो में मुख्य सचिव, उपायुक्त तथा सारे जिलों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। दरअसल सुरक्षा बलों ने आज एहतियात के तौर पर राज्य के कुछ भागों में फलैग मार्च निकाला। गोरतलब यह है कि सरकार ने तीन अप्रैल तक कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए Special Executive Magistrate नियुक्त किये हैं। जबकि Punjab Chief Minister Amarinder Singh ने राज्य के लोगों तथा खासरकर SC के सदस्यों से संयम बरतने तथा कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।

गोरतलब यह है कि आज भारत सरकार Supreme Court में एक पुनर्विचार याचिका दायर कर SC, एसटी के कथित उत्पीड़न के मामले को लेकर जल्द होने वाली गिरफतारी तथा मामले दर्ज किए जाने को प्रतिबंधित करने के Supreme court को आदेश को चुनौती देगी। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक सामाजिक न्याय और Ministry of Empowerment द्वारा Supreme court में आज दायर की जाने वाली पुर्नविचार याचिका में यह बात सामने आने की आशंका है कि कोर्ट का आदेश अनुसूचित जाति तथा SC, अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के प्रावधानों को कमजोर करेगा।

सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय यह भी कह सकता है कि फिल्हाल के आदेश से कानून का डर कम होगा तथा इस कानून का उल्लंघन बढ़ने की आशंका है। दरअसल Supreme court ने इस कानून के तहत जल्द होने वाली गिरफतारी तथा आपराधिक मामले दर्ज किए जाने को हाल ही में प्रतिबंधित कर दिया था। क्योंकि यह कानून भेदभाव तथा अत्याचार के विरूध हाशिये पर मौजूद समुदायों की सुरक्षा करता है। हालांकि LJP chief Ramvilas Paswan एंव Union Social Justice Minister Thavarchand Gehlot के नेतृत्व में NDA के एससी और एसटी सांसदों ने इस कानून के प्रावधान को कमजोर किए जाने के सुप्रीम कोर्ट के निणर्य पर चर्चा के लिए पिछले सप्ता भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।

दरअसल गहलोत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरूध पुनर्विचार याचिका के लिये कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को एक पत्र लिखा था।  जिसमें उन्होंने इस बात का जिक्र किया था कि यह आदेश इस कानून को निष्प्रभावी बना देगा और दलितों एवं आदिवासियों को न्याय मिलने को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगा। जबकि इस बीच, गहलोत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध कर रहे विभिन्न संगठनों और
लेागों से शुक्रवार को अपना प्रदर्शन वापस लेने की अपील की। मगर वहीं राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित  जाति आयोग ने फैसले पर पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा कि मूल अधिनियम को बहाल किया जाना चाहिए।

Article Categories:
News

Leave a Reply

Shares