रियल एस्टेट के लिये 25,000 करोड़ रुपये की मदद कितनी रियल सिद्ध होगी ?

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 7 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत में वित्त वर्ष 2019-29 के प्रारंभ से ही आंतरिक मंदी का माहौल है। ऐसे में जिस सेक्टर में सबसे अधिक असर देखने को मिल रहा है, वह रियल एस्टेट सेक्टर है। केन्द्र सरकार की ओर से इस सेक्टर को मंदी से उबारने के लिये विभिन्न कदम उठाये जा रहे हैं। इसी क्रम में अब केन्द्र सरकार ने इस सेक्टर की रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने के लिये 25,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन देने की घोषणा की है। इससे पहले केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बाजार की मंदी दूर करने के उद्देश्य से मौद्रिक तरलता (लिक्विडिटी) बढ़ाने के लिये राष्ट्रीयकृत बैंकों में 70,000 करोड़ रुपये डालने की घोषणा की थी। अब उन्होंने खास तौर पर रियल सेक्टर के लिये 25,000 करोड़ रुपये का वैकल्पिक निवेश कोष यानी अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) बनाने की मंजूरी दी है। सरकार का मानना है कि इससे धन के अभाव में रियल एस्टेट सेक्टर में रुकी हुई परियोजनाओं को पूरी करने में मदद मिलेगी। हालाँकि सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकार का यह फंड ही पर्याप्त है या सरकार को कुछ और कदम उठाने की जरूरत है ? जैसे कि रियल एस्टेट डेवलपर्स करों की व्यवस्था में बदलाव करने और करों की दरों में रियायतें देने की भी माँग कर रहे हैं।

कैसे और किसकी मदद करेगा सरकारी फंड ?

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के कथनानुसार इस एआईएफ में केन्द्र सरकार का योगदान 10,000 करोड़ रुपये का होगा, जबकि शेष 15,000 करोड़ रुपये की मदद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) तथा भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की ओर से की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस फंड से 4.58 लाख मकानों वाली 1,600 आवासीय परियोजनाओं को लाभ होगा। इस फंड से मुंबई में लगभग 2 करोड़, दिल्ली एनसीआर, कोलकाता, बेंगलुरु, चेन्नई, पुणे, अहमदाबाद और हैदराबाद में 1.5 करोड़ और अन्य शहरों में लगभग 1 करोड़ सहित कुल 4.58 लाख मकानों की अटकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने के लिये आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जाएगी। इन परियोजनाओं के लिये चरणबद्ध तरीके से धन उपलब्ध कराया जाएगा। जैसे-जैसे चरण पूरा होगा, उसकी राशि जारी की जाएगी। इसके लिये एक अकाउंट में पैसे डाले जाएँगे। शुरुआत में यह अकाउंट एसबीआई के पास होगा। जो अधूरे प्रोजेक्ट रियल एस्टेट रेग्युलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट (RERA) में हैं, उन्हें भी एक प्रोफेशनल अप्रोच के तहत सहयोग दिया जाएगा। उन्हें अंतिम स्टेज तक मदद दी जाएगी। यानी यदि 30 प्रतिशत काम अधूरा है, तो जब तक प्रोजेक्ट पूरा नहीं होगा, उन्हें मदद जारी रखी जाएगी, ताकि मकान के खरीदार को जल्दी से जल्दी मकान हैंड ओवर किया जा सके। यदि ऐसा प्रोजेक्ट नॉन परफोर्मेंस एसेट (NPA) भी होगा तो भी उसकी मदद की जाएगी। इसके अलावा दिवाला समाधान के लिये राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) में भेजी जा चुकी आवासीय परियोजनाओं को भी इस कोष से धन मुहैया कराया जाएगा। यदि कंपनी लिक्विडेशन की तरफ जाती है तो उसे इसका फायदा नहीं मिल पायेगा। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी डेवलपर्स का एक प्रोजेक्ट शुरू हुआ है और पूरा नहीं हो पाया है, उसे तो सहयोग मिलेगा परंतु उसी कंपनी का दूसरा प्रोजेक्ट जो शुरू नहीं हुआ है, उसे इसका लाभ नहीं मिलेगा। निर्मला सीतारमण के अनुसार इस कोष से सस्ते घरों की परियोजनाओं और मध्यम वर्ग के लिये बनाये जाने वाले घरों की परियोजनाओं को भी धन उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अभी एसबीआई और एलआईसी हाउसिंग फाइनांस इस फंड से जुड़े हैं, आगे और भी संस्थान इसके साथ जुड़ेंगे और इसके बाद फंड की राशि भी बढ़ाई जा सकती है।

7 महानगरों में ही 1,600 आवासीय परियोजनाएँ अधूरी

देश के 7 महानगरों की बात की जाए तो इनमें लगभग 4.58 लाख मकानों वाली 1,600 आवासीय परियोजनाएँ विभिन्न चरणों में अधूरी पड़ी हैं, जिनकी कीमत लगभग 4,64,300 करोड़ रुपये है। अकेले मुंबई महानगरीय क्षेत्र (MMR) में ही 2,10,000 और दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में 2,00,000 लाख मकानों के प्रोजेक्ट्स पेंडिंग हैं। इस प्रकार इन दो महानगरों में ही लगभग 4,00,000 मकानों के 3,60,000 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत के प्रोजेक्ट्स अधूरे हैं। ऐसे में सरकार का प्रोत्साहन इन प्रोजेक्टों को पूरा करने में मदद करेगा।

कराधान में बिल्डरों को चाहिये रियायतें

रियल एस्टेट के कई बिल्डरों का कहना है कि उन्हें कराधान में रियायतों की आवश्यकता है। क्योंकि अन्य देशों की तुलना में एक तो भारत में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के लिये ली जाने वाली स्टांप ड्यूटी सर्वाधिक है और इसके अलावा इसे एक मुश्त लेने का प्रावधान है। अनेक खरीदारों के लिये एकमुश्त स्टांप ड्यूटी भरपाई करना मुश्किल होता है। इसलिये सरकार को चाहिये कि वह ग्राहकों के हित में अपने कराधान में बदलाव करे। कई विशेषज्ञों ने भी कहा है कि देश की कराधान व्यवस्था रियल एस्टेट के लिये आदर्श नहीं है, यदि कराधान में सुधार किये जाएँ, तो रियल एस्टेट अच्छा प्रदर्शन कर सकता है। रियल एस्टेट डेवलपर्स को स्टांप ड्यूटी और जीएसटी सहित विभिन्न करों का विभिन्न स्वरूपों में भुगतान करना पड़ता है, जिसने रियल एस्टेट डेवलपर्स को पंगु बना दिया है।

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