घोर आश्चर्य : संविधान में जो ‘पद’ ही नहीं, उस पर बैठने वालों की लगातार लंबी हो रही है कतार !

* स्वतंत्रता के साथ ही आरंभ हुई ‘निष्पद’ प्रतिष्ठा देने की परम्परा

* सरदार से मनोहर तक 99 लोग बन चुके ‘असंवैधानिक’ पदाधिकारी

* अब इतिहास में पहली बार एक साथ 5 नेता बनेंगे ये ‘अपदाधिकारी’ !

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 7 जून, 2019। शीर्षक पढ़ कर आपको आश्चर्य हो रहा होगा, परंतु जब आप समाचार पढ़ेंगे, तो यह आश्चर्य घोर आश्चर्य में बदल जाएगा। भारत में ग्राम पंचायत सदस्य से लेकर राष्ट्रपति तक की कई स्तरीय शासन व्यवस्था में उपलब्ध कई अनगिनत संवैधानिक पद हैं, परंतु एक पद ऐसा भी है, जो संवैधानिक नहीं है। इसके बावजूद उस पद पर अब तक 99 लोग बैठ चुके हैं। आपको यह जान कर भी आश्चर्य होगा कि संविधान में जिस पद की कोई व्यवस्था नहीं है, उस पर बैठने वाले महानुभावों में सबसे पहला नाम देश के लौह पुरुष और प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल का आता है। इस ‘असंवैधानिक पद’ की चर्चा आज इसलिए करने को विवश होना पड़ा, क्योंकि शीघ्र ही 5 और नेता इस पद पर विराजमान होने जा रहे हैं।

आइए, अब अधिक रहस्य न बनाते हुए आपको इस ‘असंवैधानिक पद’ के बारे में बता ही देते हैं। यह पद है उप प्रधानमंत्री और उप मुख्यमंत्री का पद। आंध्र प्रदेश के नए मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने आज घोषणा की है कि उनके मंत्रिमंडल में पाँच उप मुख्यमंत्री बनाए जाएँगे। रेड्डी की यह घोषणा अपने आप में ऐतिहासिक है, क्योंकि स्वतंत्र भारत के इतिहास में आंध्र प्रदेश पहला ऐसा राज्य बनेगा, जहाँ एक साथ पाँच उप मुख्यमंत्री होंगे। वैसे उप प्रधानमंत्री या उप मुख्यमंत्री पदों का न तो संविधान में उल्लेख है और न ही इसके लिए सम्बद्ध व्यक्ति को कोई अतिरिक्त वेतन ही दिया जाता है।

राजनीतिक लाभ और नंबर 1 के बाद की रेस के लिए उपयोग

वास्तव में उप प्रधानमंत्री या उप मुख्यमंत्रीकेपद राजनीतिक दलों ने अपने राजनीतिक फायदे-नुकसान के हिसाब से स्वयं सृजित किए हैं। इस निष्पद परम्परा की जनक कांग्रेस थी। जब देश स्वतंत्रत होने जा रहा था, तब कांग्रेस के अधिकांश लोग सरदार वल्लभभाई पटेल को प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे, परंतु महात्मा गांधी के नेहरू प्रेम के कारण ऐसा हो न सका। कांग्रेस ने जनता में यह संदेश देने के लिए सरदार पटेल को उप प्रधानमंत्री बना दिया कि नेहरू सरकार में पटेल का भी महत्व कम नहीं है। वैसे पटेल को जानने वाले यह दावे के साथ कह सकते हैं कि उन्होंने उप प्रधानमंत्री पद मांगा नहीं होगा। इसके बाद तो यह निष्पद परम्परा ऐसी प्रचलित हुई कि देश में जहाँ और जब-जब राजनीतिक दलों को लगा कि एक प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री पद की स्पर्धा में एक से अधिक लोग हैं, तो उन्हें शांत रखने के लिए ‘उप’ पद दे दिया गया। सरदार पटेल को तो नेहरू के लगभग समकक्ष मानते हुए उप प्रधानमंत्री बनाया गया था, परंतु उनके बाद जो 6 लोग उप प्रधानमंत्री बने, वे सभी प्रधानमंत्री पद की रेस में थे। इनमें मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह, बाबू जगजीवन राम, यशवंत राव चव्हाण, चौधरी देवीलाल और लालकृष्ण आडवाणी शामिल हैं। यद्यपि इन 7 उप प्रधानमंत्रियों में से एकमात्र मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बनने में सफल रहे। इसके बाद राज्यों में भी उप मुख्यमंत्रियों का प्रचलन शुरू हुआ और इस तरह सरदार पटेल से आरंभ हुई निष्पद परम्परा हाल ही में गोवा के उप मुख्यमंत्री बने मनोहर अजगाँवकर तक जारी है।

राज्यों में 76 उप मुख्यमंत्री बन चुके, 5 नए जुड़ेंगे

देश में जिस तरह उप प्रधानमंत्री पद की परम्परा शुरू हुई, उसी तरह राज्यों में उप मुख्यमंत्री बना कर राजनीतिक, जातिगत-सामाजिक-धार्मिक समीकरण साधने का प्रचलन भी शुरू हुआ। वर्तमान में देश के 31 राज्यों में भी 16 उप मुख्यमंत्री कार्यरत् हैं और अब आंध्र प्रदेश में 5 नए उप मुख्यमंत्री बनने के बाद इनकी कुल संख्या 21 हो जाएगी। आंध्र प्रदेश जो पाँच उप मुख्यमंत्री बनाए जा रहे हैं, उनमें एससी, एसटी, पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक और कापू समुदाय से एक-एक विधायक को यह ‘असंवैधानिक’ पद सौंपा जाने वाला है।

आइए, आपको राज्य वार उप मुख्यमंत्रियों की संख्या से परिचित कराते हैं :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed