गुजरात से दिल्ली की ओर बढ़ते रेगिस्तान को रोकने के लिये मोदी सरकार बनाएगी खास दीवार

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 9 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 2016 में एक नक्शा जारी किया था, जिसके अनुसार गुजरात से राजस्थान होते हुए दिल्ली तक 50 प्रतिशत से भी अधिक भूमि हरित क्षेत्र से बाहर जा चुकी है। इसका अर्थ यह है कि इन इलाकों में रेगिस्तान का दायरा बढ़ने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। हालाँकि मोदी सरकार ने रेगिस्तान को बढ़ने से रोकने के लिये गुजरात से लेकर दिल्ली तक लगभग 1,400 किलोमीटर लंबी और 5 किलोमीटर चौड़ी एक खास दीवार बनाने का विचार किया है। यदि इस विचार को अमलीजामा पहनाया गया तो देश की लगभग 26 मिलियन हेक्टेयर भूमि को प्रदूषण मुक्त यानी हरित बनाया जा सकेगा। इतना ही नहीं, इस दीवार से पाकिस्तान के रेगिस्तान से उड़कर दिल्ली तक पहुँचने वाली धूल को भी रोका जा सकेगा। यह दीवार है ‘ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया।’

क्या है ‘ग्रीन वॉल ऑफ इण्डिया’ ?

देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वॉर्मिंग को लेकर चिंतित है। हाल ही में अमेरिका में आयोजित हुई संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पर्यावरण संरक्षण के लिये पूरी दुनिया को एकजुट होकर इस समस्या से निपटने के प्रयास करने का आह्वान किया था। इससे पहले पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली मात्र 16 साल की स्वीडिश एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने पर्यावरण सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाले दुनिया के बड़े-बड़े नेताओं को लताड़ लगाई थी। यह एक्टिविस्ट अपनी बात कहते हुए रो पड़ी थी। उसने कहा था कि यदि समय रहते कार्बन उत्सर्जन को कम करने के प्रयास नहीं किये गये तो पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। भारत की मोदी सरकार ने न सिर्फ इस चिंता को दूर करने वाला बल्कि देश में पर्यावरण के संरक्षण और हरित क्षेत्र को बढ़ाने वाला व्यापक कदम उठाने का विचार किया है। इस प्रकल्प को ही ‘ग्रीन वॉल ऑफ इण्डिया’ नाम दिया गया है।

गुजरात के पोरबंदर से लेकर हरियाणा के पानीपत तक बनने वाली इस ग्रीन बेल्ट से घटते जा रहे वन क्षेत्र में भी इजाफा होगा।

अफ्रीका से मिला आइडिया

अफ्रीका में भी सेनेगल से जिबूती तक हरित पट्टी का निर्माण किया जा रहा है। अफ्रीका में भी क्लाइमेट चेंज और बढ़ते रेगिस्तान को रोकने के लिये हरित पट्टी तैयार की जा रही है, जिसे ‘ग्रेट ग्रीन वॉल ऑफ सहारा’ भी कहा जाता है। अफ्रीका में ग्रेट ग्रीन वॉल का काम लगभग एक दशक पहले शुरू हुआ था, परंतु उसमें अलग-अलग देशों की भागीदारी होने से तथा उनकी कार्यप्रणाली अलग-अलग होने के कारण यह प्रकल्प अभी भी साकार नहीं हो पाया है। जबकि भारत की सरकार इस प्रकल्प को 2030 तक प्राथमिकता में लेकर अमलीजामा पहनाने का विचार कर रही है। अफ्रीका की तर्ज पर केन्द्र सरकार ने भी गुजरात से लेकर दिल्ली और हरियाणा सीमा तक ‘ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया’ को विकसित करने का विचार किया है। भारत की यह ग्रीन बेल्ट 1,400 किलोमीटर लंबी और 5 किलोमीटर चौड़ी होगी। हालाँकि अभी तक यह विचार प्रारंभिक चरण में ही है, परंतु कई मंत्रालयों के अधिकारी इसे लेकर काफी उत्साहित हैं। यदि इस प्रोजेक्ट पर मुहर लगती है तो यह भारत में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिये भविष्य में एक मिशाल बन जाएगा। इसे थार रेगिस्तान की पूर्वी दिशा में विकसित किया जाएगा।

अरावली की सूखी पहाड़ियों पर विकसित होगी हरियाली

गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक फैली अरावली की पहाड़ियों पर घटती हरियाली के संकट को भी हल किया जा सकेगा। एक अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि देश में सिमटते जंगलों और बढ़ते रेगिस्तान को रोकने का यह उपाय हाल ही में आयोजित हुई संयुक्त राष्ट्र की कॉन्फ्रेंस (COP24) से आया है। हालाँकि अभी तक यह केवल विचार है और मंजूरी के लिये फाइनल स्टेज तक नहीं पहुँचा है। यह ग्रीन बेल्ट लगातार तैयार नहीं की जाएगी।

पहले अरावली रेंज का एक बड़ा हिस्सा इसके तहत कवर किया जाएगा, ताकि उजड़े हुए जंगल को फिर से विकसित किया जा सके। इस प्लान को मंजूरी मिलने के बाद अरावली रेंज तथा अन्य जमीनों पर काम शुरू किया जाएगा। इसके लिये किसानों की जमीन का अधिग्रहण भी किया जाएगा। देश में इस ग्रीन बेल्ट से जिस 26 मिलियन हेक्टेयर भूमि को प्रदूषण मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है, उसमें अरावली भी शामिल है।

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