VIDEO : जो देश में कहीं नहीं होता, वो गुजरात में फिर एक बार हुआ : जानिए क्या हुआ ?

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सिर्फ 1 VOTE के लिए EC की मशक्कत को देख कर भी आप नहीं समझ पाए अपने अधिकार का मूल्य, तो आप मूर्ख हैं !

जो कहीं नहीं होता है, ऐसा अदभुत दृश्य देखने को मिलता है गुजरात की जूनागढ़ लोकसभा सीट के एक मतदान केन्द्र पर। यहाँ एक मतदाता के मतदान करते ही 100 प्रतिशत मतदान हो जाता है। दरअसल इस मतदान केन्द्र पर मात्र एक ही मतदाता है और इस एक मतदाता के लिये ही चुनाव आयोग मतदान केन्द्र की पूरी व्यवस्था करता है। यह दर्शाता है कि भारतीय चुनाव व्यवस्था में एक-एक मत का कितना महत्व है।

गुजरात के नवनिर्मित गीर सोमनाथ जिले का कुछ हिस्सा जूनागढ़ लोकसभा क्षेत्र में आता है। इस जिले की गीर गढड़ा तहसील का बाणेज गाँव जंगल में 35 किलोमीटर अंदर स्थित है, जहाँ बाणेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी भरतदास गुरु दर्शनदास के लिये मतदान केन्द्र स्थापित किया जाता है। बाणेज गीर के अड़ाबीड़ जंगल के बीच स्थित एक तीर्थधाम है और यह एशियाई सिंहों के निवास के लिये आरक्षित क्षेत्र में स्थित होने से वन विभाग यहाँ किसी को भी रात में ठहरने की स्वीकृति नहीं देता है। क्योंकि रात को यहाँ सिंह घूमते हैं और इस प्राँगण में भी आ जाते हैं। यह मंदिर काफी प्रसिद्ध होने से दिन में यहाँ दर्शनार्थी आते हैं, जिनके लिये मंदिर की ओर से अन्नक्षेत्र का भी आयोजन किया जाता है। महा शिवरात्रि और श्रावण महीने में प्रतिदिन महादेव का रुद्राभिषेक किया जाता है। केवल मंदिर के पुजारी महंत भरतदास ही वर्षों से अकेले इस मंदिर में रहते हैं। महंत के अनुसार जब पाँडव वनवास के दौरान गीर जंगल से गुजरे थे, तब उनकी माता कुंती को प्यास लगने पर अर्जुन ने भूमि में बाण चलाकर पाताल गंगा को प्रकट करके माता कुंती की प्यास बुझाई थी, तब से ही यहाँ कुंड बन गया है, जिसमें निरंतर स्वच्छ मीठा जल उपलब्ध रहता है। सूखे के दौरान भी यह कुंड नहीं सूखता है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं।

महंत का एकमात्र वोट लेने के लिये एक प्रिसाइडिंग अधिकारी, दो पोलिंग एजेन्ट, एक चपरासी, दो पुलिस जवान तथा एक सीआरपीएफ जवान सहित कुल 7 व्यक्तियों का स्टाफ यहाँ आता है। तहसील पंचायत, जिला पंचायत, विधानसभा या लोकसभा का कोई भी चुनाव या उपचुनाव हो तो यहाँ महंत के वोट के लिये मतदान केन्द्र स्थापित किया जाता है। मतदान के एक दिन पहले से ही स्टाफ को यहाँ पहुँच जाना पड़ता है और मंदिर से 100 मीटर दूर स्थित वन विभाग के क्वार्टर में ठहरता है। अगले दिन इसी क्वार्टर में मतदान केन्द्र शुरू किया जाता है।

यहाँ तक पहुँचने का मार्ग भी अत्यंत दुष्कर है। यहाँ पहुँचने के लिये स्टाफ उना से 70 किलोमीटर की यात्रा तय करके आता है। जामवाड़ा तक उसे पक्के रोड की सुविधा मिलती है। इससे आगे बाणेज तक का रास्ता घनघोर जंगल से गुजरता है और कच्चा है। इसके बावजूद जब भी चुनाव आते हैं तब यह टीम इस स्थल पर पहुँचती है और मतदान केन्द्र स्थापित करती है। यहाँ 2002 से लगातार मतदान केन्द्र स्थापित होता है। महंत के मतदान करने के साथ ही इस केन्द्र पर 100 प्रतिशत मतदान हो जाता है। भरतदास सुबह 8 बजे ही मतदान कर देते हैं, परंतु इस टीम को यहाँ नियमानुसार पूरे दिन बैठना पड़ता है। इस बीच वन विभाग की टीम इन लोगों के लिये रात्रि भोजन, सुबह का चाय-नास्ता और दोपहर के भोजन आदि की व्यवस्था करती है। इसके अलावा जिला प्रशासन की ओर से भी इस टीम के लिये फूड पैकेट्स की व्यवस्था की जाती है।

60 वर्ष के महंत भरतदास के अनुसार उन्हें गर्व है कि उनके एकमात्र वोट के लिये चुनाव आयोग की ओर से मतदान केन्द्र की व्यवस्था की जाती है। उन्होंने कहा कि वह उत्साह से मतदान की जिम्मेदारी निभाते हैं। जैसे इस मतदान केन्द्र पर 100 प्रतिशत मतदान होता है, वैसे ही हर मतदाता उत्साह से मतदान करके जागृत नागरिक का कर्तव्य निभाये और हर मतदान केन्द्र पर 100 प्रतिशत मतदान हो।

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