क्या गुजरात का ‘द्वारकेश’ देश के हजारों ‘3 IDIOTS ’ की कहानी नहीं है ?

* एक करोड़पति का बेटा क्यों होटल में बर्तन साफ करने को हुआ मजबूर ?

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 6 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। यदि आपका जन्म एक करोड़पति परिवार में हुआ हो, आपका पिता प्रसिद्ध तेल व्यापारी हो, तो क्या आवश्यक है कि आपको इंजीनियर, व्यापारी या कोई ऊँचा पद प्राप्त करने के लिए ही पुरुषार्थ करना चाहिए ? आपका उत्तर चाहे हाँ हो या ना, परंतु वडोदरा जिले के 19 वर्षीय युवक द्वारकेश ठक्कर को तो यह बात रास नहीं आई। यही कारण है कि एक करोड़पति का बेटा होने के बावजूद द्वारकेश न केवल घर से भाग गया, अपितु उसने होटल में बर्तन साफ करने की नौकरी करने को भी अपना स्वाभिमान समझा।

जी हाँ। यह सत्य घटना है। वर्ष 2009 में आई बॉलीवुड फिल्म ‘3 IDIOTS’ में 3 ऐसे युवकों की कहानी बताई गई है, जो अपने माता-पिता की इच्छाओं के बोझ तले जी रहे थे, परंतु फिल्म का सार यह था कि किसी भी माता-पिता को अपनी संतान को अपनी अधूरी इच्छाओं की पूर्ति करने का साधन नहीं बनाना चाहिए और संतान जो बनना चाहती है, वही उसे बनाना चाहिए और उसके लिए पूरी स्वतंत्रता देनी चाहिए।

कुछ ऐसी ही कहानी है कि वडोदरा जिले की पादरा तहसील के एक तेल व्यापारी के पुत्र द्वारकेश ठक्कर की। 19 वर्ष का यह युवक गत 14 अक्टूबर से गुमशुदा था, परंतु 22 दिनों के बाद वह जब-जहाँ-जिस अवस्था में मिला, उसने न केवल उसके परिजनों को अचंभित कर दिया, अपितु उसकी कहानी ने देश के लाखों माता-पिताओं को फिर वही 3 इडियट्स फिल्म वाला संदेश दिया कि अपनी इच्छाओं का बोझ संतानों पर नहीं डालना चाहिए।

होटल में बर्तन साफ करने की नौकरी की

वास्तव में द्वारकेश ठक्कर इंजीनियरिंग कॉलेज का विद्यार्थी है। गत 14 अक्टूबर को वह हमेशा की तरह घर से कॉलेज जाने के लिए निकला, परंतु उस दिन वह कॉलेज नहीं गया। देर शाम तक जब द्वारकेश कॉलेज से घर नहीं लौटा, तो परिजन परेशान हो गए और पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस हरकत में आई। करोड़पति पिता के पुत्र के लापता होने को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने अपहरण जैसी आशंकाओं के चलते त्वरित कार्रवाई की। पुलिस को अब तक कोई सुराग नहीं मिल रहा था, परंतु अचानक एक दिन शिमला के एक होटल के मैनेजर का पादरा पुलिस थाने में फोन आया कि उनके होटल में एक 19 वर्षीय युवक बर्तन साफ करने की नौकरी करता है। वास्तविकता यह थी कि यह युवक कोई और नहीं, अपितु द्वारकेश ही था। द्वारकेश की न तो इंजीनियरिंग में और न ही पढ़ाई में दिलचस्पी है। इसीलिए उसने अपने परिजनों के समक्ष अपनी क्षमता को सिद्ध करने के लिए घर छोड़ कर चले जाने और अपने हिसाब से अपने पैरों पर खड़े होने के लिए शिमला पहुँच कर होटल में नौकरी कर ली।

रोड पर सोते हुए मिला द्वारकेश

शिमला के होटल मैनेजर का फोन आने के बाद पादरा पुलिस निरीक्षक एस. ए. करमूर ने तत्काल पादरा पुलिस थाने के हैड कॉन्स्टेबल सनासिंह गोहिल और वडोदरा तहसील पुलिस थाने के हैड कॉन्स्टेबल भूपेन्द्रसिंह महीडा से सम्पर्क किया, जो छुट्टी लेकर सपरिवार शिमला घूमने गए थे। करमूर का निर्देश मिलते ही गोहिल और महीडा ने द्वारकेश के चित्र और परिचय पत्र के आधार पर उसे ढूँढ निकाला। गोहिल ने बताया, ‘होटल मैनेजर ने हमें बताया था कि एक युवक हाईवे पर खाने-पीने की दुकानों और फूड स्टॉल पर काम करता है। इसके बाद हमने ऐसे सभी दुकानदारों से संपर्क करते हुए द्वारकेश की तसवीर शेयर की। सोमवार को एक टैक्सी ड्राइवर ने मुझे फोन कर बताया कि एक लड़का सड़क के किनारे सो रहा है। इसके बाद हम मौके पर पहुँचे और सड़क पर सो रहे द्वारकेश का पता लगा लिया।’ द्वारकेश का पता लगने के बाद उसके परिजन फ्लाइट से शिमला पहुँचे और उसे पुन: अपने घर ले गए।

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