आपकी सेहत सुधारने के लिये दौड़ लगा रहे हैं धावक लिहास त्रिवेदी

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 19 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। दौड़ लगाने से सेहत में सुधार आता है। गुजरात के धावक 50 वर्षीय लिहास त्रिवेदी दौड़-दौड़ कर यही संदेश समाज तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। आज कल आराम पसंद जीवन शैली ने लोगों की सेहत बिगाड़ दी है। शरीर का डीलडौल ही खराब करके रख दिया है। पैदल चलना और दौड़ना किसी को पसंद नहीं। वाहन से ही आवागमन करते हैं, जिससे शरीर को कई प्रकार की बीमारियों ने घेर लिया है। ऐसे में धावक लिहास त्रिवेदी लोगों में सेहत को लेकर जागृति लाने का सराहनीय प्रयास कर रहे हैं।

लिहास त्रिवेदी ने जनजागृति के लिये अपने 50वें जन्म दिन पर 16 नवंबर शनिवार से 50 घण्टे की दौड़ लगाई, जो 18 नवंबर सोमवार को पूरी हुई। इन 50 घण्टों में उन्होंने लगभग 275 से 300 किलोमीटर की दौड़ लगाई। अहमदाबाद के एक निजी क्लब हाउस में 400 मीटर के ट्रैक पर लिहास ने शनिवार सुबह 6 बजे से दौड़ना शुरू किया था। दौड़ पूरी होने के बाद लिहास का वजन मापा गया तो पाया गया कि उनका वजन 2.75 किलोग्राम कम हो गया। लिहास के अनुसार एक घण्टे की दौड़ से 600 से 700 कैलोरी बर्न होती है। इस हिसाब से 50 घण्टे में उनकी लगभग 30 हजार से अधिक कैलोरी बर्न हुई। दौड़ने से शरीर गर्म होता है और कैलोरी फैट घटता है। लगातार 25 घण्टे में 194 कि.मी. दौड़ कर लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने वाले लिहास त्रिवेदी को उम्मीद है कि अब लगातार 50 घण्टे में लगभग 300 कि.मी. की दौड़ लगाने से उन्हें एक बार फिर लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिलेगा।

कौन हैं लिहास त्रिवेदी ?

1989 में एक हादसे के बाद डॉक्टरों ने जिस व्यक्ति को दौड़ने से मना किया था, उसी व्यक्ति ने दौड़ने में रिकॉर्ड कायम किये हैं। इतना ही नहीं, इस व्यक्ति के जोश और जज्बे को देखिए कि 50 वर्ष की उम्र में भी दौड लगा रहा है और नवयुवाओं को प्रेरित कर रहा है। अहमदाबाद के धावक लिहास त्रिवेदी कॉलेज के समय से ही स्पोर्ट्स में रुचि रखते हैं। उन्होंने पहली बार 2003 में मुंबई में आयोजित हुई मैराथन में भाग लिया था और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। 2012 में उन्होंने लगातार 24 घण्टे दौड़ने का रिकॉर्ड बनाया था। इन 24 घण्टों में वे 184 कि.मी. दौड़े थे।

इसके बाद 2015 में उन्होंने अहमदाबाद में ही ट्रेडमिल पर लगातार 25 घण्टे दौड़ कर अपना ही 24 घण्टे दौड़ने का रिकॉर्ड तोड़ दिया था और लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया था। 2016 में कच्छ के सफेद रेगिस्तान में देश की सबसे मुश्किल कहलाने वाली अल्ट्रा ट्रेल रनिंग रेस ‘रन दी रण’ के चौथे एडीशन में मात्र स्ट्रोंग और फिट लोग ही भाग ले सकते हैं। इस रेस में सीधा-सपाट रास्ता नहीं था, बल्कि धावकों को रेगिस्तान में झाड़ियों के बीच से पथरीले रास्ते पर दौड़ना था। उस रेस में भी 161 किलोमीटर की दौड़ लगाकर लिहास पाँचवें नंबर पर विजेता रहे थे। धावक लिहास त्रिवेदी 2018 में अमेरिका के फ्लोरिडा में तैराकी, दौड़ और साइक्लिंग तीनों प्रकार की प्रतिस्पर्धा ट्रायथलोन में भी भाग ले चुके हैं।

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