जांच रिपोर्ट दाखिल न करने पर भरना होगा 1 लाख का जुरमाना – Himachal Pradesh Government

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Himachal Pradesh Government

नई दिल्ली: देश की खूबसूरती का नज़ारा देखने लोग अकसर राज्ये हिमांचल प्रदेश के शरह शिमला, कुल्लू, मनाली आदि जैसी जगह पर घूमना पसंद करते हैं। लेकिन कुल्लू और मनाली के होटल व उद्योगों की  जांच न करने के कारण राज्ये हिमाचल प्रदेश की सरकार (Himachal Pradesh Government) पर एक लाख का जुरमाना लगा दिया गया है। इस रिपोर्ट को हिमाचल प्रदेश की सरकार के द्वारा रिपोर्ट को चरणबद्ध तरीके से सबमिट करना था निर्धारित समय ख़त्म होने के बाद भी होटल व उद्योगों की जांच रिपोर्ट सबमिट नहीं की गयी थी, जिसकी वजह से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने नाराज़ होकर राज्ये सरकार पर जुरमाना लगा दिया।

ट्रिब्यूनल द्वारा हिमाचल प्रदेश की सरकार (Himachal Pradesh Government) को 28 मार्च 2018 तक की आखरी मोहलत तो दे दी गयी है, लेकिन उन्होंने ने स्पष्ट बयान देते हुए कहा है कि, राज्य सरकार पहले भी कई बार झूठे बाहने बनाकर मोहलत मांगती रही लेकिन पहले चरण की रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को नहीं दी, इसलिए इस बार भी इन पर विश्वास नहीं किया जा सकता। जानकारी के मुताबिक नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 7 दिसंबर 2017 को होटल और उद्योगों की जांच करने का आदेश दिया था। इसके बाद 11 जनवरी 2018 में भी सर्च रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा गया था, जिसके तहत प्रथम सर्च रिपोर्ट 6 मार्च 2018 को सबमिट की जानी थी, लेकिन बार बार कहने के बाद भी सर्च रिपोर्ट दाखिल नहीं की गयी थी, जिसकी वजह से  8, 12 और 19 मार्च 2018 को सुनवाई हुई थी, और 28 मार्च 2018 तक की अंतिम चांस दिया गया। साथ ही अधिवक्ता (advocate) द्वारा सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश बताकर अवैध होटलों और उद्योगों के पंजीकरण को रद्द (ban) करने और बिजली-पानी के कनेक्शन काटने पर गुम्र्हा भी किया गया था, जबकि सर्च करने पर पता चला की सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया था, और मामले पर अब अगली सुनवाई 10 अप्रैल 2018 को होगी।

राज्य सरकार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास एक लाख रूपए जुर्माने की राशी जमा करनी होगी। पीठ द्वारा चेताया (warning) भी दी गयी है, की इस बार गलती होने पर एक लाख की जगह 5 हज़ार रूपये का जुरमाना भरना पड़ेगा।

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