क्या है कमलेश तिवारी की हत्या का रहस्य, निजी रंजिश या माहौल बिगाड़ने का षड़यंत्र ?

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 18 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को हिंदू समाज पार्टी और हिंदू महासभा के नेता कमलेश तिवारी की गला रेत कर दिन दहाड़े उन्हीं के ऑफिस में हत्या कर दी गई। हत्यारे बाइक पर आये थे, जो सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हुए हैं। हालाँकि इस हत्या की खबर फैलने के बाद लखनऊ और पड़ोसी जिलों में तनाव व्याप्त हो गया है। कमलेश तिवारी की हत्या किस कारण से हुई ? इसको लेकर रहस्य गहराया हुआ है। हत्या की मोडस ओपरेंडी को देखते हुए पुलिस निजी रंजिश का अनुमान लगा रही है, वहीं दूसरी ओर घटना स्थल से मिले दो मिठाई के डिब्बे गुजरात के सूरत से खरीदे होने का पता चला है। इस प्रकार कमलेश की हत्या के तार गुजरात के सूरत से भी जुड़ते नज़र आ रहे हैं। यह भी पता चला है कि गुजरात के एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने इस्लामिक स्टेट ऑफ ईराक एंड सीरिया (ISIS) के दो आतंकी पकड़े थे, जिनकी हिटलिस्ट में भी कमलेश तिवारी होने का पूछताछ में खुलासा हुआ था। इसके अलावा कमलेश तिवारी राम जन्मभूमि मंदिर मामले में एक पक्षकार भी रहे हैं और कुछ समय पहले उन्होंने मोहम्मद पैगंबर के बारे में विवादास्पद टिप्पणी की थी, जिसके कारण उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत गिरफ्तार किया गया था। तिवारी के नौकर का कहना है कि उसने तिवारी और आगंतुक मेहमानों के बीच किसी मुस्लिम लड़की और हिंदू लड़के की शादी को लेकर हो रही बातचीत सुनी थी। इसलिये फिलहाल तो पुलिस के लिये किसी भी नतीजे पर पहुँचना आसान नहीं है और इसीलिये उसने कुछ टीमों का गठन करके अलग-अलग दिशाओं में जाँच को आगे बढ़ाया है।

कमलेश तिवारी की हत्या को लेकर रहस्य बरकरार

सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए कमलेश तिवारी के दो संदिग्ध हत्यारे (बाएँ)।

पुलिस के अनुसार कमलेश तिवारी शुक्रवार को लखनऊ के नाका इलाके में खुर्शीद बाग स्थित घर में ही अपने ऑफिस में मौजूद थे, तब बाइक पर दो व्यक्ति उनसे मिलने आये थे, जिन्होंने तिवारी के साथ बातचीत की और तिवारी ने उन्हें दही बड़े खिलाने के बाद उनके साथ चाय भी पी थी। उन्होंने भगवा कपड़े पहने हुए थे। इससे जाहिर होता है कि आने वाले व्यक्ति कमलेश तिवारी के परिचित हो सकते हैं। हालाँकि चाय पीने के बाद आगंतुकों में से एक ने मिठाई के डिब्बे में से निकाले कट्टे से उन पर गोली चलाई, जो कमलेश तिवारी को लगी नहीं, परंतु कमलेश तिवारी ज़मीन पर गिर गये। इसके बाद उसके दूसरे साथी ने दूसरे मिठाई के डिब्बे से चाकू निकाल कर उन पर हमला कर दिया और उनका गला रेतने के बाद शरीर पर भी कई वार किये। इसके बाद दोनों हमलावर बाइक पर फरार हो गये। हमले को अंजाम देने से पहले हमलावरों ने तिवारी के नौकर को सिगरेट लेने के लिये बाहर भेज दिया था। तिवारी की सुरक्षा के लिये एक सिपाही भी तैनात किया गया था, परंतु हमले के दिन वह मौजूद नहीं था। इसको लेकर भी शंका पैदा हो रही है, हालाँकि पुलिस का कहना है कि वह इसका पता लगा रही है। कमलेश तिवारी की हत्या के बाद अब उनके बारे में एक के बाद नई जानकारी उभर कर सामने आ रही है, जिससे यह अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है कि आखिरकार उनकी हत्या की वज़ह क्या हो सकती है ? पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे में कैद हमलावरों की तस्वीरों के आधार पर उनकी तलाश शुरू की है। इसके अलावा पुलिस को यह भी पता चला है कि हमलावरों ने तिवारी से मिलने से पहले उन्हें कॉल किया था। इसलिये पुलिस इस कॉल के माध्यम से भी आरोपियों का पता लगाने का प्रयास कर रही है। साथ ही मिठाई के डिब्बे गुजरात के सूरत से 16 अक्टूबर को खरीदे जाने का भी पता चला है। इसके आधार पर भी जाँच आगे बढ़ाई गई है। इस बीच पुलिस ने तिवारी के नौकर स्वराष्ट्रजीत सिंह से पूछताछ की है, जिसमें यह जानकारी सामने आई है कि जब वह मेहमानों को चाय देने आया था तब उसने तिवारी और हत्यारों के बीच हो रही बातचीत के कुछ अंश सुने थे, जिसमें वे किसी मुस्लिम लड़की और हिंदू लड़के की शादी को लेकर चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान आरोपियों ने स्वराष्ट्रजीत सिंह को सिगरेट लेने के लिये बाहर भेज दिया था और वह लौटकर आता उससे पहले ही वे घटना को अंजाम देकर फरार हो गये।

ISIS की हिटलिस्ट में थे कमलेश तिवारी ?

सूरत से गुजरात एटीएस द्वारा पकड़े गये आईएसआईएस के दो संदिग्ध आरोपी

जाँच के दौरान एक बड़ा खुलासा हुआ है कि कमलेश तिवारी ने 2017 में हिंदू समाज पार्टी की स्थापना की थी। इससे पहले वे हिंदू महासभा के नेता थे। 2017 में ही गुजरात एटीएस ने आईएसआईएस के दो आतंकियों उबैद मिर्ज़ा और कासिम को गिरफ्तार किया था, जिनसे की गई पूछताछ में खुलासा हुआ था कि उनकी हिटलिस्ट में भी तिवारी का नाम शामिल था। गुजरात एटीएस ने दोनों आतंकियों के खिलाफ कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट में भी इस बात का उल्लेख किया है। एटीएस की ओर से सेंट्रल एजेंसी को भी जानकारी दी गई थी और सेंट्रल एजेंसी ने भी आतंकियों से पूछताछ की थी, जिसमें दोनों ने बताया था कि उनके हैंडलर ने एक वीडियो दिखाते हुए कमलेश तिवारी को मारने के लिये कहा था। एटीएस के पास तिवारी से जुड़े आतंकियों की चैटिंग के भी सबूत मौजूद हैं। इसलिये पुलिस आतंकी कनेक्शन की भी जाँच कर रही है।

कमलेश तिवारी ने मोहम्मद पैगंबर पर की थी टिप्पणी

इसके अलावा कमलेश तिवारी ने दिसंबर 2015 में मोहम्मद पैगम्बर से जुड़ी विवादास्पद टिप्पणी की थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और उन पर रासुका (NSA) लगाया गया था। दरअसल उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मंत्री आज़म खान ने आरएसएस के एक मेंबर्स को होमोसेक्सुअल कहा था, जिसके बाद हिंदू महासभा के तत्कालीन नेता कमलेश तिवारी ने मोहम्मद पैगंबर को लेकर टिप्पणी की थी। इससे उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में भी हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आये थे और हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया था। माहौल बिगड़ता देख तत्कालीन यूपी सरकार (अखिलेश यादव) ने उनके खिलाफ कार्यवाही करने का आदेश दिया था। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले ही 2017 में उन्होंने हिंदू समाज पार्टी की स्थापना की थी। हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उनके विरुद्ध रासुका को रद्द कर दिया था। इस टिप्पणी को लेकर हत्या में किसी कट्टरपंथी के हाथ होने की संभावना को भी पुलिस टटोल रही है।

राम जन्मभूमि मामले में पक्षकार थे कमलेश तिवारी

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर और बाबरी मस्ज़िद से जुड़ी विवादित ज़मीन को लेकर सुनवाई पूरी हुई है। कमलेश तिवारी भी राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट में कुछ दिन तक हिंदू महासभा की ओर से पक्षकार रहे थे।

गोडसे का मंदिर बनाने की तिवारी ने की थी घोषणा

इसके साथ ही यह भी बताया जाता है कि कमलेश तिवारी ने सीतापुर में अपनी पैतृक ज़मीन पर गोडसे का मंदिर बनवाने का भी ऐलान किया था। इस प्रकार कमलेश तिवारी अपने कार्यों और बयानों को लेकर चर्चा में रहते थे। इनमें से उनका कौन सा काम या कौन सा बयान उनकी हत्या का कारण बना, यह रहस्योद्घाटन करना पुलिस के लिये आसान नहीं है।

कमलेश तिवारी के हत्यारों को जल्द पकड़ने की माँग

इस बीच लखीमपुर में विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय मीडिया प्रमुख आचार्य संजय मिश्रा ने सरकार से तिवारी के परिजनों को 5 करोड़ रुपये बतौर मुआवजा देने की माँग की। साथ ही हिंदूवादी नेताओं को सुरक्षा देने की भी माँग की। मिश्रा ने कमलेश तिवारी के हत्यारों को जल्द से जल्द पकड़ने और फाँसी की सजा दिलवाने की भी माँग की।

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