आज दिल से कहिए ‘HAPPY NEW YEAR’ : 31 दिसम्बर की रात जश्न मनाने वाले अवश्य पढ़ें गौरव से भर देने वाली यह खबर

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दुनिया और दौर के साथ कदम मिला कर चलना ग़लत बात नहीं है, परंतु अंधानुकरण अनुचित है। यह खबर उन भारतवंशियों के लिए है, जो 31 दिसम्बर की रात 12.00 बजे ग्रैगोरियन कैलेण्डर के अनुसार आरंभ होने वाले नव वर्ष का जश्न मनाते हैं। 31 दिसम्बर की रात 12 बजे हम पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण के वश होकर केवल दिखावे के लिए एक-दूसरे को हैप्पी न्यू इयर कहते हैं, परंतु यदि दिल से नए वर्ष की किसी को शुभकामनाएँ देनी हैं, तो आपके लिए आज का दिन सर्वश्रेष्ठ है, क्योंकि हिन्दुओं का नया वर्ष आज से ही आरंभ हो रहा है। इसी दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में गुडी पडवा, उगादी आदि के नाम से नव वर्ष मनाया जाता है।

ग्रैगोरियन कैलेण्डर यानी ईस्वी सन् का आरंभ हुए, तो अभी 2 हजार 19 वर्ष 3 महीने और 7 दिन ही हुए हैं, परंतु हमारा अपना कैलेण्डर यानी विक्रम संवत् का आरंभ ग्रैगोरियन कैलेण्डर से 57 वर्ष पहले यानी 2 हजार 67 वर्ष पहले आरंभ हो गया था।

विक्रम संवत् के अनुसार आज प्रत्येक भारतवंशी का नूतन वर्ष आरंभ हुआ है। विक्रम संवत यानी हिन्दू नव वर्ष का आरंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी आज 6 अप्रैल से आरंभ हुआ है। इसीलिए सभी भारतवंशियों को हम भी हृदयपूर्वक कहते हैं, ‘हैप्पी न्यू इयर, नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।’

कैसे आरंभ हुआ विक्रम संवत् ?

मान्यता के अनुसार महान महाराजा विक्रमादित्य ने जिस दिन शक क्षत्रपों को परास्त किया, उसी दिन से उन्होंने विक्रम संवत् का प्रारंभ किया और वह दिन था चैत्र माह का पहला दिन यानी चैत्र प्रतिपदा। इसके बाद उन्होंने एक कैलेण्डर जारी किया, जिसे हम विक्रम संवत् के रूप में जानते हैं और इस कैलेण्डर में वर्ष का प्रथम महीना चैत्र था। इसीलिए चैत्र प्रतिपदा से नव वर्ष शुरू होता है और इस कैलेण्डर के आज से 2076 वर्ष पूरे हो गए। राजा विक्रमादित्य ने शक क्षत्रपों को परास्त करने के बाद अपने राज्य का विस्तार किया और जनता के सभी प्रकार के ऋणों को क्षमा करने की घोषणा की।

क्या है मान्यता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ?

हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र माह से हिन्दू नववर्ष का आरंभ होता है। कहते हैं कि इसी दिन आदिशक्ति देवी दुर्गा प्रकट हुई थीं और उनके कहने पर ही ब्रह्मा ने इस सृष्टि की रचना की थी। इसलिए चैत्र मास के प्रथम दिवस को हिन्दू नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है। एक मान्यता यह भी है कि भारत के महान गणितज्ञ भास्कराचार्य ने चैत्र महीने के आरंभ से पूरे वर्ष तक सूर्योदय और सूर्यास्त तक की काल गणना कर उसे पंचांग का स्वरूप दिया। भारतीय ग्रंथों के अनुसार भगवान ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण इसी दिन किया था, तो भगवान विष्णु का सनकादि मुनियों के रूप में प्रथम अवतार भी इसी दिन हुआ था। धर्म ग्रंथों के अनुसार सृष्टि के आरंभ में पितामह ब्रह्मा ने अनेक लोगों की रचना करने की इच्छा से घोर तपस्या की। उनके तप से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने तप अर्थ वाले सन नाम से युक्त होकर सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार नाम के चार मुनियों के रूप में अवतार लिया। ये चारों प्राकट्य काल से ही मोक्ष मार्ग परायण, ध्यान में तल्लीन रहने वाले, नित्यसिद्ध और नित्य विरक्त थे। ये चारों मुनि भगवान विष्णु के प्रथम अवतार माने जाते हैं। इसलिए चैत्र नवरात्रि का आरंभ इसी दिन से होता है। चैत्र में ही नव वर्ष मनाए जाने के पीछे वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है, क्योंकि इस समय न ही अधिक सर्दी होती है और न ही अधिक गर्मी। सूर्य की चमकती किरणों और शुद्ध मध्यम गति की हवाओं से पूरा वातावरण आह्लादक लगता है।

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