VIDEO : पुलिस वाले इंसान नहीं होते ? सलाम है इन युवकों को, जो फ़रिश्तों की तरह ढाल बने

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 20 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। अक्सर हम पुलिस की बर्बरता की ख़बरें पढ़ते हैं, परंतु इन दिनों पूरे देश में नागरिक संशोधन अधिनियम (CAA) की विरुद्ध हो रहे प्रदर्शनों में जिस प्रकार पुलिस को निशाना बनाया जा रहा है, उसे देख कर सहज ही यह प्रश्न उठता है कि क्या पुलिस की वर्दी के पीछे इंसान नहीं होता ? आख़िर अपराध रोकने वाले इन पुलिस वालों का अपराध क्या है ? क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने की ज़िम्मेदारी संभाल रहे पुलिस वालों के साथ अमानवीय व्यवहार कितना उचित है ?

गुजरात की आर्थिक राजधानी अहमदाबाद में गुरुवार को जिस प्रकार पुलिस पर पत्थर बरसाए गए, उसके दृश्य देख कर रूह काँप जाती है। सीएए का विरोध अपनी जगह है, परंतु पुलिस को बाक़ायदा घेर कर उन पर पत्थर बरसाने वालों के ज़मीर के बारे क्या कहा जाए ? क्या पत्थर बरसाने वाले भारतीय नहीं थे ? यदि थे, तो जिन पर वे पत्थर बरसा रहे थे, वे भारतीय नहीं थे ? जब दोनों ही भारतीय थे, तो इस क़दर उन्हें घेर कर एक रची-रचाई साज़िश के तहत पत्थर बरसाना क्या पुलिस के मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं है ?

हम सभी जानते हैं कि पुलिस वालों की ड्यूटी कितनी काँटों भरी होती है। कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के दुराचार के कारण बदनाम पुलिस महकमे में सभी पुलिस वाले बुरे तो नहीं हो सकते। गुरुवार को अहमदाबाद के शाहआलम क्षेत्र में सीएए के विरोध के नाम पर जमा भीड़ ने जिस तरह पुलिस को निशाना बनाया, उसमें षड्यंत्र की बू आती है। शाहआलम अहमदाबाद का न केवल संवेदनशील क्षेत्र है, अपितु सँकरी गलियों वाला भी क्षेत्र है। ऐसे में पुलिस के लिए भीड़ को नियंत्रित करना आसान नहीं था, क्योंकि दंगाइयों ने पूर्व नियोजित षड्यंत्र के तहत इतने सारे पत्थर पहले से ही इकट्ठा कर रखे थे कि पुलिस एक बल होने के बावज़ूद असहाय महसूस करने लगी।

जब 7 युवक फ़रिश्तों की तरह पुलिस की ढाल बन गए

सोशल मीडिया पर शाहआलम क्षेत्र में पुलिस पर हुए पथराव का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कुछ पुलिस कर्मचारी बुरी तरह भीड़ में फँस गए हैं। कुछ ही फीट की दूरी से भीड़ उन पर इस तरह पत्थर बरसा रही है जैसे वे पुलिस वाले नहीं, बल्कि कोई सजायाफ़्ता मुज़रिम हों, जानवर हों। अरे, जानवरों पर भी कोई इस तरह पत्थर नहीं बरसाता, परंतु इस वीडियो में आप स्वयं देख कर अनुमान लगा सकते हैं कि भीड़ पर किस तरह का अकारण ज़ुनून सवार है और वह बिल्कुल नज़दीक से पुलिस पर पत्थर बरसा रही है। यद्यपि इसी दौरान एक स्थानीय युवक इन पुलिस वालों के आगे ढाल बन कर खड़ा हो जाता है। इसके बाद छह और युवक भी कूद पड़ते हैं और भीड़ की पत्थरबाज़ी से इन पुलिस वालों की जान बचाते हैं। ऐसे युवकों को सलाम करने का मन करता है।

आप भी देखिए पुलिस के लिए फ़रिश्ते बने इन युवकों का वीडियो :

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