कौन था वह महाशय, जिसके कारण अमेरिका बन गया दुनिया का ‘अंकल सैम’ ?

Written by

आलेख : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 7 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। हमारे देश और हमारी भाषा में तो माँ के भाई के लिए मामा, माँ के बहनोई के लिए मौसा, पिता के छोटे भाई के लिए काका व बड़े भाई के लिए ताऊ जैसे अलग-अलग शब्द हैं, परंतु पश्चिमी संस्कृति विशेषकर अंग्रेजी भाषा में इन सभी संबंधों को एकमात्र ‘अंकल’ के नाम से पुकारा जाता है। यद्यपि आज हम आपसे भारतीय और पश्चिमी संस्कृति के अंतर के बारे में चर्चा करने नहीं जा रहे। आज हम आपका एक ऐसे अंकल से परिचय कराने जा रहे हैं, जो 207 वर्षों से पूरी दुनिया का अंकल कहलाता है और उसका नाम है UNCLE SAM। यह अंकल सैम किसी का रिश्तेदार नहीं, अपितु एक समृद्ध और विकसित देश है।

चलिए अब अधिक रहस्य न बनाते हुए आपको बता ही देते हैं कि कौन हैं ये अंकल सैम ? अंकल सैम जिसका नाम है, वह दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका है। हालाँकि अमेरिका भी एक ज़माने में ब्रिटिश साम्राज्य का ग़ुलाम था, परंतु 243 वर्ष पहले जब 4 जुलाई 1776 को अमेरिका ग्रेट ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ, तबसे उसकी एक शक्तिशाली देश के रूप में उभरने की यात्रा शुरू हुई और सफल भी हुई। वैसे हम अमेरिका के स्वतंत्रता इतिहास पर न जाते हुए मूल मुद्दे पर आते हैं और यह मूल मुद्दा यह है कि अमेरिका कैसे दुनिया के लिए अंकल सैम बन गया ? हम उसके इस नाम से जुड़े एक ऐसी सच्चाई को उजागर करने जा रहे हैं, जिससे कदाचित आप अब तक आप अनभिज्ञ होंगे। वैसे अमेरिका को युनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका, USA और US नाम से भी जाना जाता है, परंतु क्या आप जानते हैं कि अमेरिका का निक नेम हैं ? यदि नहीं जानते, तो हम बता देते हैं कि अमेरिका का निक नेम ‘अंकल सैम’ है। 207 वर्ष पूर्व 7 सितंबर, 1813 ही वह दिन था, जब पहली बार अमेरिका को अंकल सैम नाम से संबोधित किया गया। अब आप सोच रहे होंगे कि अमेरिका का नाम अंकल सैम किसने और क्यों रखा गया ? तो हम बताते हैं आपको कि अमेरिका का निक नेम यानी अंकल सैम कैसे-क्यों पड़ा और किसने रखा रखा यह नाम ?

अमेरिका के निक नेम अंकलम सैम के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। दरअसल द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब वर्ष 1812 में अमेरिका और ब्रिटेन के बीच युद्ध शुरू हुआ, तब एक अमेरिकी व्यक्ति था, जो अमेरिकी सैनिकों को खाना पहुँचाया करता था। अमेरिकी सैनिक उस व्यक्ति तंग करने के लिए और हँसी मजाक के तौर पर छेड़ा करते थे। जानते हैं उस व्यक्ति का नाम क्या था ? उसका नाम सैम्युल विल्सन। सैम्युल विल्सन ही वह व्यक्ति था, जो न्यूयॉर्क के ट्रॉल शहर से मीट के पैकेट लाकर युद्धरत् अमेरिकी सैनिकों को देता था। विल्सन के सभी मीट पैकेट पर US लिखा होता था। देखते ही देखते सैम्युल विल्सन अमेरिकी सैनिकों के बीच इतने घुल-मिल गए कि अमेरिकी सैनिक सैम्युल विल्सन के साथ मज़ाक-मस्ती करने लगे। इतना ही नहीं, अमेरिकी सैनिकों ने विल्सन द्वारा लाए जाने वाले मीट पैकेट पर लिखे US का फुलफॉर्म UNCLE SAM कर दिया और सैम्युल विल्सन को ही अंकल सैम कह कर बुलाने लगे। इस बात की जानकरी जब एक स्थानीय समाचार पत्र को हुई, तो उसने अमेरिकी सैनिकों के इस अंकल सैम यानी सैम्युल विल्सन के बारे में एक लेख प्रकाशित किया। अख़बार में सेम्युल विल्सन की सेवा और उनके मीट पैकेट पर लिखे US को आधार बना कर अमेरिकी सैनिकों द्वारा सैम्युअल विल्सन को अंकल सैम कह कर बुलाने संबंधी लेख प्रकाशित हुआ, तो सैम्युल विल्सन अब पूरे अमेरिका में अंकल सैम के रूप में प्रसिद्ध हो गए। इसके बाद तो हर अमेरिकी नागरिक को सैम्युल विल्सन के मीट पैकेट पर छपे US का फुल फॉर्म UNCLE SAM भा गया और वे अपने देश यूएस को ही अंकल सैम कहने लगे। अपनी वैश्विक शक्तिशाली प्रतिष्ठा को देखते हुए अमेरिकी सरकार को भी अंकल सैम नाम अत्यंत रास आया और उसके बाद अमेरिकी सरकार अंकल सैम को अपना राष्ट्रीय प्रतीक बना लिया।

अंकल सैम की लोकप्रियता दिन प्रति दिन बढ़ती गई। मशहूर कार्टूनिस्ट थॉमस नैस्ट ने 1870 में अंकल सैम का एक पोस्टर बनाया, जिसमें अंकल सैम सफ़ेद दाढ़ी और स्टाईलिस्ट कपड़े पहने हुए थे। इस पोस्टर ने अंकल सैम की लोकप्रियता और बढ़ा दी। इसके बाद पोस्टरों का सिलसिला शुरू हो गया। आर्टिस्ट जेम्स मोंटोगोम्री फ्लाग द्वारा 1917 को अंकल सैम का बनाया गया पोस्टर सबसे ज्यादा प्रचलित हुआ। इस पोस्टर में अंकल सैम ने नीले रंग की टोपी और एक लंबा कोर्ट पहना हुआ था। इस पोस्टर की सबसे बड़ी और ख़ास बात उस पर लिखी यह पंक्ति थी, ‘आई वांट यू फॉर यूएस आर्मी।’ यह पंक्ति युद्ध में अधिक से अधिक सैनिकों को भर्ती होने के लिए प्रेरित करती थी। अंकल सैम की बढ़ती लोकप्रिया को देखते हुए सितंबर 1916 में अमेरिकी कांग्रेस ने ‘अंकल सैम’ को अमेरिका का राष्‍ट्रीय प्रतीक घोषित किया। तब से लेकर आज तक दुनिया अमेरिका को अंकल सैम के नाम से जानती है।

Article Categories:
News

Comments are closed.

Shares