अहो आश्चर्यम् : धरती में 3 फीट नीचे मटकी में जीवित मिली बालिका, भाजपा विधायक लेंगे गोद

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 15 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। उत्तर प्रदेश के बरेली में धरती में लगभग 3 फीट नीचे मटके में दबी जीवित नवजात बालिका बरामद हुई है, जो लगभग 48 घण्टे तक ज़मीन के नीचे दबी रहने के बावजूद जीवित बच गई है। इसे डॉक्टर समेत सभी लोग चमत्कारिक घटना के रूप में देख रहे हैं। स्थानीय भाजपा विधायक राजेश मिश्रा ने इस बच्ची के बारे में खबर मिलने के बाद तुरंत उसके इलाज का खर्च वहन करने की घोषणा की। इसके बाद उसे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ बच्ची उपचाराधीन है और डॉक्टरों ने उसके जीवित बच जाने की उम्मीद जताई है।

एक बेटी की मृत्यु, दफनाने गये पिता को जीवित मिली दूसरी बच्ची

दरअसल बरेली के सीबीगंज इलाके में रहने वाले हितेश कुमार की नवजात बच्ची की मृत्यु हो गई। इसलिये वे उसे दफनाने के लिये श्मशान गये थे। वहाँ बच्ची को दफनाने के लिये खुदाई शुरू की तो जमीन के अंदर से बच्ची के रोने की आवाज़ सुनाई दी। इस पर लगभग 3 फीट खुदाई करने पर उन्हें एक मटकी में जीवित बच्ची प्राप्त हुई। उसे तुरंत सरकारी अस्पताल ले जाया गया। जब बिथरी इलाके के विधायक राजेश मिश्रा को इस बारे में पता चला तो वे फौरन जिला अस्पताल पहुँच गये और उससे बच्ची की हालत के बारे में पूछा। इसके बाद उन्होंने तुरंत बच्ची के उपचार का खर्च वहन करने की घोषणा की और उसे निजी अस्पताल में शिफ्ट कराया। अब प्राइवेट अस्पताल में इस बच्ची का इलाज हो रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। उसकी हालत अभी भी नाजुक है, परंतु डॉक्टरों को उम्मीद है कि वे उसे बचाने में कामयाब हो जाएँगे। इस बीच डॉक्टर समेत हर कोई इस बात को लेकर हैरान हैं कि लगभग 48 घण्टे तक ज़मीन के नीचे एक मटके में बंद हालत में दफन होने के बावजूद ये बच्ची आखिर जीवित कैसे बच गई। इतने लंबे समय तक वह कैसे साँस ले पाई होगी। डॉक्टर भी बच्ची की जीवित रहने की क्षमता से आश्चर्यचकित हैं। बच्ची का उपचार करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची 48 घण्टे से भी अधिक समय तक जीवित रहने के लिये संघर्ष करती रही, जिसके कारण उसके शरीर का ब्राउन फैट जल गया है। ब्राउन फैट या ब्राउन एडिपोज़ टिश्यू शरीर में फैटी एसिड और ग्लूकोज़ को जला कर शिशु को अधिक ठंडी स्थिति में भी जीवित रहने में मदद करता है। ज़मीन में दबी मिली बच्ची प्रीमैच्योर बेबी है, जिसकी गर्भनाल पहले ही गिर चुकी है। उसका प्लेटलेट काउण्ट नॉर्मल रेंज 1.5 लाख से गिर कर मात्र 10,000 रह गया है। फिर भी बच्ची के जीवित रहने के संकेत दिखते हैं। डॉक्टर्स बच्ची का नॉर्मल बॉडी टेंपरेचर मेंटेन करने का प्रयास कर रहे हैं, जो कि फैट की अनुपस्थिति में काफी गिर गया है। बच्ची ट्रीटमेंट पर रिस्पॉन्स कर रही है और इंप्रूवमेंट के साइन भी मिल रहे हैं। अब डॉक्टर उसे ट्यूब के माध्यम से खाना दे रहे हैं। बच्ची की बॉडी प्रीमैच्योर बेबी फॉर्मूले से काम कर रही है, जब तक उसके खून से इंफेक्शन दूर नहीं हो जाता, उसे एंटी बायोटिक्स और इंटेंसिव केयर दिया जाएगा।

भाजपा विधायक ने की प्रेरणादायी पहल

भाजपा विधायक राजेश मिश्रा ने बच्ची के बारे में सूचना मिलने पर तुरंत जिला अस्पताल जाकर बच्ची की हालत के बारे में डॉक्टरों से जानकारी प्राप्त की थी और उसके इलाज का खर्च उठाने की घोषणा करके उसका इलाज निजी अस्पताल में कराने का ऑफर दिया था। हालाँकि चीफ मेडिकल सुप्रिटेंडेंट (CMS) और चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी के सदस्यों की अनुमति मिलने के बाद ही बच्ची को प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया था। सीडब्ल्यूसी के एक सदस्य डॉ. डी. एन. शर्मा के अनुसार विधायक की ओर से बहुत अच्छी और प्रेरणादायी पहल की गई। वे बच्ची का जीवन बचाने में मदद कर रहे हैं। बच्ची को गोद लेने पर विचार तब किया जाएगा जब वह पूरी तरह से ठीक हो जाएगी और उसके लिये उपयुक्त गाइडलाइंस ध्यान में लिये जाएँगे।

पुलिस पर बच्ची के आरोपी माता-पिता को पकड़ने का दबाव

दूसरी तरफ बरेली में यह मामला टॉक ऑफ दी टाउन बन गया है और पुलिस पर बच्ची के अपराधी माता-पिता को ढूँढ निकालने और उन्हें कड़ी सजा दिलवाने का दबाव आ गया है। ऐसे में बरेली के एसएसपी शैलेष पांडेय ने कहा कि पुलिस ने बच्ची के अज्ञात पेरेंट्स के विरुद्ध धारा 317ए और धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया है और आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। इस घटना में दो अलग-अलग पहलू प्रकट रूप से सामने आये हैं। एक तरफ भाजपा विधायक की सराहनीय पहल की चहुँओर प्रशंसा हो रही है, वहीं दूसरी ओर 21वीं सदी में भी नवजात बच्ची को जीवित दफना देने वाले निष्ठुर और क्रूर माता-पिता को समाज धिक्कार रहा है।

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