शहला की ‘शैतानी’ : सेना पर आरोपों के सबूत मांगने पर दुम दबाके भागीं…

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 22 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। पीएम नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोलने वाले राजनीतिक दल चुनाव परिणामों के बाद ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ में परिवर्तित हो गये। इसी टुकड़ा गैंग की एक नई-नई सदस्य बनी कश्मीरी महिला शहला राशिद आजकल राजनीति की ड्रामा क्वीन (DRAMA QWEEN) की भूमिका अदा कर रही हैं। इतना ही नहीं, यह कश्मीरी महिला इन दिनों पाकिस्तान की भाषा बोलने वाली कश्मीरी नेता महबूबा मुफ्ती की जुबान भी बोल रही हैं। राजनीति में अभी-अभी दाखिला लेने वाली शहला राशिद चर्चा में रहने के लिये कुछ भी कहने और करने से पीछे नहीं हैं। पिछले रविवार को उन्होंने एक के बाद एक 10 ट्वीट करके जम्मू कश्मीर में भारतीय सेना पर आम लोगों के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाये, जिन्हें सेना ने ही फर्जी करार दे दिया। गुरुवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर टुकड़े गैंग के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई शहला से जब मीडिया ने उनके द्वारा लगाए गये आरोपों पर जवाब मांगा तो वह वहाँ से भाग खड़ी हुईं। इतना ही नहीं, जाते-जाते भी वह पब्लिसिटी स्टंट कर गईं। उन्होंने कहा कि जब भारतीय सेना उनके विरुद्ध जाँच करेगी, तब वह सेना को ही सबूत देंगी। वैसे शहला राशिद की राजनीति में क्या हैसियत है, इसका पता इसी टुकड़े गैंग की हिस्सा रही समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव के बयान से चल गया। यादव ने शहला राशिद के बारे में पूछे जाने पर कहा कि वह नहीं जानते शहला राशिद कौन है ?

कौन हैं शहला राशिद ?

शहला राशिद ने दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है और 2015-16 के दौरान वह जेएनयू छात्र संघ की उपाध्यक्ष भी रही है। जेएनयू यूनिवर्सिटी में भारत विरोधी झंडे लहराये जाते रहे हैं, देश विरोधी तथा सरकार विरोधी प्रदर्शन और नारे लगाये जाते रहे हैं और कन्हैया कुमार भी इसी यूनिवर्सिटी का छात्र रहा है, जिस पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है। अब शहला राशिद के विरुद्ध भी सुप्रीम कोर्ट के एक वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने दो दिन पहले दिल्ली के पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक को पत्र लिखकर शहला राशिद के विरुद्ध जम्मू कश्मीर और सेना को लेकर फेक न्यूज फैलाने के आरोप में तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। श्रीवास्तव ने अपने पत्र में लिखा कि शहला अपने ट्वीट्स से हिंसा और वैमनस्य फैलाने तथा भारतीय सेना की छवि बिगाड़ने के इरादे से झूठा दुष्प्रचार कर रही हैं। पुलिस ने भी शहला के विरुद्ध शिकायत मिलने की पुष्टि की है और कहा है कि उनके खिलाफ कोई कार्यवाही करने से पहले पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

जंतर मंतर से क्यों भागीं शहला राशिद ?

जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाये जाने के विरुद्ध मोदी विरोधी मोर्चे के टुकड़े गैंग की ओर से गुरुवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में कई विपक्षी पार्टियों के नेता उपस्थित रहे। चूँकि शहला राशिद ने भी 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सेवा निवृत्त आईएएस अधिकारी शाह फैसल द्वारा गठित जम्मू कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (JKPM) राजनीतिक दल की नेता हैं, इसलिये वह भी इस टुकड़े गैंग की हिस्सा बनीं। कश्मीर के मुख्यालय श्रीनगर से ताल्लुक रखने वाली शहला राशिद भी मोदी सरकार की विरोधी हैं और जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री तथा पीपुल्स डैमोक्रैटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की ही जुबान बोलती हैं। राजनीति में नई-नई दाखिल हुई शहला राशिद सुर्खियों में रहने के लिये कुछ भी करती हैं और कुछ भी बोलती हैं। उन्हें राजनीति की नई ड्रामा क्वीन (DRAMA QWEEN) कहा जाता है। जो कि उनके ट्वीट्स से सिद्ध होता है। अपने विवादास्पद ट्वीट्स से सुर्खियाँ बटोरने के बाद वह सुर्खियों में आने के लिये ही जंतर-मंतर पर भी आईं। यहाँ जब मीडिया ने उनके द्वारा किये गये ट्वीट्स पर उनसे सबूत माँगा कि वह जम्मू कश्मीर में भारतीय सेना की ओर से की गई तथाकथित बदसलूकी के प्रमाण दें, तो वह पलट गईं और कहा कि जब सेना उनके विरुद्ध जाँच करेगी, तब वह सेना को सबूत देंगी। इसके बाद वह मीडिया के सवालों का जवाब टालने के लिये वहाँ से निकल गईं।

‘मैं नहीं जानता कौन हैं शहला राशिद’

जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिये एकत्र हुए विपक्षी दलों में समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव भी मंच पर मौजूद थे और शहला राशिद मंच पर ठीक उनके पीछे बैठी थी। जब रामगोपाल यादव से शहला राशिद के बारे में सवाल पूछा गया तो अपने विवादित बयानों के लिये चर्चा में रहने वाले यादव ने कहा कि, ‘मैं उन्हें नहीं जानता, वो कौन हैं ?’ यादव ने यह भी कहा कि वो कोई जवाहरलाल नेहरू नहीं हैं, इसलिये मैं उनके बयान पर कोई भी जवाब नहीं दूँगा। यादव का यह बयान काफी है यह दर्शाने के लिये कि शहला राशिद का स्थान क्या है ? और राजनीति में अभी तक उनकी ठीक से पहचान भी नहीं बनी है। ऐसे में भला क्यों उनके बयानों को कोई तूल देगा ?

सेना के बाद IAS महिला अफसर ने भी लगाई फटकार

भारतीय सेना तो शहला राशिद के ट्वीट्स पर पहले ही स्पष्टता कर चुकी है कि ट्वीट्स में किये गये दावे फर्जी हैं। अब जम्मू कश्मीर की सूचना जनसंपर्क विभाग की निदेशक आईएएस (IAS) सईद सेहरिश असगर का भी बयान आ गया है। उन्होंने भी स्पष्ट शब्दों में कहा है कि घाटी में कानून-व्यवस्था से जुड़ी कोई भी घटना घटित नहीं हुई है। घाटी में जन-जीवन सामान्य हो रहा है, जिसमें जनता भी सहयोग दे रही है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की ओर से रविवार को अफवाह फैलाई गई थी, जिसके बाद सरकार ने लोगों से अनुरोध किया कि वह इस तरह की किसी भी अफवाह पर यकीन न करें। उन्होंने कहा कि कश्मीर में हालात सामान्य हो रहे हैं। सरकारी दफ्तरों में काम होने लगा है। बंद पड़े शैक्षणिक संस्थान भी खुलने शुरू हो गये हैं। टेलीफोन सेवा को भी चरणबद्ध ढंग से बहाल किया जा रहा है।

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