यहाँ जानिए कैसे यह आम लड़की सबके लिए बन गई नज़ीर ?

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 2 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। ‘मंज़िल उन्हें मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।’ एक शायर की यह पंक्तियाँ उन लोगों के लिये नज़ीर हैं, जो हार माने बिना अपने लक्ष्य को पाकर ही दम लेते हैं। ऐसा ही किया है हरियाणा की अपराजिता ने। यह सामान्य लड़की अब ऐसे सामान्य युवाओं के लिये एक नज़ीर बनकर उभरी है, जो अपने जीवन में कुछ कर गुज़रना चाहते हैं।

कौन है अपराजिता और कैसे बनी नज़ीर ?

अपराजिता एक 25 साल की सामान्य लड़की है। हरियाणा के रोहतक में अपने ननिहाल में पली-बढ़ी अपराजिता भी एक सामान्य परिवार से है। इतना ही नहीं, वह शरीर से कमजोर दुबली-पतली लड़की है और स्कूल के दिनों में पढ़ाई में भी सामान्य ही थी। उसकी राइटिंग (लेखनी) इतनी खराब थी, कि शिक्षक उसकी राइटिंग देखकर ही उसके मार्क्स काट लेते थे या फिर मार्क्स देने से ही इनकार कर देते थे और कहते थे कि कुछ भी पढ़ने में नहीं आता है। एक बार नन्हीं अपराजिता अपने नाना के साथ जा रही थी तब उसने एक आईएएस (IAS) अफसर की गाड़ी गुज़रने पर नाना से पूछा कि यह कौन है ? तब नाना ने कहा कि ‘यह बहुत बड़े अफसर हैं और लोगों की समस्याएँ सुनकर उन्हें हल करते हैं।’ बस, तभी से अपराजिता ने ठान लिया कि उसे भी बड़ी होकर आईएएस अफसर ही बनना है। इसके बाद उसने सबसे पहले अपनी हैंड राइटिंग पर ध्यान दिया और उसे सुधारने में जुट गई। ‘जैसा नाम, वैसा काम।’ अपराजिता ने कभी भी किसी भी मामले में कभी हार नहीं मानी। अथक प्रयासों के परिणाम स्वरूप न सिर्फ हैंड राइटिंग सुधर गई, बल्कि सुंदर हो गई।

पहले बनी MBBS डॉक्टर, फिर शुरू की UPSC की तैयारी !

स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद सबसे पहले अपराजिता सिनसिनवार ने पोस्ट ग्रेज्युएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (PGIMS) से डॉक्टरी की परीक्षा दी और एमबीबीएस डॉक्टर बनी। डॉक्टर बनने के बाद उसने अपनी ड्यूटी और यूनियन पब्लिक सिलेक्शन कमीशन (UPSC) की परीक्षा की पढ़ाई और तैयारी जारी रखी। इस बीच उसे चिकनगुनिया हो गया। उससे उभरी तो फ्रेक्चर हो गया, परंतु अपराजिता ने हौसले बुलंद रखे और 2017 में यूपीएससी की परीक्षा दी, हालाँकि पहली बार में सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद अपराजिता ने अपने हौसलों को डगमगाने नहीं दिया और 2018 में दोबारा परीक्षा दी। 2019 में आये यूपीएससी के परिणाम में अपराजिता ने 759 कैंडिडेट्स में से 82वाँ रैंक हासिल करके अपना लक्ष्य प्राप्त कर ही लिया। इस प्रकार दृढ़ मनो बल और प्लानिंग से की गई तैयारी ने उसे उसकी मंजिल तक पहुँचा दिया। उसकी मेहनत और जज्बा अन्य लोगों के लिये भी नज़ीर है कि यदि वह जो कुछ पाना चाहते हैं, उसके लिये पूरी शिद्दत से मेहनत करें तो उन्हें उनकी मेहनत का फल अवश्य मिलेगा।

हार नहीं मानने के कारण बनी अपराजिता !

अपराजिता का कहना है कि वह शारीरिक रूप से कभी भी बहुत मजबूत नहीं रही, परंतु उसके हौसले हमेशा बुलंद रहे। वह कहती है कि उसके नाम के पीछे भी यही सच्चाई है। उसकी हार न मानने के कारण ही उसके नाना ने उसका नाम अपराजिता रखा था और वह हमेशा उसे इसकी याद भी दिलाते रहे। यूपीएससी की तैयारी के दौरान भी अपराजिता ने याद रखा कि उसका नाम क्या है और उसे किसी भी कीमत पर हार नहीं माननी है। उसका यही हौसला उसकी सफलता का कारण बना।

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