मोदी सरकार दोबारा बनते ही देश के इन 45 करोड़ लोगों के लिए उठाएगी यह बड़ा कदम

लोकसभा चुनाव 2019 में जिस तरह से विपक्ष बँटा हुआ और दिशाहीन दिखाई दे रहा है। उसके पास भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरोध के अतिरिक्त देश के लिये कोई दूरंदेशी वाला एजेंडा नज़र नहीं आ रहा है, उसे देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पूर्ण विश्वास है कि देश की जनता पिछले पाँच वर्ष में उनकी सरकार द्वारा किये गये कामों को ध्यान में रखकर एक बार फिर से उनकी ही सरकार को दोबारा सत्ता में लायेगी। इसी कारण मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव के दौरान भी सरकार के कामों में कोई रुकावट नहीं आने दी है और सभी तरह के सरकारी कामों को चुनाव आचार संहिता के दायरे में रह कर निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं।

इसी श्रृंखला में मोदी सरकार ने अब देश में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले 45 करोड़ लोगों को सरकार की सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं से लाभान्वित करने के लिये एक बड़ा कदम उठाने का निर्णय किया है। केन्द्र सरकार सुप्रीम कोर्ट (SC) के निर्देश पर आधार जैसे एक युनिक नंबर की शुरुआत करने जा रही है। यह काम सरकार लोकसभा चुनाव पूरे होने के तुरंत बाद शुरू करने जा रही है। इस काम को अंजाम तक पहुँचाने का काम करेगा केन्द्र सरकार का श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (MLE)।

दरअसल हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का पंजीकरण करने का निर्देश दिया था, क्योंकि सरकार के पास ऐसे क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों का कोई ठोस आँकड़ा नहीं था। श्रम व रोजगार मंत्रालय के एक अनुमान के अनुसार अभी देश में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की संख्या लगभग 45 करोड़ है। सरकार के पास ऐसे लोगों का कोई पंजीकरण या निश्चित आँकड़ा नहीं होने से अधिकांश लोगों तक सरकार की सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं का लाभ नहीं पहुँच पाता है।

इसलिये अब सरकार के श्रम व रोजगार मंत्रालय ने अपनी देखरेख में देश व्यापी स्तर पर अभियान चलाकर ऐसे लोगों का पंजीकरण करने का निर्णय किया है। इस अभियान में असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को आधार कार्ड की तरह ही एक यूनीक नंबर दिया जायेगा। इस पंजीकरण से सरकार के पास असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों का आँकड़ा उपलब्ध होगा और सरकार उन्हें न सिर्फ अपनी योजनाओं की जानकारी पहुँचा सकेगी, बल्कि उन्हें आवश्यकतानुसार योजनाओं का लाभ भी दे सकेगी। इस प्रकार असंगठित क्षेत्रों की जानकारी एकत्र करने और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ देने की सुचारू व्यवस्था करने के स्वच्छ इरादे से यह बड़ा कदम उठाया जा रहा है।

केन्द्र सरकार इस काम को दो तरह से करेगी। श्रम व रोजगार मंत्रालय की ओर से ऐसे श्रमिकों के पंजीयन के लिये एक ऐप लॉन्च की जायेगी। इस ऐप के माध्यम से ऐसे लोग स्वयं अपना पंजीकरण करवा सकेंगे। इसके अलावा कॉमन सर्विस सेन्टर (CWC) के माध्यम से भी पंजीकरण किया जायेगा, जहाँ जाकर लोग एक सामान्य शुल्क देकर अपना पंजीकरण करवा सकेंगे। पंजीकरण हो जाने पर ऐसे लोगों को सरकार की पेंशन से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं आदि की विविध योजनाओं का सीधा लाभ मिलना आसान हो जायेगा।

कंपनियों को छोड़कर घरों में काम करने वाले नौकर तथा दुकानों व ऑफिसों में काम करने वाले श्रमिक, निर्माण साइटों पर काम करने वाले, ऑटो-टैक्सी चलाने वाले, सुरक्षा एजेंसियों में काम करने वाले सुरक्षा गार्ड और आँगनवाड़ियों में काम करने वाली महिलाएं आदि असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों की परिभाषा से परिभाषित किये जायेंगे। ऐसे लोगों को अभी तक सरकारी योजनाओं का लाभ इसलिये नहीं मिल पाता था, क्योंकि सरकार के पास ऐसे लोगों का कोई ठोस आँकड़ा नहीं था, परंतु अब इस यूनीक नंबर के आधार पर वह सभी योजनाओं का लाभ ले पायेंगे। अभी कई प्रदेशों में राज्य सरकारें असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों का पंजीकरण करने का काम कर रही हैं। अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर यह काम नहीं हुआ है।

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