अगर सच्चाई है साथ, तो क्यों रहे भाग ? जानिए ‘पुत्र मोह’ ने कैसे कर दी चिदंबरम की यह दुर्गति ?

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 21 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार सुबह दो ट्वीट किए और कहा, ‘हम उनके (चिदंबरम) साथ खड़े हैं और सच्चाई के लिए लड़ते रहेंगे, चाहे कोई भी परिणाम हो। राज्यसभा के एक अत्यंग योग्य और सम्मानित सदस्.य पी. चिदंबरम ने वित्त मंत्री तथा गृह मंत्री के रूप में दशकों तक निष्ठा के साथ हमारे देश की सेवा की। वे मोदी सरकार की विफलतां को उजागर करते हैं, जो इस कायर सरकार को पसंद नहीं है, इसलिए उन्हें शर्मनाक तरीके से टार्गेट किया जा रहा है।’

जब कोई मामला अदालत में विचाराधीन हो, तब उस पर टिप्पणी करने से राजनेताओं को बचना चाहिए, परंतु प्रियंका गांधी वाड्रा ने दिग्गज कांग्रेस नेता, दिग्गज अर्थशास्त्री और पूर्व केन्द्रीय मंत्री पी. चिदंबरम के समर्थन में जो ट्वीट किए, उससे लगता है कि प्रियंका में भी अभी राजनीतिक परिपक्वता आना बाकी है। प्रियंका के ट्वीट पर सबसे पहला प्रश्न तो यह उठता है कि अगर सच्चाई चिदंबरम साथ है, तो वे भाग क्यों रहे हैं ? जाँच एजेंसियों केन्द्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कई समन के बावजूद चिदंबरम उपस्थित क्यों नहीं हुए ? क्यों चिदंबरम हर बार पूछताछ को टालने का प्रयास करते रहे ? यदि चिदंबरम के साथ सच्चाई है, तो पिछले 24 घण्टों से अचानक लापता क्यों हैं ? क्यों जाँच एजेंसियों को चिदंबरम जैसे दिग्गज भारतीय राजनेता के विदेश भाग जाने का डर है, जिसके चलते उनके विरुद्ध लुकआउट सर्कुलर जारी करना पड़ा ? क्या चिदंबरम को अपनी सच्चाई और भारतीय न्यायपालिका पर विश्वास नहीं है ?

क्या है पूरा मामला ?

भारत सरकार में वित्त मंत्रालय के अधीनस्थ विदेशी निवेशन प्रोत्साहन बोर्ड (FIPB) में विदेशी निवेश की आड़ में चल रहे बड़े घोटाले के एक मामले में पी. चिदंबरम पर कानूनी शिकंजा कसा गया है। दरअसल एफआईपीबी ने मई-2007 में INX MEDIA कंपनी को 4.62 करोड़ रुपए के विदेशी निवेश की स्वीकृति दी थी। एफआईपीबी ने साथ ही स्पष्ट किया था कि आईएनएक्स मीडिया कंपनी में डाउनस्ट्रीम इन्वेस्टमेंट के लिए अलग स्वीकृति आवश्यक होगी। डाउनस्ट्रीम इन्वेस्टमेंट एक भारतीय कंपनी की ओर से अन्य में सबस्क्रिप्शन या शेयर्स खरीदने के जरिए अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश (IFI) होता है, परंतु आईएनएक्स मीडिया ने डाउनस्ट्रीम इन्वेस्टमेंट करते हुए 305 करोड़ रुपए से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हासिल (FDI) किया था, जबकि कंपनी को केवल 4.62 करोड़ रुपए के एफडीआई की ही स्वीकृति दी गई थी।

ऐसा हुआ खुलासा

यह खुलासा उस समय हुआ, जब जाँच एजेंसिया 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जाँच के दौरान एयरसेल-मैक्सिस डील की जाँच कर रही थीं। इस डील में मनी लॉण्ड्रिंग की जाँच कर रही ईडी का ध्यान मैक्सिस से जुड़ी कंपनियों से कार्ति चिदंबरम से जुड़ी कंपनियों में पैसे आने पर गया। उस समय कार्ति के पिता पी. चिदंबरम केन्द्रीय वित्त मंत्री थे। जब ईडी मामले की तह तक पहुँची, तो इस केस में घूसखोरी की परतें एक के बाद एक खुलती चली गईं और आईएनएक्स मीडिया में हुए अवैध एफडीआई घोटाले का पर्दाफाश हुआ।

चिदंबरम के कार्यकाल में हुई अनियमितताएँ

वर्ष 2014 में केन्द्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार आई। उसी दौरान सीबीआई को एफआईपीबी में चल रही अनियमितताओं का पता चला, तो उसने 15 मई, 2017 को पी. चिदंबरम के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई। सीबीआई ने आरोप लगाया कि एफआईपीबी ने आईएनएक्स मीडिया को 2007 में वित्त मंत्री के तौर पर पी. चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान विदेश से 305 करोड़ रुपए फंड देने के लिए क्लियरेंस देने में अनियमितत की। एफआईआर के आधार पर ईडी ने चिदंबरम के विरुद्ध प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉण्डरिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया।

‘मेरे बेटे की मदद करनी होगी’

पी. चिदंबरम पर आज जो कानूनी शिकंजा कसा है, उसके पीछे आईएनएक्स मीडिया की प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी का बड़ा योगदान है। इंद्राणी मुखर्जी सरकारी गवाह बन गईं और घोटाले पर से पर्दा उठने लगा। इंद्राणी ने जाँच एजेंसी को बताया कि आईएनएक्स मीडिया की अर्जी एफआईपीबी के पास थी, तभी उन्होंने अपने पति पीटर मुखर्जी और कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ चिदबंरम के नॉर्थ ब्लॉक स्थित कार्यालय में जाकर उनसे मुलाकात की थी। इंद्राणी के ईडी को दिए बयान के अनुसार पीटर ने चिदंबर से बातचीत शुरू की और कहा कि आईएनएक्स की अर्जी एफडीआई के लिए है। पीटर ने अर्जी की कॉपी भी चिदंबरम को सौंपी। एफआईपीबी की मंजूरी के बदले चिदंबरम ने पीटर से कहा, ‘मेरे पुत्र कार्ति के बिज़नेस में मदद करनी होगी।’

मोदी सरकार ने दी जाँच की अनुमति

इस बीच केन्द्रीय विधि मंत्रालय ने सीबीआई को चिदंबरम के विरुद्ध जाँच की अनुमति दे दी। ईडी ने कार्ति की 54 करोड़ की संपत्ति और एक कंपनी अटैच कर ली। ईडी की जाँच में पता चला कि आईएनएक्स मीडिया के निदेशक पीटर और प्रमोटर इंद्राणी ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता से मुलाकात की थी, ताकि उनके आवेदन में देरी न हो। सीबीआई का आरोप है कि कार्ति ने वित्त मंत्रालय के अधिकारियों पर अपने प्रभाव का दुरुपयोग कर आईएनएक्स मीडिया की ओर से किए गए अवैध विदेशी निवेश का मामला दबा दिया।

चिदंबरम ने जाँच में क्यों नहीं किया सहयोग ?

जैसा कि प्रियंका गांधी वाड्रा ने आज ट्वीट किया कि सच्चाई उनके साथ है, तो सवाल यह उठता है कि चिदंबरम पूछताछ से क्यों भागते रहे ? ईडी ने 2018 में ही चिदंबरम को पूछताछ के लिए समन किया, परंतु वे हाजिर नहीं हुए। इसके उलट चिदंबरम ने गत 30 मई, 2018 को दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर भ्रष्टाचार के मामले में और 23 जुलाई, 2018 को ईडी के धन शोधन मामले में अग्रिम जमानत मांगी। 25 जुलाई, 2018 को हाई कोर्ट ने चिदंबरम को दोनों ही मामलों में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे दी, परंतु गत 25 जनवरी, 2019 को हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत पर फ़ैसला सुरक्षित रखा। 20 अगस्त को हाई कोर्ट ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका ठुकरा दी और तत्काल समर्पण करने का आदेश दिया। जब हाई कोर्ट ने चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट जाने तक का समय देने से भी इनकार कर दिया, तो चिदंबरम को समर्पण कर देना चाहिए था, परंतु चिदंबरम लापता हो गए। हाई कोर्ट के मंगलवार के निर्णय के तुरंत बाद ईडी और सीबीआई चिदंबरम को गिरफ्तार करने उनके घर पहुँचे, तो वे वहाँ नहीं पाए गए। उनका फोन स्विच ऑफ हो गया। क्या प्रियंका इसे लेकर कोई ट्वीट करेंगी ?

ट्विटर पर चिदंबरम की हो रही खिंचाई

ट्विटर पर भी आज #ChidambaramMissing ट्रेंड कर रहा है। लोग तरह-तरह के ट्वीट कर कांग्रेस और चिदंबरम की खिंचाई कर रहे हैं। कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कहा कि जब चिदंबरम मोदी सरकार से पूछ रहे थे कि माल्या, नीरव और मेहुल चोकसी कैसे भागे, तब क्या वे भाग जाने की युक्ति पूछ रहे थे ?

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