ये है STARTUP का दम : हिमालय में पड़ी अमूल्य संजीवनी मिल रही केवल 25 रुपए में..!

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 26 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। त्रेता युग में रामायण काल के दौरान जब लंका में राम-रावण युद्ध के दौरान रावण के पुत्र मेघनाद की अमोघ शक्ति से घायल होकर लक्ष्मणजी बेसुध हो गये थे, तब लंका के प्रसिद्ध सुसैन वैद्य ने लक्ष्मणजी की मूर्च्छा दूर करने के लिये हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं में पाई जाने वाली संजीवनी बूटी लाने का सुझाव दिया था, जिसके बाद राम भक्त हनुमान रातों रात लंका से उड़ कर आकाश मार्ग से हिमालय की पहाड़ियों में पहुँचे थे और संजीवनी बूटी की पहचान नहीं होने से पूरी एक चट्टान ही उखाड़ कर लंका ले गये थे। वैज्ञानिकों ने भी सिद्ध किया है कि जो बूटियाँ हिमालय की पहाड़ियों में पाई जाती हैं, वही बूटियाँ श्रीलंका में भी एक पहाड़ी पर पाई जाती हैं और यह पहाड़ी उस स्थान के निकट स्थित है, जहाँ राम-रावण युद्ध के दौरान लक्ष्मणजी बेसुध होकर धराशायी हुए थे। उस चामत्कारिक बूटी से ही सुसैन वैद्य लक्ष्मणजी को होश में लाये थे। कलियुग में भी वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की ओर से लंबे समय से हिमालय की पहाड़ियों में उस चामत्कारिक संजीवनी बूटी की खोज की जा रही है। कई बार इस संजीवनी बूटी को खोजने के दावे भी किये गये हैं। अब फिर एक भारतीय शोधकर्ता ने संजीवनी बूटी को खोज निकालने का दावा किया है और कहा है कि यह बूटी एक सामान्य जूस (JUICE) की तरह नियमित पीने से यह इन्फेक्शन (INFECTION) से लेकर कैंसर (CANCER) तक के रोगों में लाभदायी सिद्ध होती है। शोधकर्ता ने एक स्टार्टअप के माध्यम से इस बूटी का जूस बाजार (MARKET) में उपलब्ध कराने की तैयारी भी की है।

STARTUP MEDITESTI ने खोजी संजीवनी बूटी

उत्तर प्रदेश में कानपुर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी INDIAN INSTITUTE OF TECHNOLOGY (IIT) के एक स्टार्टअप (STARTUP) मेडिटेस्टी (MEDITESTI) के संस्थापक डॉ. सोमेश कुमार का दावा है कि उनके स्टार्टअप मेडिटेस्टी ने लंबे शोध के बाद हिमालय की पहाड़ियों में पाई जाने वाली संजीवनी बूटी को खोज निकाला है और अब वे इसे लोगों को जूस के रूप में पिलाने जा रहे हैं। भारतीय प्रबंधन संस्थान यानी INDIAN INSTITUTE OF MANAGEMENT (IIM) अहमदाबाद से मैनेजमेंट की डिग्री (DEGREE) लेने वाले नैनीताल-उत्तराखंड के मूल निवासी डॉ. सोमेश कुमार ने दिल्ली विश्वविद्यालय (DELHI UNIVERSITY) से भारतीय मसालों के चिकित्सकीय उपयोग विषय में पीएचडी (PHD) की है। डॉ. सोमेश के अनुसार दो साल पहले वे एक सड़क दुर्घटना (ACCIDENT) में गंभीर रूप से घायल हुए थे। जब वे घर पर आराम कर रहे थे, तब डॉक्टर ने उन्हें जूस का सेवन करने की सलाह दी थी। हालाँकि उन्होंने पाया कि जूस में केमिकल प्रिज़र्वेशन (CHEMICAL PRESERVATION) का प्रयोग किया जाता है, जो कहीं न कहीं शरीर को नुकसान पहुँचाता है। तब डॉ. सोमेश को विचार आया कि क्यों न ऐसा जूस तैयार किया जाए, जो कि पूरी तरह से प्राकृतिक यानी नैचुरल (NATURAL) हो और उसमें केमिलक प्रिज़र्वेशन का प्रयोग न हो। इसके बाद आईआईटी कानपुर में स्टार्टअप का आयोजन हुआ तो उन्होंने भी अपना आइडिया (IDEA) प्रस्तुत किया। उनका आइडिया सभी को पसंद आया और आईआईटी तथा टाई-अप की मदद से इस आइडिया को वास्तविकता में बदलने की शुरुआत की गई। अब मेडिटेस्टी की ओर से कई जूस बाजार में उतारे जा रहे हैं। इनमें से किसी भी जूस की बोतल में केमिकल प्रिज़र्वेशन का प्रयोग नहीं किया जाता है।

2020 तक 200 स्टार्टअप शुरू करेगा कानपुर IIT

उल्लेखनीय है कि आईआईटी कानपुर के इंक्यूबेशन सेंटर (INCUBATION CENTER) में 2020 तक 200 स्टार्टअप कंपनियाँ शुरू कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और इसकी जिम्मेदारी 8 सदस्यीय प्रोफेसरों की एक टीम को सौंपी गई है। इस टीम को इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन कॉ-ऑर्डिनेशन एडवाइज़री कमेटी का नाम दिया गया है। इस टीम में प्रत्येक विभाग से एक-एक प्रोफेसर को शामिल किया गया है। कमेटी के प्रभारी इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेंटर के इंचार्ज प्रो. अमिताभ बंदोपाध्याय हैं। कमेटी के सदस्यों में सिविल इंजीनियरिंग के प्रो. तरुण गुप्ता, प्रो. अश्विनी ठाकुर, प्रो. मैनक दास, प्रो. सलिल गोयल, प्रो. अंकुश शर्मा, प्रो. इंद्रनील साहा और प्रो. जे. राजकुमार हैं। कमेटी तकनीक (TECHNIQUE) के साथ-साथ एग्रीकल्चर (AGRICULTURE), मेडिकल (MEDICAL) और सर्विस सेक्टर (SERVICE SECTOR) के स्टार्टअप पर काम कर रही है। जिन स्टार्टअप कंपनियों को यहाँ इंक्यूबेट (स्थापित) किया जाता है, उन्हें आर्थिक मदद भी दी जाती है। इसके अलावा कंपनी का ऑफिस सेटअप करने के लिये इंक्यूबेशन सेंटर में स्थान भी दिया जाता है। ये कंपनियाँ आईआईटी के विभिन्न शोध लेबों का प्रयोग भी करती हैं। इस इंक्यूबेशन सेंटर में बाहरी युवाओं को भी स्टार्टअप शुरू करने का पर्याप्त अवसर दिया जाता है। कोई भी अपना आइडिया सिडबी को भेज सकता है। आइडिया का कॉन्सेप्ट समझने के बाद उसे प्रेज़ेंटेशन के लिये बुलाया जाता है।

बूटी के साथ नैचुरल पाइन-एप्पल और नारियल पानी भी बेचेगा मेडिटेस्टी

डॉ. सोमेश के अनुसार उनके द्वारा खोजी गई संजीवनी बूटी हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं में द्रोणागिरी पर्वत से लेकर मंगोलिया तक फैली मिलती है। ट्रायल के समय उनके द्वारा लेह-लद्दाख से संजीवनी बूटी मँगाई गई थी, परंतु अब यह बूटी मंगोलिया से मँगाई जा रही है, क्योंकि वहाँ का वातावरण अधिक शुद्ध है। डॉ. सोमेश के मुताबिक क्लिनिकल ट्रायल (CLINICAL TRIAL) में संजीवनी बूटी के जूस का फायदा सामान्य इंफेक्शन से लेकर कैंसर के रोग तक में मिला है। इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि यदि इसका प्रयोग नियमित रूप से किया जाए तो यह अधिकांश बीमारियों में कारगर सिद्ध होगा। डॉ. सोमेश के अनुसार रविवार को उनके स्टार्टअप मेडिटेस्टी की ओर से नारियल पानी की लॉन्चिंग की गई। इसका शुभारंभ आईआईटी कानपुर के प्रो. बीवी फणी ने किया। यह नारियल पानी शत-प्रतिशत नैचुरल है। इसमें वास्तविक नारियल पानी की तरह सभी न्यूट्रीशन (NUTRITION) मौजूद रहते हैं। इसमें किसी प्रकार के केमिकल प्रिज़र्वेशन का प्रयोग नहीं किया गया है। डॉ. सोमेश के अनुसार 200 मि.ली. नारियल पानी (जूस) की कीमत 25 रुपये रखी गई है, जबकि नारियल लेकर नारियल पानी पिया जाए तो लगभग 120 मि. ली. नारियल पानी की कीमत 40 रुपये तक चुकानी पड़ती है। इस नारियल पानी जूस का स्वाद नारियल पानी के समान ही है। डॉ. सोमेश के अनुसार बोतल के रूप में पहला वॉटर मेलन जूस जल्दी ही बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। इसी प्रकार पाइन-एप्पल (PINE-APPLE) तथा एप्पल का जूस भी बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। संजीवनी बूटी का 200 मि.ली. जूस भी 25 रुपये में बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। यह जूस पूरी तरह से हाइजेनिक और न्यूट्रीशन से भरपूर है।

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