EXCLUSIVE : बीस साल बाद ‘बूढ़ा’ हो जाएगा सरदारों का पंजाब, नौजवान रह जाएँगे आधे और बुज़ुर्ग हो जाएँगे दुगुने !

Written by

* लड़खड़ाने लगेगी जट्टों के हरियाणा और पहाड़ियों के हिमाचल की जवानी भी

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 6 जुलाई, 2019 (YUVAPRESS)। हिन्दू बहुल भारत देश में इस्लाम, सिख, ईसाई, बौद्ध और पारसी सहित अनेक धर्मों व पंथों के अनुयायी भी मिल-जुल कर, भाईचारे के साथ और सौहार्दपूर्ण वातावरण में रहते हैं, परंतु इन सभी धर्मों में एकमात्र सिख धर्म ऐसा है, जिसकी स्थापना हिन्दू धर्म की रक्षा के उद्देश्य से हुई थी। अब जो धर्म किसी अन्य धर्म के रक्षार्थ स्थापित हुआ हो, वह धर्म तथा उसके अनुयायी स्वाभाविक रूप से ‘सरदार’ (नेतृत्व कर्ता) और शूरवीर ही होंगे। निःसंदेह सिख धर्म के लोगों में यह दोनों गुण सहज हैं।

भारत के 31 में से 30 राज्यों में अल्पसंख्यक सिख धर्म के लोगों का अपना पृथक एक राज्य पंजाब भी है, जहाँ वे बहुसंख्यक हैं। पंजाब का नाम आते ही प्रत्येक भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है, क्योंकि पंजाब और पंजाबियों की भारत भक्ति का एक लम्बा-चौड़ा और गौरवान्वित करने वाला इतिहास रहा है। यही कारण है कि पंजाबियों यानी सिख धर्म के अनुयायियों को सरदार, शूरवीर, पंजाब दे शेर (सिंह) और आज के आधुनिक युग में तो SINGH IS KING भी कहा जाता है, परंतु शुक्रवार को संसद में सरकार की ओर से प्रस्तुत की गई एक रिपोर्ट ने पंजाब के सरदारों को मिली ‘सिंह इज़ किंग’ उपाधि पर संकट के बादल के संकेत दिए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार सरदारों का पंजाब धीरे-धीरे बूढ़ा हो रहा है और अगले बीस वर्षों में पंजाब में नौजवानों की संख्या आज के मुक़ाबले आधी रह जाएगी, जबकि बुज़ुर्गों की संख्या आज के मुक़ाबले दुगुनी हो जाएगी।

जनसंख्या नियंत्रण के SIDE EFFECTS ?

वास्तव में संसद में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट जनसंख्या नियंत्रण के लिहाज़ से तो पंजाब के लिए उत्तम स्थिति दर्शाती है, परंतु इसके साइड इफेक्ट्स यानी दुष्प्रभाव ऐसे होंगे कि जाँबाजों और जवानों का पंजाब देखते ही देखते लड़खड़ाते बूढ़ों का पंजाब बन जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार जनसंख्या नियंत्रण के उपाय अपनाए जाने के कारण पंजाब में वार्षिक जनसंख्या वृद्धि दर में लगातार गिरावट आ रही है। यह दर वर्ष 2011 में 1.39 प्रतिशत थी, जिसके वर्ष 2031-41 तक घट कर 0.15 प्रतिशत रह जाने का अनुमान है। इसका अर्थ यह हुआ कि पंजाब की जनसंख्या जनगणना 2001 में 2.44 करोड़ और 2011 में 2.77 करोड़ थी, परंतु 2031-41 में जनसंख्या वृद्धि दर 0.15 प्रतिशत की दर से यानी हर वर्ष मात्र 41,550 लोगों का ही जन्म होगा। इस लिहाज से अगले बीस वर्षों में पंजाब की जनसंख्या मात्र 8.31 लाख लोग ही जुड़ पाएँगे।

इस तरह तो बूढ़ा हो जाएगा पंजाब !

संसद में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के अनुसार ही जनसंख्या वृद्धि का ट्रेंड रहा, तो एक बात तो निश्चित है कि पंजाब अगले बीस से तीस वर्षों में बूढ़ा हो जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में 2011 में 0-19 वर्ष तक की आयु के लोगों की आबादी 35.8 प्रतिशत थी, जो 2021 में 28.2, 2031 में 23.8 और 2041 में मात्र 21 प्रतिशत रह जाएगी। यानी कि बीस साल बाद पंजाब में नवयुवकों की जनसंख्या 2011 की तुलना में डेढ़ गुना कम हो जाएगी। दूसरी तरफ 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की संख्या लगभग दुगुनी हो जाएगी। पंजाब में 2011 में 60 वर्ष से अधिक आयु के बुज़ुर्गों की जनसंख्या 10.4 थी, जो 2021 में 12.3, 2031 में 16 और 2041 में 20.6 प्रतिशत पर पहुँच जाएगी।

उत्पादक वर्ग में भी बढ़ेगी बूढ़ों की संख्या

20 से 59 वर्ष आयु वर्ग के लोगों को उत्पादक वर्ग की श्रेणी में रखा जाता है। किसी भी राज्य-देश में कामकाज करने वालों की औसत आयु 20 से 59 वर्ष के बीच ही होती है। यद्यपि संसद में प्रस्तुत की गई इस रिपोर्ट के अनुसार 20 से 59 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की जनसंख्या में भी वृद्धि होगी, परंतु यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य और चिंताजनक है कि जब जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट आएगी, तो इसका सीधा अर्थ यह होगा कि उत्पादक वर्ग में नवयुवक कम संख्या में जुड़ेंगे। ऐसे में उत्पादक वर्ग में धीरे-धीरे अधिकतम् आयु यानी 59 वर्षीय लोगों की संख्या बढ़ती जाएगी। इस रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में 2011 में 20-59 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की जनसंख्या 53.9 प्रतिशत थी, जो 2021 में 5.6 प्रतिशत बढ़ कर 59.5 और 2031 में मात्र 0.7 प्रतिशत बढ़ कर 60.2 पर पहुँचेगी, परंतु 2041 में 20 से 59 वर्षीय लोगों की जनसंख्या में सीधी 1.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज होगी और यह 58.4 प्रतिशत पर आ जाएगी। जैसा कि पहले कहा गया, जनसंख्या वृद्धि दर 0.15 प्रतिशत ही रह जाने के कारण इन 58.4 प्रतिशत लोगों में स्वाभाविक रूप से ही 20 से 40 वर्ष के लोगों की संख्या कम होगी, जबकि 41 से 59 वर्ष के लोगों की संख्या अधिक होगी।

हरियाणा और हिमाचल की जवानी भी लड़खड़ाने लगेगी

संसद में प्रस्तुत की गई इस रिपोर्ट के अनुसार पंजाब ही नहीं, अपितु हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की जवानी भी अगले बीस वर्षों में लड़खड़ाने लगेगी। रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या वृद्धि दर 2011 में 1.29 प्रतिशत थी, जो 2031-41 में घट कर 0.24 प्रतिशत रह जाएगी। इसी प्रकार हरियाणा की जनसंख्या वृद्धि दर 2011 में 1.99 प्रतिशत थी, जो 2031-41 में घट कर 0.44 प्रतिशत रह जाएगी। दोनों राज्यों को भी आयु वर्ग में वर्गीकृत करके देखा जाए, तो स्पष्ट रूप से प्रतीत होता है कि अगले बीस वर्षों में हिमाचल प्रदेश और हरियाणा की आबादी में भी बूढ़ों की संख्या बढ़ जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में 2011 में 0-19 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की संख्या 35.3 प्रतिशत थी, जो 2021 में घट कर 29, 2031 में 24.5 और 2041 में 22 प्रतिशत रह जाएगी अर्थात् नवयुवकों की संख्या में डेढ़ गुना कमी आएगी। इसी प्रकार हिमाचल प्रदेश में 20-59 वर्ष आयु वर्ग की बात करें, तो 2011 में इनकी जनसंख्या 54.5 प्रतिशत थी, जो 2021 में मामूली बढ़त के साथ 58.8, 2031 में 59.3 और 2041 में गिरावट के साथ 56.9 प्रतिशत रह जाएगी। इसका अर्थ यह हुआ कि उत्पादक वर्ग में बूढ़ों की संख्या बढ़ेगी। अनुत्पादक वर्ग यानी 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों की बात करें, तो हिमाचल प्रदेश में 2011 में इस वर्ग के लोगों की आबादी 10.3 प्रतिशत थी, जो 2021 में बढ़ कर 12.2, 2031 में 16.21 और 2041 में 21.1 प्रतिशत पर पहुँच जाएगी। मतलब बीस साल बाद बूढ़ों की संख्या दुगुनी हो जाएगी। यही हाल हरियाणा का भी होगा, जहाँ 0-19 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की संख्या 2011 में 40.3 थी, जो 2021 में घट कर 33.5, 2031 में 28.4 और 2041 में घट कर 24.9 रह जाएगी। अर्थात् नवयुवकों की संख्या में डेढ़ गुना कमी आएगी। दूसरी तरफ 20-59 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की जनसंख्या 2011 में 51 प्रतिशत थी, जो 2021 में बढ़ कर 57.1, 2031 में 59.5 हो जाएगी, जबकि 2041 में घट कर 59.3 प्रतिशत रह जाएगी। दूसरी तरफ बूढ़े दुगुने हो जाएँगे। हरियाणा में 2011 में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की जनसंख्या 8.7 प्रतिशत थी, जो 2021 में 9.5, 2031 में 12.1 और 2041 में 15.8 प्रतिशत हो जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में यह स्थिति जनसंख्या नियंत्रण के प्रति लोगों में जागृति के साथ-साथ जीवन प्रत्याशा (अधिकतम् आयुष्य) बढ़ने के कारण उत्पन्न हुई है।

Article Categories:
News

Leave a Reply

Shares