आकाश के बाद अब पाताल में भारत ने किया कारनामा : जान कर आप भी करेंगे गर्व !

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 1 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मेक इन इंडिया (MAKE IN INDIA) कॉन्सेप्ट खूब रंग ला रहा है। भारत ने आकाश के बाद अब पाताल में भी बड़ा कारनामा कर दिखाया है। इस कॉन्सेप्ट के माध्यम से भारत ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्म निर्भरता हासिल की है। इसी के साथ भारत ने विज्ञान और टेक्नोलॉजी में भी बड़े-बड़े देशों के दाँत खट्टे किये हैं। हाल ही में मोदी सरकार ने मिशन शक्ति की बड़ी कामयाबी की घोषणा की थी, जिसमें भारत ने अंतरिक्ष में दुश्मन के सैटेलाइट को निशाना बनाकर भेदने वाली ‘एंटी सैटेलाइट मिसाइल’ का सफल परीक्षण किया था। आकाश में यह कारनामा करने के बाद भारत की नज़र पाताल में अनूठी उपलब्धि हासिल करने पर थी और अब उसने यह बड़ी कामयाबी भी हासिल कर ली है। भारत ने पहली बार समुद्र के भीतर सब-मरीन केबल को दुरुस्त करने का काम किया है। इतना ही नहीं, यह काम करने वाली वैश्विक कंपनियों की तुलना में एक चौथाई कम दाम में उनसे आधे से भी कम समय में यह काम पूरा करने की अनूठी उपलब्धि हासिल की है। इसी के साथ भारत को अब ऐसे कामों के लिये वैश्विक कंपनियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

क्या है भारत-लंका सब-मरीन केबल

दरअसल, सिंगापुर से संचालित होने वाली सभी सोशल मीडिया कंपनियों का लगभग संपूर्ण डेटा भारत के समुद्र में बिछी सब-मरीन केबल के सहारे श्रीलंका तक पहुँचता है। इसके लिये भारत की बीएसएनएल और श्रीलंका टेलीकॉम की 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी वाली कंपनी भारत-लंका केबल सिस्टम ने भारत से श्रीलंका तक समुद्र में लगभग 330 किलोमीटर लंबी केबल लाइन बिछाई है। बंगाल की खाड़ी में चेन्नई से आगे तूतीकोरिन में समुद्र के भीतर लगभग 5 किलोमीटर अंदर भारत-श्रीलंका के बीच बिछी समुद्री या सब-मरीन केबल क्षतिग्रस्त हो जाने से श्रीलंका में व्हॉट्सएप, फेसबुक, ट्विटर, इंस्ट्राग्राम सहित अधिकांश सोशल मीडिया साइट्स व अन्य संचार सेवाएँ ठप हो जाने की आशंका पैदा हो गई थी। क्योंकि सब-मरीन केबल क्षतिग्रस्त हो जाने से उनकी इंटरनेट की स्पीड बिल्कुल धीमी हो गई थी, जिससे डाउनलोड और अपलोड की स्पीड कछुआ गति पर पहुँच गई थी। इससे पहले कि श्रीलंका का संचार सेवाओं से दुनिया के साथ संपर्क कट जाए, श्रीलंका ने भारत की बीएसएनएल से क्षतिग्रस्त केबल को दुरुस्त करने के लिये संपर्क किया।

स्वदेशी कंपनी ने केबल दुरुस्ती में दिखाई दिलचस्पी

इसके बाद बीएसएनएल और श्रीलंका टेलीकॉम की हिस्सेदारी वाली कंपनी भारत-लंका केबल सिस्टम ने सब-मरीन केबल की मरम्मत के लिये विज्ञापन जारी किया तो पहली बार भारतीय कंपनी पैरामाउंट केबल की निविदा प्राप्त हुई। बीएसएनएल के एक अधिकारी के अनुसार पैरामाउंट केबल्स के एमडी ध्रुव अग्रवाल की निविदा स्वीकार करने से पहले उनसे स्पष्ट रूप से कहा गया कि ऐसा पहली बार हुआ है, जब इस काम के लिये कोई भारतीय कंपनी आगे आई है। इसलिये उन पर काम को सफलता पूर्वक पूरा करने के साथ-साथ इस क्षेत्र में भारत की प्रतिष्ठा को स्थापित करने की भी बड़ी जिम्मेदारी होगी। यदि उनकी कंपनी इस काम में सफल रही तो भारत को इस काम के लिये चीन व अन्य देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और इस क्षेत्र में अन्य कंपनियों के आने से भारत की आत्म निर्भरता बढ़ेगी। साथ ही देश की सुरक्षा की दृष्टि से भी यह संवेदनशील काम है।

स्वदेशी कंपनी ने सफलता अर्जित कर देश का गौरव बढ़ाया

पैरामाउंट केबल के एमडी ध्रुव अग्रवाल के अनुसार चूँकि यह देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा प्रोजेक्ट था और पहली बार कोई भारतीय कंपनी यह काम करने जा रही थी, इसलिये उन्होंने कहीं भी कोई जोखिम नहीं लिया और कंपनी ने विदेशों से एक्सपर्ट बुलाए। उन्हें दैनिक 5,000 डॉलर तक का मेहनताना चुकाया। समुद्र के भीतर 5 किलोमीटर तक जेसीबी को ले जाया गया। केबल को समुद्र तल में उतारकर उसे ढंकने के लिये सिमेंट का डक्ट (नाला) बनाया गया, उसमें केबल को दबाया गया। जनवरी से शुरू हुआ प्रोजेक्ट अगस्त में पूरा हुआ। इस बीच 8 महीने तक दिन-रात काम चला, जिसमें 200 से 300 लोगों ने अलग-अलग शिफ्टों में काम किया और इस काम को सफलतापूर्वक पूरा किया। अग्रवाल के अनुसार उन्होंने केन्द्र सरकार से अनुरोध किया है कि सरकार देश के सभी समुद्र और नदियों में केबल डालकर इंटरनेट सेवा को मजबूत बनाए। इससे देश की संचार सेवाएँ दुरुस्त होंगी तथा अन्य भारतीय कंपनियाँ भी इसमें आगे आएँगी। इस प्रकार भारत ने समुद्र के भीतर भी सब-मरीन केबल की मरम्मत का काम करने में बड़ी कामयाबी हासिल की है। इसके बाद अन्य कंपनियों के इस क्षेत्र में आने से भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और भारत को इस काम के लिये विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

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