मोदी और ट्रंप का संग : देख कर दुनिया रह गई दंग

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 23 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। यूँ तो केमेस्ट्री सब्जेक्ट यानी रसायन शास्त्र ने एक रसायन को दूसरे रसायन में मिला कर दुनिया को नये नये रसायन दिये हैं, परंतु इतवार के दिन दुनिया भारत और अमेरिका की केमेस्ट्री देख कर दंग रह गई। इस केमेस्ट्री ने इन दोनों देशों को दोस्ती और आपसी सहयोग की नई ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया। इस नई केमेस्ट्री से जहाँ एक ओर इन दोनों देशों को फायदा होगा, वहीं दूसरी ओर इस केमेस्ट्री से कुछ देशों के पसीने भी छूट रहे हैं।

क्या हैं मोदी-ट्रंप की दोस्ती के मायने ?

हाऊडी मोदी कार्यक्रम में मोदी और ट्रंप ने अपनी – अपनी आवश्यकताओं का संकेत भी दिया। ट्रंप ने इस्लामिक कट्टरवाद और आतंकवाद के खिलाफ भारत और अमेरिका के साथ मिल कर लड़ने का ऐलान किया। वहीं चीन को चेतावनी देते हुए उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिये भी मिल कर काम करेंगे। अवैध घुसपैठ पर भी उन्होंने शाब्दिक प्रहार किया। उनका इशारा चीन पर था। हांगकांग में चीन के विरुद्ध लोकतांत्रिक प्रदर्शन जारी हैं, इसके अलावा चीन में उइगर मुस्लिमों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, उसे लेकर भी उनका संबोधन काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।

दूसरी तरफ पीएम मोदी ने भी नाम लिये बिना कहा कि अमेरिका में हुए 9-11 के आतंकी हमले और भारत के मुंबई शहर में हुए 26-11 के आतंकी हमले के गुनाहगार कहाँ से मिले हैं, यह सभी को पता है। मोदी ने भी कहा कि भारत और अमेरिका मिलकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ेंगे।

ट्रंप ने कहा कि व्हाइट हाउस में पहली बार भारत को सबसे बड़ा दोस्त मिला है। उन्होंने भारत आने की इच्छा भी जताई।

भारत के पीएम मोदी ने भी उन्हें अच्छा दोस्त बताते हुए सपरिवार भारत आने का न्योता दे दिया।

दोनों के संबोधन में ही एक दूसरे की प्रगाढ़ दोस्ती का जिक्र नहीं था, अपितु मंच से नीचे जब मोदी और ट्रंप ने एक दूसरे का हाथ पकड़ कर स्टेडियम का चक्कर लगाया और लोगों का अभिवादन किया तो पहली बार अमेरिका के इतिहास में लोगों ने ऐसा चित्र देखा। अमेरिकी प्रमुख और मोदी को लोगों ने गले मिलते देखा, हाथ मिलाते देखा और कंधे से कंधा मिला कर चलते देखा। मोदी और ट्रंप की इस केमेस्ट्री ने दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों की झलक दिखाई, वहीं इस केमेस्ट्री ने कुछ देशों की बेचैनी भी बढ़ाई है।

अमेरिका के लिये भारत का महत्व ?

भारतीय पीएम नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह से 2014 के बाद 2019 में लगातार दूसरी बार अभूतपूर्व चुनावी जीत हासिल की है, उससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभिभूत हैं और अमेरिका में 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में वे भी मोदी जैसा करिश्मा करना चाहते हैं। पिछले चुनाव में उन्हें अमेरिका में बसी इंडियन कम्युनिटी से कोई खास समर्थन नहीं मिला था, इसलिये ईसाई धर्म गुरु पॉप के बाद अमेरिका में पहली बार किसी राजनेता के लिये जब इतनी बड़ी तादाद में लोग जुटे तो ट्रंप ने अपना ट्रंप कार्ड खेल दिया और मोदी से दोस्ती के सहारे अपनी चुनावी नैया पार कराने के लिये इंडियन कम्युनिटी की सहानुभूति बटोरने का प्रयास किया, यदि उन्हें सचमुच इस समुदाय का समर्थन मिल गया तो चुनाव में उनकी स्थिति मजबूत हो सकती है और दोबारा राष्ट्रपति बनने का उनका सपना साकार हो सकता है।

तेजी से आगे बढ़ती भारतीय अर्थ व्यवस्था के कारण भारत अमेरिका के लिये रक्षा सौदे और व्यापार के लिहाज से एक बड़ा बाजार है। अमेरिका की चीन के साथ ट्रेड वॉर चल रही है। चीन ने भारतीय बाजार को इलेक्ट्रोनिक इक्विपमेंट और मोबाइल फोन का हब बना रखा है। अमेरिका की नज़र चीन के इसी हब पर है। वह भारत में अपनी इलेक्ट्रोनिक वस्तुओं और मोबाइल फोन कंपनियों के लिये ज़मीन तलाश रहा है। इसी साल अमेरिकी वस्तुओं पर अधिक शुल्क की शिकायत करके अमेरिका ने भारत को दिया जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज़ (GSP) का दर्जा छीन लिया था, जिसे मोदी के इसी अमेरिकी दौरे में वह वापस लौटा सकते हैं।

भारत के सैन्य साजो सामान काफी पुराने हो चुके हैं, जिससे भारत को नये सैन्य साजो सामान की जरूरत है। इसके लिये उसने रूस और फ्रांस से हथियारों के सौदे किये हैं। यद्यपि भारत ने अमेरिका से भी अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर खरीदे हैं, परंतु अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से अधिक अमेरिका के नजदीक आये और उसी से हथियार खरीदे। हाल ही में भारत ने अमेरिका से कच्चा तेल खरीदने की शुरुआत की है। इससे पहले वह ईरान और सऊदी अरब से कच्चा तेल खरीदता था। ईरान से तेल खरीदना भारत ने बंद कर दिया है और सऊदी अरब से खरीदे जाने वाले तेल की मात्रा भी घटा दी है।

भारत में उद्योग-व्यापार तथा आबादी बढ़ने के साथ ही बिजली की माँग भी तेजी से बढ़ रही है। कोयले और पानी से बिजली पैदा करने के बजाय भारत पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा के विकल्प अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस लिये अमेरिका अपनी ऊर्जा कंपनियों के लिये भी भारत में उज्जवल भविष्य देख रहा है। मेडिकल विज्ञान के क्षेत्र में भी अमेरिका भारत में अपने पाँव पसारना चाहता है।

चीन पर कूटनीतिक दबाव बनाने के लिये भी अमेरिका को भारत के सहयोग की दरकार है। इस प्रकार अमेरिका के लिये भारत कई मायनों में महत्वपूर्ण है। सबसे ज्यादा रक्षा सौदे, तेल और ऊर्जा सौदे तथा व्यापार के लिहाज से अमेरिका को भारत की आवश्यकता है।

भारत के लिये अमेरिका कितना महत्वपूर्ण ?

इसी प्रकार भारत को अपनी तेजी से आगे बढ़ती अर्थ व्यवस्था की गति बनाये रखने के लिये न सिर्फ अपने देश में निवेश बढ़ाने की जरूरत है, जिसके लिये वह अमेरिकी कंपनियों की तरफ देख रहा है। साथ ही उसे भारतीय व्यापार के उज्जवल भविष्य के लिये अपना निर्यात बढ़ाने की भी जरूरत है। इसलिये भारत दोनों तरह से अमेरिका को महत्वपूर्ण मानता है।

भारत को भी चीन और पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाने के लिये अमेरिकी सहयोग की आवश्यकता है।

भारत भी वैकल्पिक ऊर्जा, विज्ञान-तकनीक, मेडिकल विज्ञान, कच्चे तेल, सामरिक जरूरतों के लिये अमेरिकी सहयोग का इच्छुक है। अमेरिका में निर्यात और अमेरिका से भारत में निवेश के लिये भी वह अमेरिका की तरफ आशा भरी नज़रों से देखता है।

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