India ASEAN Summit- चीन को जवाब देने के लिए भारत की ‘Act East Policy’

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India ASEAN Summit

इस बार 26 जनवरी को नई दिल्ली में होने वाली गणतंत्र दिवस की परेड में ASEAN देशों के प्रमुख मुख्य अतिथि होंगे। दरअसल चीन को टक्कर देने के लिए भारत अपनी एक्ट ईस्ट पॉलिसी (Act East Policy) पर काम कर रहा है। इसी पॉलिसी के तहत भारत ने पूर्व के आसियान देशों के प्रमुखों को गणतंत्र दिवस पर विशिष्ठ अतिथियों के रुप में बुलावा भेजा है। बता दें कि आसियान देशों में लाओस, कंबोडिया, ब्रुनेई, इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देश शामिल हैं। भारत और आसियान देशों के संबंधों को हाल ही में 25 साल पूरे हुए हैं। गुरुवार को India-ASEAN Summit की शुरुआत हो रही है।

क्या है India Act East Policy

भारत ने साल 1993 में अपनी Look East Policy की शुरुआत की थी। इस पॉलिसी का मकसद आसियान समेत सभी पूर्वी देशों के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करना था। लेकिन साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आते ही भारत ने अपनी इस Look East Policy को बदलकर Act East Policy में तब्दील कर दिया। दरअसल ऐसा दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर में चीन की बढ़ती दखल के बाद किया गया। चीन जिस आक्रामकता के साथ इन इलाकों में अपना आधिपत्य बढ़ा रहा है, उसका जवाब देने के लिए भारत ने Look East को Act East Policy में बदल दिया। एक्ट ईस्ट पॉलिसी (Act East Policy) के तहत भारत पूर्वी देशों के साथ आर्थिक (Economic) के साथ ही सामरिक(Defensive) संबंध भी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

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व्यापार बढ़ाने पर जोर

आसियान देश छोटे जरुर हैं, लेकिन समुद्री ताकत के लिहाज से भारत के लिए बेहद अहम हैं। यही वजह है कि भारत आसियान देशों पर खास फोकस कर रहा है। मौजूदा समय में भारत की आसियान देशों के साथ ट्रेड सिर्फ 80 बिलियन डॉलर है, जबकि चीन इस मामले में 450 बिलियन डॉलर के साथ भारत से काफी आगे है। चीन समुद्र के रास्ते भारत को घेरने को योजना बना रहा है, ऐसे में आसियान देश भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

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India ASEAN Summit में होगी पीएम मोदी से मुलाकात

आसियान देशों में से वियतनाम, फिलीपींस, म्यांमार के राष्ट्र प्रमुखों के साथ पीएम मोदी बुधवार को मुलाकात करेंगे। वहीं थाईलैंड, सिंगापुर, ब्रुनेई के नेताओं के साथ पीएम मोदी गुरुवार को मुलाकात करेंगे। इन मुलाकातों में समुद्री सहयोग, सुरक्षा और व्यापार के मुद्दे सबसे अहम होंगे। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अपनी एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत भारत इस क्षेत्र में एक शक्तिशाली देश बनकर उभर सकता है, हालांकि इसके लिए अभी भारत को काफी काम करने की जरुरत है।

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